दुनिया में गूंजेगी जैंत की तुलसीः किया ऐसा कमाल, पूरा गांव होगा मालामाल

अब अब इस गांव के हर घर में तुलसी के मनके और माला बनाने का काम होता है। नौजवान दो घंटे काम करके, 200 रुपये माला बनाने में कमा लेते हैं। तुलसी एक कुटीर उद्योग की तरह पूरे गांव की अर्थव्यवस्था का आधार बनकर हर घर में छाई हुई है।

दुनिया में गूंजेगी जैंत की तुलसीः किया ऐसा कमाल, पूरा गांव होगा मालामाल

दुनिया में गूंजेगी जैंत की तुलसीः किया ऐसा कमाल, पूरा गांव होगा मालामाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल वोकल की मिसाल बन गया है मथुरा का एक गांव जैंत। और तुलसी की खेती के जरिये कान्हा से जुड़ा ये गांव अब देश और दुनिया में अपनी कंठी माला के जरिये पहचान बनाने जा रहा है। क्योंकि अब विश्व बैंक अपने प्रोजेक्ट के जरिये इस गांव को एडॉप्ट कर लिया है।

इस गांव के नाम की कहानी भी कम रोचक नहीं है कहते हैं भगवान श्रीकृष्ण ने अघासुर नामक दैत्य का वध करने के बाद यहां कुछ देर आराम किया। तब ग्वालों ने भगवान श्रीकृष्ण की जो जय-जयकार की थी उसी से इस गांव का नाम जैंत पड़ गया। यहां एक जय कुंड भी है।

नहीं मिल रहा था बड़ा बाजार

आज करीब 25 हजार की आबादी वाले इस गांव का प्रमुख कारोबार तुलसी की खेती और कंठीमाला का निर्माण है। करीब 35 फीसद आबादी इसी काम में लगी है। ग्रामीणों की समस्या ये थी कि तुलसी की खेती करके वह कच्चा माल तो तैयार कर लेते थे लेकिन बहु उपयोगी तुलसी के लिए उन्हें बाजार नहीं मिल रहा था।

दुनिया में गूंजेगी जैंत की तुलसीः किया ऐसा कमाल, पूरा गांव होगा मालामाल

दूसरे तुलसी की कंठीमाला की बिक्री के लिए भी स्थानीय कारोबारियों के अलावा बड़ा बाजार नहीं मिल रहा था। लेकिन अब जबकि वर्ल्‍ड बैंक ने जैंत गांव को विकास के लिए गोद ले लिया है। ऐसे में यहां की खेती और कंठीमाला के कारोबार को बड़ा बाजार मिलने की असीम संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं।

एक समय रोटी के थे लाले

घर घर पूजी जाने वाली तुलसी की खेती से जुड़ने से पहले जैंत गांव के अधिकांश लोग परेशान थे। दो वक्त की रोटी मिलना भी मुश्किल था। आलू और सरसों की परंपरागत खेती करके ये लोग कर्ज में डूब चुके थे।

अब इस गांव के हर घर में तुलसी के मनके और माला बनाने का काम होता है। नौजवान दो घंटे काम करके, 200 रुपये माला बनाने में कमा लेते हैं। तुलसी एक कुटीर उद्योग की तरह पूरे गांव की अर्थव्यवस्था का आधार बनकर हर घर में छाई हुई है।

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जैंत ग्राम पंचायत के दिन बहुरे तो आसपास की ग्राम पंचायतों के किसानों का ध्यान इस पर गया अब उन्होंने भी धान और सरसों की खेती के साथ तुलसी की खेती शुरू कर दी है।

जून-जुलाई में तुलसी की बुवाई हो चुकी है और सितंबर में फसल खलिहान में आ जाएगी। इसके बाद ग्रामीण परिवारों का लघु कुटीर उद्योग चालू हो जाएगा। यह सिलसिला अनवरत चलता रहता है।

500 से हजार रुपये कमाई

सुबह से ही बुजुर्ग, युवा, महिला और बच्चे तुलसी की माला और मनके बनाने में जुट जाते हैं। आसपास के गांवों के लोग जिन के पास कोई रोजगार नहीं है। यहां के किसानों से तुलसी ले जाकर मजदूरी पर माला और मनके बनाकर अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं।

दुनिया में गूंजेगी जैंत की तुलसीः किया ऐसा कमाल, पूरा गांव होगा मालामाल

तुलसी की कंठी माला बनाने वाले ये कुशल कारीगर एक दिन में 500 से एक हजार रुपये तक कमा रहे हैं। युवा एक-दो घंटे काम करके पढ़ाई-लिखाई और जेब खर्च की राशि इसी से निकाल रहे हैं।

कभी गांव से लोग रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे शहरों में गए लोग तुलसी की खेती होते ही लौटकर घर आ गए हैं। अब उनको काम घर पर ही मिल रहा है। कुछ लोगों ने अपनी मशीन लगा ली हैं।

विदेशों में दस गुना कीमत

मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन और राधाकुंड के थोक कारोबारी यहां से माला और मनके खरीद कर ले जा रहे हैं। यही कारण है कि तुलसी का एक और औषधीय गुण यहां की तकदीर बदल रहा है। लेकिन स्थानीय कारोबारी जिस तुलसी की कंठी माला की कीमत 500 रुपये दे रहे हैं विदेशों में उस माल की कीमत 5000 रुपये तक है।

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अब वर्ल्‍ड बैंक ने तुलसी व कंठीमाला की ब्रांडिंग करने के साथ ही इसे दुनिया भर में बाजार मुहैया कराने की योजना तैयार कर ली है। तुलसी की खेती करने वाले किसानों के खेतों पर सोलर पंप लगेंगे। तुलसी उत्पादन वाले खेतों तक करीब सात किमी इंटरलॉकिंग व आरसीसी रोड बनेगी। कंठी माला को बढ़ाना देने के लिए हाईटेक मशीनें लगेंगी और लोकल वोकल होकर बोलेगा।

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