TRENDING TAGS :
Duniya Ki Sabse Khatarnak Jagah: दुनिया का सबसे खतरनाक लाइटहाउस आइसलैंड के रहस्यमय समुद्री प्रहरी की कहानी
Thridrangar Lighthouse Mystery: जानिए कहाँ स्थित है दुनिया की सबसे खतरनाक लाइटहाउस की रहस्यमय कहानी। आइये विस्तार से समझते हैं।
Thridrangar Lighthouse (Image Credit-Social Media)
Thridrangar lighthouse (Southern Iceland): आइसलैंड का थ्रीडरंगर लाइटहाउस (Thridrangar Lighthouse) दुनिया के सबसे दुर्गम और रहस्यमय लाइटहाउसों में से एक है। यह लाइटहाउस आइसलैंड के दक्षिणी तट से लगभग 7.2 किलोमीटर दूर स्थित है और एक छोटे से चट्टानी द्वीप पर बना हुआ है। इसकी लोकेशन इतनी कठिन है कि यहां पहुंचना सिर्फ हेलीकॉप्टर के माध्यम से ही संभव है।
1939 में निर्मित यह लाइटहाउस समुद्र में नौकाओं और जहाजों को मार्गदर्शन देने के लिए बनाया गया था। लेकिन इसकी खासियत यह है कि यह खतरनाक समुद्री तूफानों, विशाल लहरों और दुर्गम स्थितियों में भी मजबूती से खड़ा है। यह जगह इतनी दूर और अलग-थलग है कि यहां पहुंच पाना भी किसी चुनौतीपूर्ण अभियान से कम नहीं है।यह दुनिया के सबसे छोटे और सबसे क्लस्ट्रोफोबिक लाइटहाउस में से एक है। यह चार मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। दूर से देखने में यह बिल्कुल खिलौने जैसा लगता है। लेकिन समुद्र तल से 34 मीटर ऊपर एक चट्टान पर स्थित है। यह दुनिया का सबसे एकांत लाइटहाउस माना जाता है। इस लाइटहाउस को 1938 से 1939 के बीच बनाया गया था, जिसे बनाने में केवल 1 महीने का समय लगा था।
थ्रीडरंगर लाइटहाउस का भूगोल और स्थान
थ्रीडरंगर लाइटहाउस आइसलैंड के दक्षिणी तट से 7.2 किलोमीटर दूर स्थित है।यह लाइटहाउस तीन खड़ी चट्टानों (थ्रीडरंगर का अर्थ: तीन खंभे) में से एक पर स्थित है।यह बेसाल्ट चट्टान पर बना है, जो ज्वालामुखीय गतिविधियों से बनी कठोर चट्टानें होती हैं।लाइटहाउस समुद्र तल से 34 मीटर (112 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है।यहां पहुंचने के लिए कोई रास्ता या पुल नहीं है।केवल हेलीकॉप्टर द्वारा ही यहां पहुंचा जा सकता है।
लाइटहाउस के लिए एक विशेष हेलीपैड बनाया गया है, जहां हेलीकॉप्टर लैंड कर सकता है।1939 में इसे बनाया गया था। थ्रीडरंगर लाइटहाउस को बनाना तकनीकी रूप से बेहद कठिन था।इसकी लोकेशन इतनी दुर्गम थी कि यहां निर्माण सामग्री और मजदूरों को लाना लगभग असंभव था।पहले मजदूरों को चट्टानों पर चढ़ने के लिए रस्सियों का इस्तेमाल करना पड़ा।मजदूरों को तूफानी लहरों और तेज़ हवाओं का सामना करना पड़ा, जो काम को और भी खतरनाक बनाता था। कई बार काम रोकना पड़ा, क्योंकि समुद्र की लहरें इतनी ऊंची उठती थीं कि वे चट्टानों से टकरा जाती थीं।
थ्रीडरंगर लाइटहाउस का महत्व
यह लाइटहाउस आज भी समुद्र में नाविकों और जहाजों को दिशा दिखाने का काम करता है।इसका महत्व केवल मार्गदर्शन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आइसलैंड की इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना भी है।
इसका निर्माण यह दर्शाता है कि मनुष्य कठिन परिस्थितियों में भी साहस और तकनीक से विजय प्राप्त कर सकता है।
हालांकि यह लाइटहाउस आम लोगों के लिए खुला नहीं है। लेकिन इसे दूर से देखने का अनुभव ही बेहद रोमांचक हो सकता है। यह स्थान हमें यह अहसास कराता है कि इंसान ने कितनी कठिन परिस्थितियों में भी अपने लिए रास्ता बनाया है।
