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मड़ई से निकलकर मिर्जापुर की निधि ने जीता रजत पदक, कहानी जान रो देंगे आप

मड़ई से निकलकर उन्होंने इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की है कि हर कोई गौरवान्वित है। वे उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के नारायनपुर ब्लॉक के छोटे से गांव पचेवरा की रहने वाली हैं। मां के साथ झोपड़ी में आटा चक्की चलाकर पढऩे के साथ खेल के मैदान में दमखम दिखाने वाली बेटी निधि सिंह पटेल ने एक बार फिर देश का गौरव बढ़ाया है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 27 Sep 2019 10:57 AM GMT

मड़ई से निकलकर मिर्जापुर की निधि ने जीता रजत पदक, कहानी जान रो देंगे आप
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मिर्जापुर: मड़ई से निकलकर उन्होंने इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की है कि हर कोई गौरवान्वित है। वे उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के नारायनपुर ब्लॉक के छोटे से गांव पचेवरा की रहने वाली हैं। मां के साथ झोपड़ी में आटा चक्की चलाकर पढऩे के साथ खेल के मैदान में दमखम दिखाने वाली बेटी निधि सिंह पटेल ने एक बार फिर देश का गौरव बढ़ाया है।

57 किलोग्राम भार वर्ग में किया कमाल

निधि सिंह पटेल लोगों के बीच मेडल क्वीन व गोल्डन गर्ल के नाम से मशहूर हैं। मिर्जापुर की बेटी और काशी की बहू और इंटरनेशनल पावरलिफ्टिंग खिलाड़ी निधि सिंह ने कनाडा के सेंट जोन्स न्यूफाउन्डलैन्ड लैब्राडोर में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय कॉमनवेल्थ पॉवरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतकर पूरे देश को गौरवान्वित किया है।

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निधि ने 57 किलोग्राम भार वर्ग में 90 किलो भारत उठाकर रजत पदक जीता। निधि स्वर्ण पदक जीतने वाली कनाडा की खिलाड़ी से थोड़ा ही पीछे रह गईं। कनाडा की खिलाड़ी ने 92.5 किलोग्राम भार उठाकर प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। हालांकि निधि की यह कोई पहली उपलब्धि नहीं है। वे अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहले भी कमाल कर चुकी हैं। अब तक उनके खाते में 10 स्वर्ण पदक, तीन रजत पदक और दो कांस्य पदक दर्ज हैं। निधि ने जिस कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता में रजत पदक जीता उसमें विश्व के 46 देशों के खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया था।

पीएम की मुहिम की की तारीफ

निधि कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में मिली इस कामयाबी से काफी खुश हैं। उन्होंने अपने रजत पदक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर पूर्वांचल की एक बेटी की तरफ से छोटा सा तोहफा बताया। उन्होंने पीएम मोदी के बेटी पढ़ाओ-बेटी बढ़ाओ मुहिम की तारीफ करते हुए कहा कि पीएम की इस मुहिम के कारण ही उन्हें यह कामयाबी हासिल हुई है। उन्होंने जल्द ही पीएम मोदी से मुलाकात की इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वे पीएम से मिलकर अपना यह पदक उन्हें सौंपना चाहती हैं।

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गलती से गोल्ड मेडल से चूकीं

निधि की इस कामयाबी पर उनके कोच कमलापति त्रिपाठी ने भी खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि टीम मैनेजमेंट से गलती न हुई होती तो निधि गोल्ड मेडल जीत सकती थीं। कोच ने कहा कि टीम मैनेजमेंट की गलती से वे स्वर्ण पदक से चूक गईं। निधि ने पहले राउंड में 80 किलो व दूसरे राउंड में 90 किलो वजन उठाया, लेकिन तीसरे राउंड में मैनेजमेंट की गलती से उठाने का मौका न मिलने से स्वर्ण पदक जीतने से वंचित रह गईं।

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पहले भी हासिल कर चुकी हैं कई उपलब्धियां

वैसे निधि पहले भी कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में पदक जीतक देश को गौरवान्वित कर चुकी हैं। उन्होंने 2010 फिलिपींस की राजधानी मनीला में एशिया बेंच प्रेस पावरलिफ्टिंग में 52 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक, अगस्त 2011 में एशिया बेंच प्रेस पावरलिफ्टिंग ताइवान में 57 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक, 2011 में पावरलिफ्टिंग कॉमनवेल्थ लंदन में 57 किग्रा भार वर्ग में पांच स्वर्ण पदक, जुलाई 2015 में एशिया सीनियर महिला पावरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप हांगकांग में 57 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक जीता था। निधि ने 2015 अक्टूबर में ओमान में एशिया बेन्च प्रेस पावरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में 57 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।

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इसके साथ ही उन्होंने 2016 में एशियन बेंच प्रेस पावरलिफ्टिंग में रजत पदक, जनवरी 2017 में एशिया पावरलिफ्टिंग जमशेदपुर में तीन स्वर्ण पदक एवं तीनों में स्ट्रांग वूमेन आफ इंडिया का खिताब भी जीता था। निधि ने कॉमनवेल्थ गेम्स में दक्षिण अफ्रीका में एक स्वर्ण पदक और अब पावरलिफ्टिंग कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिफ में रजत पदक जीता है। कुल मिलाकर निधि अब तक अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक 10 स्वर्ण पदक, तीन रजत पदक और दो कांस्य पदक जीत चुकी हैं। निधि ने विपरीत परिस्थितियों से जूझते हुए ये उपलब्धियां हासिल की है। इसलिए हर कोई उनकी इस असाधारण उपलब्धि पर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

छलक आईं मां की आंखें

गांव की मड़ई में रजत पदक टांगकर आई निधि को देखकर मां की आंखों में आंसू भर आए। निधि की चाची की आंखें भी छलक गईं। सुविधाओं से वंचित होने के बावजूद अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर तमाम कामयाबियां हासिल करने वाली निधि के स्वागत में शहर के लोगों ने भी कोई कंजूसी नहीं की। मीरजापुर रेलवे स्टेशन पर उनका भव्य स्वागत किया गया। लोग उनके स्वागत के लिए तिरंगे और ढोल नगाड़े के साथ पहुंचे थे।

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