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Azab Gajab Shahar: दुनिया का सबसे बड़ा भूमिगत शहर, जहाँ एकसाथ बसते थे बीस हज़ार लोग!
Bhumigat Shahar Ka Itihas: इस लेख में हम इस भूमिगत शहर के निर्माण, इसके ऐतिहासिक महत्व, और उन अनसुलझे सवालों की पड़ताल करेंगे, जो इसे दुनिया के सबसे रहस्यमयी स्थानों में से एक बनाते हैं।
Biggest Underground City: क्या आपने कभी कल्पना की है कि हजारों लोग जमीन के नीचे, अंधेरे में बसे एक विशाल शहर में आरामदायक जीवन जी सकते हैं? तुर्की का डेरिनकुयू (Derinkuyu) एक ऐसा ही अद्भुत और रहस्यमयी भूमिगत शहर है, जो इंसानी प्रतिभा और प्राचीन इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह विशाल संरचना न केवल एक शहर थी, बल्कि एक पूर्ण विकसित समाज का केंद्र भी थी, जहाँ करीब 20,000 लोग एक साथ रह सकते थे। इस शहर में घर, स्कूल, चर्च, वाइन स्टोरेज, सभा कक्ष, सुरंगें, हवादार कुएं और सुरक्षा के अत्याधुनिक उपाय मौजूद थे, जो इसे एक अभेद्य किला बनाते थे। डेरिनकुयू का रहस्य यही नहीं खत्म होता,इसकी कई परतों वाली गहराइयों में आज भी इतिहास के छिपे हुए अध्याय दफन हैं।
डेरिनकुयू का इतिहास(History Of Derinkuyu)
डेरिनकुयू के निर्माण का सही समय आज भी रहस्य बना हुआ है, लेकिन इतिहासकारों और पुरातत्वविदों का मानना है कि इसकी उत्पत्ति हिट्टाइट (Hittite) साम्राज्य (लगभग 1600-1200 ईसा पूर्व) या उससे पहले की हो सकती है। कुछ विद्वानों के अनुसार, इसे सबसे पहले फ्रिजियन (Phrygians) या फर्स (Persians) द्वारा बनाया गया था, जबकि कुछ इसे ईसाई बीजान्टिन (Byzantine) साम्राज्य से भी जोड़ते हैं।
इस शहर की संरचना सॉफ्ट ज्वालामुखीय टफ (Tuff) चट्टानों को काटकर बनाई गई थी। यह चट्टानें आसानी से तराशी जा सकती थीं, लेकिन हवा के संपर्क में आने पर कठोर हो जाती थीं, जिससे शहर को मजबूती मिलती थी।
डेरिनकुयू का उपयोग(Use Of Derinkuyu)
डेरिनकुयू का उपयोग विभिन्न युगों में अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया गया था।
फारसी और ग्रीक काल (500 ईसा पूर्व - 200 ईस्वी) - फारसी और ग्रीक इतिहास में भी भूमिगत संरचनाओं का उल्लेख मिलता है। ऐसा माना जाता है कि डेरिनकुयू का उपयोग धार्मिक उपासना स्थलों और शरणस्थलों के रूप में किया जाता था। इस दौरान, ईसाई धर्म के अनुयायी और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय अक्सर अत्याचारों से बचने के लिए यहां शरण लेते थे।
बीजान्टिन काल (330-1453 ईस्वी) - बीजान्टिन साम्राज्य के दौरान, जब मुस्लिम आक्रमणकारियों और बाहरी दुश्मनों का खतरा बढ़ा, तब डेरिनकुयू एक सुरक्षित किले के रूप में विकसित हुआ। इस काल में इसे एक छुपने और बचाव के लिए रणनीतिक स्थान के रूप में उपयोग किया गया। इस भूमिगत शहर में बड़ी संख्या में चर्च और धार्मिक स्थल बनाए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह ईसाई समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र था।
तुर्क साम्राज्य और आधुनिक युग (1453-1923 ईस्वी) - ऑटोमन साम्राज्य (Ottoman Empire) के शासन के दौरान भी डेरिनकुयू का उपयोग किया गया। 20वीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों तक, कुछ स्थानीय समुदाय अब भी इसे अस्थायी शरण स्थल के रूप में उपयोग कर रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे युद्ध और हमलों का खतरा कम हुआ, यह धीरे-धीरे भुला दिया गया और सदियों तक गुमनाम रहा।
