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जानवर भी करते हैं सुसाइड, कोई छोड़ता है खाना तो कोई लगा देता है छलांग

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NewstrackBy Newstrack

Published on 17 Jan 2016 10:36 AM GMT

जानवर भी करते हैं सुसाइड, कोई छोड़ता है खाना तो कोई लगा देता है छलांग
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लखनऊ: सुसाइड,ये शब्द सुनते ही पंखे से लटकी एक लाश, आग में जलता हुआ कोई इंसान, बिल्डिंग की किसी मंजिल से कूदने जैसे कई मंजर आंखों के सामने आ जाते हैं। इंसान जब खुद से हार जाता है, हालातों के सामने हौसले का हथियार डाल देता है तो खुद को मिटाने के बारे में सोचने लगता है, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जानवर भी सुसाइड कर सकते हैं। ये है ना वाकई हैरान कर देने वाली बात। दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं हैं जो इस ओर इशारा करती हैं कि जानवर भी सुसाइड करते हैं। हम आपको बताने जा रहे हैं। ऐसे ही कुछ वाक्ये जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे कि क्या जानवर भी अपनी मर्जी से दुनिया छोड़ सकते हैं?

खाना-पीना छोड़कर भालू ने किया सुसाइड

2012 में चाइना में भालू के सुसाइड केस का मामला सामने आया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने 10 दिन तक कुछ भी खाया-पिया नहीं था। ये उसका सुसाइड करने का एक तरीका था। कई एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट भी कह चुके हैं किचाइना में भुलाओं के इस तरह से कई सुसाइड केस सामने आए हैं। भालुओं के गॉल ब्लेडर में एक एंजाइम पाया जाता। इसी के लिए वहां इन्हें पाला जाता है और छोटे-छोटे पिंजरों में कैद करके रखा जाता है। इस रस का इस्तेमाल दवाओं में किया जाता है।

ऐसे निकाला जाता है डाइजेस्टिव जूस

इस रस को निकालने के लिए भालू के पेट में स्थायी तौर पर एक चीरा लगाया जाता है। इसके बाद एक कैथर्टर ट्यूब डालकर उस रस को निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में भालुओं को बेहद दर्द होता है। करीब 12 हजार भालू चाइना और वियतनाम में कैद करके रखे जाते हैं। इन भालुओं को एक छोटे से पिंजरे में कैद करके रखा जाता है, जिसमें वो पूरे समय पीठ के बल लेटे रहने पर मजबूर रहते हैं। हालांकि छोटा पिंजरा होने की वजह से उनके पेट से नली के जरिए डाइजेस्टिव जूस निकालना ज्यादा आसान हो जाता है। मेटल ट्यूब स्थायी तौर पर डाल दी जाती है।

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दक्षिण-पूर्वी एशिया में अभी भी करीब 12 हजार एशियाटिक ब्लैक बीयर्स बाइल फार्म्स में कैद हैं। कई भालू, जिन्हें इस कैद से आजाद कराया गया, उनके सिर पर चोट के निशान पाए गए, क्योंकि छोटा पिंजरा होने की वजह से उनका सिर पिंजरे के दूसरे हिस्से से कई बार भिड़ता था। चाइना करीब हर साल सात किलो बीयर बाइल भालुओं पेट और गॉल ब्लैडर से निकालता है, जिसमें से सिर्फ चार किलो इस्तेमाल होता है। बीयर बाइल में Ursodeoxycholic एसिड ( UDCA) पाया जाता है। इसका इस्तेमाल किडनी और डाइजेस्टिव सिस्टम से जुड़ी बीमारियों में किया जाता है। एशिया में भी कई लोग बीयर बाइल का इस्तेमाल बवासीर क्रीम और जलने या कट जाने पर इस्तेमाल करते हैं। इतना ही नहीं इसका इस्तेमाल सेक्स पॉवर बढ़ाने और हैंगओवर उतराने में भी किया जाता है।

WHALE

जब डॉलफिन ने किया ट्रेनर की बाहों में सुसाइड

1960 में एक टीवी शो फ्लिपर के दौरान डॉल्फिन ट्रेनर रिचर्ड ओ'ब्रे ने देखा कि कैथी नाम की एक डॉलफिन ने सुसाइड कर लिया। उनके मुताबिक,'' उस दिन वो काफी उदास थी। वो मेरी बाहों में तैरकर आई। बड़े प्यार से मेरी आंखों में देखा। एक बार सांस ली, लेकिन उसके बाद दूसरी नहीं ली। इसके बाद वो धीरे-धीरे स्टील के टैंक में डूबने लगी। इस घटना ने उन्हें एक ट्रेनर से एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट बना दिया। डॉल्फिन्स सेल्फ अवेयर क्रीएचर्स (खुद के बारे में जानने वाली) होती हैं। उनका ब्रेन इंसानी दिमाग से कहीं ज्यादा बड़ा होता है। अगर जिंदगी जीना उनके लिए मुश्किल हो जाता है तो वो एक सांस के बाद दूसरी नहीं लेती हैं और ये सुसाइड होता है।'' 'दि कोव' नाम से बनी ऑस्कर विनिंग डॉक्यूमेंट्री ने रातों-रात रिर्चड ओ'ब्रे को सेलीब्रिटी बना दिया। इसमें उन्होंने शादनार रोल निभाया था। ये डॉक्यूमेंट्री जापान के छोटे से कस्बे में होने वाले डॉल्फिन-मीट बिजनेस पर बनाई गई थी।

