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Chaitra Navratri 2025: इस मंदिर में नवरात्रि के दौरान माता रानी महिलाओं की सूनी गोद भर देती हैं, मनाया जाता है ये त्योहार
Chaitra Navratri 2025: क्या आप जानते हैं कि माता रानी का एक ऐसा मंदिर है जहाँ निःसंतान महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है इन मान्यताओं के आगे विज्ञान भी फेल हो गया है।
Navratri 2025 (Image Credit-Social Media)
Navratri 2025: नवरात्रि का त्योहार 30 अप्रैल से शुरू हो रहा है ऐसे में भक्तों की भीड़ माता रानी के मंदिरों में भारी मात्रा में नजर आने लगती है। वहीं कुछ श्रद्धालु देवी मां से अपनी मनोकामना पूरी करने की विनती करते हैं। ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे मंदिर की महिमा के बारे में बताने जा रहे हैं जहां कहा जाता है कि महिलाओं की सूनी गोद माता रानी तुरंत भर देतीं हैं। आइये जानते हैं कहां स्थित है यह मंदिर और क्या है यहां की मान्यताएं।
इस मंदिर में नवरात्रि के दौरान माता रानी महिलाओं की सूनी गोद भर देती हैं
कई मान्यताएं ऐसी हैं जो शायद वैज्ञानिक तथ्यों और तर्कों से दूर हो लेकिन लोगों के विश्वास को यह तर्क हिला नहीं पाए हैं। ऐसे में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जिसने विज्ञान को भी हैरान कर दिया है। ऐसा ही एक मंदिर है जिला मंडी की लडभड़ोल तहसील के सिमस गांव में। यह मंदिर सिमसा माता के नाम से भी जाना जाता है। मानता है कि यहां आने वाली महिलाओं को संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है। ऐसे में महिलाएं सिमसा माता मंदिर के फर्श पर सोकर संतान का सुख प्राप्त करती है। आइये जानते हैं क्या है इस मंदिर की महिमा।
Navratri 2025 (Image Credit-Social Media)
लडभड़ोल से 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है सिमसा माता का मंदिर। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर की फर्श पर सोने से निःसंतान महिलाओं को संतान की प्राप्ति हो जाती है। ऐसा भी कहते हैं कि ‘सलिंदरा, नाम का एक त्यौहार साल में दो बार होने वाले नवरात्रों में ही आयोजित किया जाता है। नवरात्रि में हिमाचल के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी दंपति संतान सुख पाने के लिए मंदिर में आते हैं। माता सिमसा को "संतान दात्री"' के नाम से भी जाना जाता है बैजनाथ से इस मंदिर की दूरी 29 किलोमीटर और जोगिंद्रनगर से यह लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
नवरात्रि में मनाया जाता है ‘सलिंदरा त्यौहार
चैत्र और शरद नवरात्रि में ‘सलिंदरा नाम का त्योहार मनाया जाता है। ‘सलिंदरा का अर्थ है "सपना आना" और नवरात्रि में निःसंतान महिलाएं मंदिर में आकर रहती हैं और सुबह शाम पूजा करते हुए सिमसा माता के आंगन की फर्श पर सो जाती हैं। कहा जाता है कि जो महिलाएं सिमसा माता पर भरोसा रखती हैं और पूरी श्रद्धा और विश्वास से माता की पूजा अर्चना करती है सिमसा माता उन्हें सपने में किसी भी रूप में दर्शन देकर संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देती है। लेकिन वही अगर किसी महिला को सपने में माता रानी द्वारा कोई फल प्राप्त करती है तो इसका मतलब यह माना जाता है की माता सिमसा से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद उसे मिल गया है।
Navratri 2025 (Image Credit-Social Media)
वही ऐसा भी कहा जाता है कि अगर किसी महिला को सपने में संतान न होने का संकेत मिल गया है तो वह महिला मंदिर में नहीं रहेगी और उसे मंदिर छोड़कर जाना होगा। वही ऐसा भी कहा जाता है कि अगर अपनी संतान न मिलने का संकेत सपने में मिलने के बाद भी कोई महिला मंदिर से बिस्तर हटाकर बाहर नहीं जाती है तो उस महिला के शरीर पर लाल दाग पड़ने शुरू हो जाते हैं बहुत सारे लोग ऐसा भी कहते हैं कि महिलाओं को चीटियां काटने लगतीं हैं। जिससे बहुत ज्यादा खुजली होती है। ऐसा होने पर महिला को खुद ही वहां से जाना पड़ता है। संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त कर चुकी महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद अपने पूरे परिवार के साथ सिमसा माता का धन्यवाद करने वापस मंदिर भी आतीं हैं। ऐसे में नवरात्रि के इस त्यौहार पर कई महिलाएं अपने सपने को माता के आशीर्वाद स्वरुप संतान प्राप्ति होने पर माता रानी के दर्शन करने भी इस मंदिर में आती हैं।
मंदिर के फर्श पर महिलाएं सो कर अपना सपना पूरा करके और माता द्वारा संतान प्राप्ति का फल प्राप्त करती हैं। वहीं महिला के मंदिर में रहने का कोई निर्धारित समय नहीं होता है बल्कि जब तक माता सपने में आकर फल नहीं देतीं तब तक महिला को मंदिर में रहना होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां कभी भी किसी भी दिन संतान सुख का आशीर्वाद दे सकती है इसलिए अगर आप भी संतान सुख प्राप्ति का वरदान माता रानी से चाहते हैं तो आप भी नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में उनके दर्शन करने जरूर जाएं।
Navratri 2025 (Image Credit-Social Media)
फिलहाल इस मंदिर में आने के बाद अगर कोई महिला बीच में अपने घर जाना चाहती है तो वह पूजा को छोड़कर सकती है और संतान प्राप्ति के लिए मंदिर आने वाली महिलाएं अपने घर वापस भी जा सकतीं हैं। इतना ही नहीं महिलाओं को अपने घर से एक स्टील का लोटा, दो कंबल, एक दरी और एक लाल रंग का घाघरा या पेटिकोट लाना होता है। यह घागरा महिलाओं को मंदिर में पूजा के समय पहनना पड़ता है। दरी और कंबल महिला को मंदिर में सोने के लिए होते हैं। संतान प्राप्ति के लिए आने वाली महिलाओं के साथ पति का आना अनिवार्य नहीं होता है अगर महिला का पति चाहे तो वह आ सकता है मगर अनिवार्यता नहीं है केवल महिला का आना जरूरी होता है।
इसके अलावा आपको बता दें कि अगर महिलाओं के साथ उनके परिवार का कोई सदस्य आता है तो उसके लिए मंदिर कमेटी की तरफ से रहना खाना पीना सभी कुछ मुफ्त होता है। साथ ही साथ सोने के लिए कंबल और रजाई भी कमेटी द्वारा उपलब्ध करवाए जाते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर कमेटी तथा मंडल द्वारा मुफ्त में भंडारे भी लगाए जाते हैं। जो 10 दिनों तक चलते हैं।