पुनः खोज (1963) और आधुनिक अध्ययन(Rediscovery of Derinkuyu)
डेरिनकुयू को 1963 में पूरी दुनिया के सामने फिर से खोजा गया, जब एक स्थानीय व्यक्ति अपने घर की मरम्मत कर रहा था और गलती से एक गुप्त सुरंग को खोल दिया। यह सुरंग एक विशाल भूमिगत शहर की ओर जाती थी, जिसे देखकर पुरातत्वविद और इतिहासकार हैरान रह गए।
इसके बाद तुर्की सरकार ने इस स्थान पर अध्ययन और खुदाई शुरू की, जिससे पता चला कि यह शहर 85 मीटर (278 फीट) गहरा और 18 मंजिलों तक फैला हुआ है। हालांकि, केवल कुछ ही मंजिलों को आज पर्यटकों के लिए खोला गया है, क्योंकि गहराई में कई हिस्से अभी भी अज्ञात और अनदेखे हैं।
डेरिनकुयू की संरचना(Structure of Derinkuyu)
तुर्की के डेरिनकुयू (Derinkuyu) भूमिगत शहर की संरचना इतनी जटिल और उन्नत है कि यह आज भी वैज्ञानिकों और इतिहासकारों के लिए आश्चर्य का विषय बनी हुई है। यह शहर लगभग 85 मीटर (278 फीट) गहरा है और माना जाता है कि इसकी 18 मंजिलें थीं, हालांकि अब तक केवल 8 मंजिलें ही पूरी तरह खोजी जा सकी हैं। इस शहर में विभिन्न सुरंगों, कक्षों, और सुरक्षा प्रणालियों का ऐसा नेटवर्क है, जो इसे एक आत्मनिर्भर बस्ती बना देता था।
इसकी संरचना इतनी सुनियोजित है कि यहाँ 20,000 लोग एक साथ रह सकते थे, और उनके लिए खाद्य भंडारण, पानी की आपूर्ति, वेंटिलेशन सिस्टम, गुप्त रास्ते और सुरक्षा द्वार तक मौजूद थे। आइए, इस भूमिगत शहर की संरचना को विस्तार से समझते हैं।
बहु-स्तरीय डिज़ाइन - डेरिनकुयू एक बहु-स्तरीय भूमिगत शहर था, जिसमें प्रत्येक मंजिल का विशेष उद्देश्य था। ऊपरी मंजिलें मुख्य रूप से आवास, रसोई, भंडारण और पालतू जानवरों के अस्तबल के लिए थीं। मध्य मंजिलों में बैठक हॉल, स्कूल, चर्च, भंडारण कक्ष, वाइनरी और तेल प्रेस मौजूद थे। गहरी मंजिलें सुरक्षा और शरण के लिए बनी थीं, जिनमें गुप्त सुरंगें, जलाशय और कुएँ थे, जो आपातकालीन परिस्थितियों में उपयोग किए जाते थे।
प्रवेश द्वार और सुरंगें - डेरिनकुयू में कई संकरे प्रवेश द्वार हैं, जो बाहरी खतरों से बचने के लिए बनाए गए थे। इन द्वारों को भारी पत्थर के दरवाजों से बंद किया जा सकता था। शहर के अंदर, संकरी और मुड़ी हुई सुरंगें हैं, जो इसे दुश्मनों के लिए भ्रमित करने वाला बनाती थीं।
रहने की व्यवस्था - शहर के भीतर घर, शयनकक्ष और बैठक कक्ष बनाए गए थे। यहां तक कि कुछ स्थानों पर बड़े हॉल भी मौजूद हैं, जहाँ सामुदायिक सभाएँ आयोजित की जाती थीं।
धार्मिक स्थल और स्कूल - यहाँ चर्च और प्रार्थना स्थल भी थे, जिससे यह साबित होता है कि यहाँ धार्मिक गतिविधियाँ भी होती थीं। एक स्कूल भी मौजूद था, जहाँ बच्चों को शिक्षा दी जाती थी।
भोजन और पानी की व्यवस्था - शहर के अंदर अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों को संग्रहीत करने के लिए बड़े भंडारण कक्ष बनाए गए थे। इसके अलावा, भूमिगत कुएं भी थे, जो ताजे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करते थे।