निर्माण के दौरान श्रमिकों को इस दुर्गम द्वीप पर रातें बितानी पड़ीं। लेकिन उन्हें पूरी रात नींद नहीं आई। उन्होंने नेशनल ब्रॉडकास्ट को बताया कि चारों ओर केवल अथाह पानी ही पानी था। ऊंचाई इतनी खतरनाक थी कि अगर कोई गिर जाए तो सांस बीच में ही अटक जाए। दूरबीन से देखने पर नीचे पानी में विशालकाय और जानलेवा व्हेल तैरती हुई नजर आईं, जो एक ही झटके में किसी को भी निगल सकती थीं।
इस लाइटहाउस की सबसे खास बात यह है कि यह जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिखाने में मदद करता है। किसी भी लाइटहाउस का हृदय उसका प्रकाश स्रोत होता है। इसमें एक उन्नत फ्रेज़नेल लेंस लगा हुआ है, जो इसे रोशन करता है। यह लेंस सुनिश्चित करता है कि लाइटहाउस की रोशनी काफी दूरी से भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे। यहां तक कि सबसे खराब मौसम में भी यह लाइटहाउस जहाजों का मार्गदर्शन करने में सक्षम है।
निर्माण में प्रयोग की गई तकनीक:
हेलीकॉप्टर के अभाव में, मजदूरों ने पहले रस्सियों के सहारे निर्माण सामग्री को ऊपर चढ़ाया।इसके बाद, धीरे-धीरे सीढ़ियां और एक प्लेटफॉर्म तैयार किया गया।आखिरकार, इस बेहद दुर्गम जगह पर एक मजबूत लाइटहाउस टावर खड़ा किया गया।लाइटहाउस एक बेलनाकार टावर (cylindrical tower) के रूप में बनाया गया है।यह समुद्री यात्रियों को रास्ता दिखाने के लिए मजबूत प्रकाश किरणें उत्सर्जित करता है।लाइटहाउस की कुल ऊंचाई लगभग 34 मीटर (112 फीट) है।इसकी रोशनी समुद्र में बहुत दूर से दिखाई देती है, जिससे जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल पाता है।1939 में जब इसे बनाया गया था, तब तकनीक इतनी विकसित नहीं थी, जितनी आज है।
मजदूरों और इंजीनियरों ने खतरनाक चट्टानों पर चढ़कर और सीमित संसाधनों के साथ इस अद्भुत संरचना को खड़ा किया। इस लाइटहाउस को बनाने के लिए हेलीकॉप्टर और रस्सियों का इस्तेमाल किया गया, ताकि आवश्यक निर्माण सामग्री वहां तक पहुंचाई जा सके।
चट्टान के ऊपरी हिस्से पर एक छोटा हेलीपैड बनाया गया है, जहां हेलीकॉप्टर लैंड कर सकते हैं।यह हेलीपैड ही वहां पहुंचने का एकमात्र जरिया है।लाइटहाउस का रंग सफेद है, जिससे यह समुद्र में दूर से भी साफ नजर आता है।इसकी बनावट चट्टान के आकार के अनुरूप तैयार की गई है, ताकि यह तेज़ हवाओं और लहरों का सामना कर सके।
मौसम की मार और कठिनाइयां
थ्रीडरंगर लाइटहाउस का स्थान समुद्र के बीच होने के कारण यह हमेशा भयंकर तूफानों और विशाल लहरों का सामना करता है।कई बार लहरें इतनी विशाल होती हैं कि वे लाइटहाउस को ढक लेती हैं।इस क्षेत्र में हवा की गति 100 किमी/घंटा से अधिक हो जाती है।इतनी तेज़ हवाओं में यहां काम करना बेहद कठिन हो जाता है।समुद्र के बीच स्थित होने के कारण यहां ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है, जिससे यहां रहने वाले कर्मचारियों को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
लाइटहाउस तक पहुंचने की चुनौती
लाइटहाउस तक पहुंचने का कोई सीधा मार्ग नहीं है।केवल हेलीकॉप्टर के माध्यम से ही यहां जाया जा सकता है।यहां हेलीकॉप्टर लैंडिंग के लिए एक छोटा सा प्लेटफॉर्म है।
समुद्र मार्ग से यहां पहुंचना असंभव है, क्योंकि आसपास की चट्टानें बेहद ऊंची और खड़ी हैं।लहरें इतनी ऊंची उठती हैं कि नाव या जहाज यहां नहीं रुक सकते।
यहां की परिस्थितियां: क्यों यहां रहना असंभव है
