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अमृतसर रेल हादसा: पटरी से रावण दहन के नजारे से हुई मौतों से उठे सवाल!

राम केवी

राम केवीBy राम केवी

Published on 20 Oct 2018 5:14 AM GMT

अमृतसर रेल हादसा: पटरी से रावण दहन के नजारे से हुई मौतों से उठे सवाल!
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चंडीगढ़: अमृतसर में पटरी पर खड़े होकर रावण दहन का कार्यक्रम देख रहे 60 से अधिक लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? यह एक बड़ा सवाल है। सवाल यह भी है कि जिम्मेदार कोई एक है या तमाम हैं। इस हादसे में मरने वाले ज्यादादर लोग यूपी बिहार के हैं।

इस हादसे के लिए जिम्मेदारों की सूची में इनका नाम भी आ गए जिन्होंने अपनी जान देकर अपनी नादानी की कीमत चुकायी। तमाम लोग ऐसे थे जो जब लोग ट्रेन से कट रहे थे उस दौरान अपनी सेल्फी लेने में व्यस्त थे या ट्रेन हादसे का वीडियो बना रहे थे। जिम्मेदार वह भी कम नहीं हैं।

सबसे पहली बात यह है कि जहां रावण का दहन हो रहा था क्या इस आयोजन की अनुमति ली गई थी। यदि अनुमति ली गई थी तो यह अनुमति किसने दी। क्योंकि आयोजन स्थल निकटवर्ती क्रासिंग से 400 फुट दूर व पटरियों से कुछ फुट की दूरी पर था।

बताया जा रहा है कि आयोजन वहां के कांग्रेसी सभासद के लड़के ने कराया था। इससे पहले यहां रावण दहन का कार्यक्रम नहीं हुआ था। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना और भीड़ सम्हालने की कोई व्यवस्था न होना एक गंभीर चूक है।

कहा यह भी जा रहा है कि गिनती के पुलिस वाले रावण दहन कार्यक्रम में मौजूद थे। लेकिन हादसे के बाद पुलिस नदारद हो गई। यह एक और गंभीर लापरवाही है।

रही बात रेलवे की तो उसके गेटमैन की गलती है जिसे इस आयोजन की सूचना अधिकारियों को देनी चाहिए थी। जो कि नहीं दी गई।

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रेलवे इस हादसे को अतिक्रमण का मामला बता कर किनारा कर रहा है। इस का कारण है कि उसे इस आयोजन की कोई जानकारी नहीं थी।

आयोजन स्थल व पटरी के बीच दीवार थी। पटरी ऊंचाई पर भी। लोग रावण दहन का नजारा देखने के लिए दीवार पर चढ़े थे। कुछ दुस्साहसी लोग जब पटरी पर चढ़ गए तो देखा देखी पटरी पर भी भारी भीड़ जमा हो गई जबकि यह सभी जानते थे कि इस रूट पर ट्रेनों का आवागमन होता रहता है।

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हादसे के बाद भी लोगों ने घायलों की कोई मदद नहीं की अपित लोग वीडियो बनाने में व्यस्त रहे जबकि सेल्फी लेने और वीडियो बनाने में व्यस्त साथियों का हाल वह स्वयं देख रहे थे। यहां यह समझने की जरूरत है कि नियम और कानून आपके भले के लिए होते हैं उन्हें मानने में ही भलाई होती है।

हर बात को डंडे के जोर पर नहीं मनवाया जा सकता। दूसरे आपके दुस्साहस की कीमत क्या मुआवजे से चुकाई जा सकती है। उस परिवार पर क्या बीत रही होगी जिन्होंने अपने परिजन खोए हैं। लोग कहेंगे कि इन सवालों के जवाब सरकार को तलाशने चाहिए।

लेकिन यह जानते हुए भी कि यह ट्रेन का रास्ता है कोई ट्रेन के आगे खड़ा हो जाए कि ड्राइवर की भी तो जिम्मेदारी है। यह उचित बात नहीं है। जहां कुछ सेकंड में ट्रेन पास हो जाती है। ड्राइवर कब देखेगा और कब ट्रेन रोकेगा। दूसरे ट्रेन को अचानक रोककर वह ट्रेन में सवार सैकड़ों यात्रियों की जान भी जोखिम में नहीं डालेगा।

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राम केवी

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