1962

  प्रस्तुति : संजय तिवारी स्वाधीन भारत में अब से ठीक 41 वर्ष पूर्व देश में जो कुछ घटा वह फिर कभी न घटे। भारत में इमरजेंसी देख चुकी और भोग चुकी पीढ़ी तो अब बूढ़ी हो चली है। वर्तमान युवा भारत को उस यातना और संघर्ष का तो आभास भी नहीं हो सकता। उस …