थ्रीडरंगर लाइटहाउस में रहना संभव नहीं है, क्योंकि यहां का मौसम बहुत तेजी से बदलता है। कभी भी तेज़ हवाएं और तूफान आ सकता है। यहां कोई खाद्य आपूर्ति या पानी की व्यवस्था नहीं है।ठंडे और नम वातावरण में लंबे समय तक रहना खतरनाक हो सकता है।थ्रीडरंगर लाइटहाउस आइसलैंड का एक अनोखा और रहस्यमय लाइटहाउस है, जो खतरनाक समुद्र के बीच चट्टान पर बना हुआ है। इसकी कठिन लोकेशन, दुर्गम मौसम और रहस्यमयी कहानियां इसे और भी आकर्षक बनाती हैं।यह लाइटहाउस आज भी नाविकों का मार्गदर्शन करता है।इसकी लोकेशन और निर्माण इसे दुनिया के सबसे दुर्गम और साहसिक लाइटहाउसों में से एक बनाता है।
रहस्य और मान्यताएं- स्थानीय मछुआरे मानते हैं कि इस लाइटहाउस के आसपास अक्सर रहस्यमयी आवाजें और परछाइयां देखी जाती हैं।कई नाविकों का दावा है कि उन्होंने रात में अजीब रोशनी और आकृतियां देखी हैं।कहा जाता है कि इस क्षेत्र में कई नाविक रहस्यमय तरीके से गायब हो गए हैं।कई लोगों का मानना है कि यहां समुद्री दानव रहते हैं, जो लोगों को खींच लेते हैं।
कौन रहता है और कैसे रहते हैं
थ्रीडरंगर लाइटहाउस में कोई स्थायी निवासी नहीं रहता। यह लाइटहाउस पूरी तरह से स्वचालित (Automated) है, इसलिए यहां किसी व्यक्ति को स्थायी रूप से तैनात रहने की आवश्यकता नहीं होती.इसकी पूरी प्रकाश व्यवस्था और निगरानी प्रणाली ऑटोमेशन तकनीक पर आधारित है।
इससे रोशनी का संचालन और दिशा-निर्देशन दूरस्थ रूप से नियंत्रित किया जाता हैसमय-समय पर आइसलैंडिक लाइटहाउस अथॉरिटी (Icelandic Maritime Administration) का एक तकनीकी दल लाइटहाउस की मरम्मत, सफाई और देखरेख के लिए आता है।ये कर्मचारी हेलीकॉप्टर के जरिए यहां पहुंचते हैं और कुछ घंटों या कभी-कभी एक-दो दिन यहां रुकते हैं।
कौन इसकी देखरेख करता है
थ्रीडरंगर लाइटहाउस की देखभाल और संचालन की जिम्मेदारी Icelandic Maritime Administration (IMA) के पास है।IMA एक सरकारी संस्था है, जो आइसलैंड के सभी लाइटहाउस, समुद्री मार्ग और नेविगेशन सिस्टम की देखरेख करती है।यह संस्था सुनिश्चित करती है कि लाइटहाउस हमेशा सुचारू रूप से काम करे और इसके लेंस, बिजली आपूर्ति और संचार प्रणाली ठीक रहे।लाइटहाउस का संचालन सौर ऊर्जा और बैकअप जनरेटर से होता है।1950 और 1965 में आए समुद्री तूफानों में लाइटहाउस को आंशिक क्षति हुई थी।तेज़ हवाओं के कारण इसकी प्रकाश व्यवस्था और संचार प्रणाली प्रभावित हुई थी।बाद में इसे नए उपकरणों और सौर ऊर्जा से संचालित प्रणाली के साथ फिर से स्थापित किया गया।1998 में मरम्मत के लिए जा रहे एक हेलीकॉप्टर ने खराब मौसम में यहां लैंडिंग की कोशिश की थी। लेकिन दुर्घटनाग्रस्त हो गया।हालांकि, पायलट और क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया गया था।
कौन यहां पहुंचना चाहता है और कैसे पहुंचते हैं
थ्रीडरंगर लाइटहाउस एक आकर्षक लेकिन खतरनाक पर्यटक स्थल है। हालांकि, यहां पहुंचना आसान नहीं है। यहां तक पहुंचने के लिए कुछ चुनिंदा विकल्प है। यहां पहुंचने का सबसे सुरक्षित और आम तरीका हेलीकॉप्टर है।आइसलैंडिक सरकार और मरीन अथॉरिटी के अधिकारी अक्सर हेलीकॉप्टर से ही यहां आते हैं।कुछ विशेष टूर कंपनियां भी पर्यटकों के लिए हेलीकॉप्टर यात्रा का आयोजन करती हैं।कुछ साहसी पर्यटक नावों या स्पीडबोट्स से यहां पहुंचने का प्रयास करते हैं।हालांकि, समुद्र की तेज लहरें और तेज हवाओं के कारण यह सफर जोखिम भरा होता है।यहां तक कि अनुभवी नाविक भी इस क्षेत्र में जाने से कतराते हैं।