DOG

जब कुत्ते ने की पानी में डूबने की कोशिश

1845 में इलस्ट्रेटेड लंदन न्यूज ने एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें एक कुत्ते के सुसाइड का जिक्र किया गया है। ये कुत्त न्यूफाउंडलैंड प्रजाति का बताया जाता है। उस रिपोर्ट के मुताबिक, वो कुत्ता कई दिनों से गुमसुम सा था। एक दिन वो पानी में कूद गया और तैरकर बाहर निकलने की कोशिश करने के बजाए खुद को डुबोने लगा। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे बचा लिया और कुछ दिनों के लिए एक जगह बांध दिया। इसके बाद भी उसकी हालत ने कोई सुधार नहीं आया। जैसे ही उसे खोला जाता और फिर पानी में कूद जाता। ऐसा उसने कई बार किया। कुछ मौकों पर तो उसे बचा लिया गया, लेकिन आखिरकार उसने पानी में डूबकर सुसाइड कर ही लिया।

pamela

बीते साल हॉलीवुड एक्ट्रेस पामेला एंडरसन ने भी एक इंटरव्यू के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि उनके सबसे प्यार कुत्ते ने सुसाइड किया था। ऐसा करने की वजह सुनकर भी उनके फैंस हैरान रह गए थे। उनके मुताबिक, ''मुझे ऐसा लगता है कि प्यारे कुत्ते जो-जो ने सुसाइड किया है, क्योंकि वो मेरे पति को पसंद नहीं करता था। एक दिन वो मेरी तरफ बड़े अजीब से देख रहा था। मानो कह रहा हो कि मैं अब यहां नहीं रह सकता। मैं जा रहा हूं। उसके जाने के बाद मैं काफी टूट गई थी।'' वहीं, स्कॉटलैंड में भी एक ऐसा पुल है, जहां से अब तक करीब 600 कुत्ते कूदकर अपनी जान दे चुके हैं।

SHEEP

चट्टान से कूदीं डेढ़ हजार भेड़ें

साल 2005 में तुर्की में करीब डेढ़ हजार भेड़ों ने एक चट्टान से एक साथ छलांग लगा दी थी। उनमें से 450 भेड़ों की मौत हो गई थी, लेकिन बाकी को बचा लिया गया था। पहले कूदीं भेड़ों के शवों पर गिरने की वजह से बाद में कूदीं भेड़ों को चोटें कम आई थीं। इसे मास सुसाइड कहा गया। भेड़ों के इस सुसाइड की वजह से परिवारों को एक लाख डॉलर ( करीब 55-60 लाख) का नुकसान हुआ था। हर्डर मेमट गाना ने अपने जानवरों और पैसों को एक ही पल में बर्बाद होते देखा था। एक रशियन न्यूज चैनल के मुताबिक, चट्टान के नीचे 52 भेड़ों के शव पाए गे थे। एक मशहूर कहावत भी है कि एक भेड़ कुएं में कूदती है तो सब उसके पीछे-पीछे कूद जाती हैं। तुर्की में एक भेड़ के चट्टान से कूदने के बाद जब उसके पीछे-पीछे कूद गईं तो ये कहावत भी सच हो गई। बाद में आम बोलचाल में इसे भेड़चाल कहा जाने लगा।

WHALES

61 व्हेल्स ने किया सुसाइड

नवम्बर 2011 में 61 व्हेल्स एक साथ न्यूजीलैंड के एक बीच पर आ गईं थी, जिनमें से केवल 18 ही बच पाईं। व्हेल्स ने ऐसा क्यों किया इसका आजतक कोई कारण पता नहीं चल पाया है। एक थ्योरी के मुताबिक, जब एक व्हेल सुसाइड करने के लिए ऐसा कदम उठाती है तो बाकी भी ठीक वैसा ही करती हैं।

COW

28 गायों का पहाड़ी से कूदकर किया सुसाइड

अगस्त 2009 में स्विट्जरलैंड के एक गांव लौटेरब्रंनें में 28 गाय एक ही पहाड़ी चट्टान से कूद कर मर गए थे। वैसे तो एल्पाइन रीजन में इस तरह की घटना आम बात है, लेकिन तीन दिन एक ही जगह से इतनी सारी गायों का कूद कर अपने आप में हैरान करने वाला था। मरी हुईं गायों के शवों को हटाने के लिए हैलिकॉप्टर बुलाने पड़े थे, क्योंकि जल्द से जल्द अगर इन शवों को वहां से नहीं हटाया गया होता तो ग्राउंड वॉटर ( जमीन के नीचे का पानी) पॉल्यूटेड होने का खतरा था। साथ ही इतनी तादाद में इन शवों को खाने वाले मांसाहारी पशु भी वहां मौजूद नहीं थे।

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