वेंटिलेशन सिस्टम - सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस शहर का वेंटिलेशन सिस्टम बहुत उन्नत था। 50 से अधिक वेंटिलेशन शाफ्ट्स थे, जो ताजा हवा को शहर के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाते थे।
रक्षा तंत्र - डेरिनकुयू को इस तरह डिजाइन किया गया था कि यह बाहरी आक्रमणों से बच सके। दरवाजे भारी गोल पत्थरों से बनाए गए थे, जिन्हें केवल अंदर से ही घुमाया जा सकता था। इसके अलावा, सुरंगें इतनी संकरी थीं कि केवल एक व्यक्ति ही एक समय में अंदर आ सकता था, जिससे हमलावरों के लिए यह और कठिन हो जाता था।
डेरिनकुयू का रहस्य और धारणाएँ(Mystery & Beliefs about Derinkuyu)
डेरिनकुयू को लेकर कई रोचक धारणाएँ प्रचलित हैं:
• एलियंस या प्राचीन उन्नत सभ्यता: कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह की जटिल संरचना केवल एक उन्नत सभ्यता या एलियंस द्वारा बनाई गई हो सकती है।
• भीषण युद्धों और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव: यह भी कहा जाता है कि यह शहर केवल दुश्मनों से बचने के लिए नहीं, बल्कि ज्वालामुखीय विस्फोटों या जलवायु परिवर्तन से सुरक्षा के लिए भी बनाया गया था।
• गुप्त मार्ग और अन्य भूमिगत शहरों से संबंध: डेरिनकुयू को कैप्पाडोसिया के अन्य भूमिगत शहरों से जुड़ा हुआ माना जाता है, और यह कई किलोमीटर लंबी सुरंगों के माध्यम से कायमाकली (Kaymaklı) और अन्य शहरों से जुड़ा हो सकता है।
डेरिनकुयू का महत्व(Importance of Derinkuyu)
डेरिनकुयू केवल एक भूमिगत शहर नहीं, बल्कि अद्वितीय वास्तुकला, तकनीकी कौशल और अस्तित्व का प्रतीक है। यह हिट्टाइट, फ्रिजियन, फारसी, ग्रीक, बीजान्टिन और ओटोमन साम्राज्यों का साक्षी रहा है और युद्धों व आपदाओं के दौरान शरणस्थली के रूप में उपयोग किया गया। इसकी जटिल गलियां, सुरंगें और अभेद्य दरवाजे इसे एक मजबूत किला बनाते थे, जो अन्य भूमिगत शहरों से जुड़ा था। यहाँ भोजन भंडारण, जल आपूर्ति और वेंटिलेशन की उन्नत व्यवस्था थी, जिससे निवासी सतह पर आए बिना जीवित रह सकते थे। बीजान्टिन काल में यह ईसाइयों के लिए एक धार्मिक केंद्र बन गया, जहाँ चर्च, सभा हॉल और स्कूल थे।1963 में इस शहर की पुनर्खोज के बाद यहाँ बीजान्टिन युग की कलाकृतियाँ, हथियार और मिट्टी के बर्तन मिले, जो प्राचीन समाजों की जीवनशैली और तकनीकी दक्षता को समझने में सहायक हैं। इसकी उन्नत वास्तुकला और पुरातात्विक खोजें प्राचीन समाजों की तकनीकी दक्षता को दर्शाती हैं, जिससे यह आज भी इतिहासकारों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
आधुनिक पर्यटन और आर्थिक महत्व (Modern Tourism and Economic Importance)
आधुनिक पर्यटन और आर्थिक दृष्टि से डेरिनकुयू तुर्की के सबसे लोकप्रिय स्थलों में से एक है, जहाँ हर साल लाखों पर्यटक आते हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। इसकी ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए इसे युनेस्को (UNESCO) द्वारा संरक्षित किया गया है, जिससे इसकी वैश्विक पहचान और बढ़ गई है। इसके अलावा, डेरिनकुयू की रहस्यमयी संरचना और भूमिगत दुनिया ने फिल्म निर्माताओं, लेखकों और इतिहासकारों को भी प्रेरित किया है। इस पर कई डॉक्यूमेंट्री और रिसर्च पेपर बनाए गए हैं, जो इसे एक अद्वितीय ऐतिहासिक धरोहर के रूप में स्थापित करते हैं।