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CM अखिलेश के वे फैसले जो सरकार के लिए साबित हुए मील का पत्थर

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Published on 30 Jun 2016 11:11 AM GMT

CM अखिलेश के वे फैसले जो सरकार के लिए साबित हुए मील का पत्थर
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शुक्रवार को 43 साल के हो रहे हैं। साथ ही अखिलेश सरकार अपने पांचवें साल में है। अगले साल 2017 में यूपी में चुनाव होने वाले हैं। अब समय आ गया है कि वर्तमान समाजवादी सरकार के उन फैसलों पर चर्चा हो जो मील का पत्थर साबित हुई।

अखिलेश यादव ने जब राज्य की बागडोर थामी थी तब किसी ने ये नहीं सोचा था कि अब तक अपने ही परिवार के दिग्गज राजनेताओं के पीछे रहने वाला ये शख्स अपने काम को बखूबी अंजाम देगा। आज राजनीतिक पंडित भी इस बात को मानते हैं कि उनकी कई योजनाएं उनके भविष्य की राजनीति का आईना हैं।

समाजवादी पेंशन योजना

सीएम अखिलेश यादव ने नवबंर 2014 में समाजवादी पेंशन योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति/जनजाति के 12 लाख, अल्पसंख्यक समुदाय के 10 लाख, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के 18 लाख गरीब परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। यह योजना देश में किसी भी राज्य सरकार की ओर से अपने संसाधनों से संचालित की जाने वाली सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसके तहत प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में रहने वाले सभी वर्गों के ऐसे 40 लाख गरीब परिवार लाभान्वित हो रहे हैं जिनके पास आय के उपयुक्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। इस योजना को अखिलेश सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनती है। योजना के तहत चयनित परिवार के मुखिया को वर्तमान में 550 रुपए मासिक पेंशन राशि दी जाती है।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें अखिलेश सरकार की अन्य योजनाएं ...

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मेट्रो रेल परियोजना

दैनिक जीवन में प्रदेश वासियों को परिवहन की हाइटेक सुविधा देने के किए अखिलेश सरकार ने मेट्रो रेल परियोजना पर जोर दिया। लखनऊ मेट्रो अखिलेश सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। सरकार हर हाल में इस साल मेट्रो का संचालन शुरू करना चाह रही है। इसका एक बड़ा कारण अगले साल होने वाला चुनाव भी है। गौरतलब है कि लखनऊ मेट्रो प्रदेश सरकार की सबसे महात्वाकांक्षी परियोजना है। यही कारण है कि यूपी सरकार इसके मार्ग में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं आने दे रही है। सरकार को भी विश्वास है कि भले ही कुछ स्टेशनों के बीच ही सही लेकिन इस 2016 के अंत तक लखनऊ मेट्रो की शुरुआत हो जाएगी।

लखनऊ मेट्रो प्रोजेक्ट ने सरकार की छवि को काम करने वाली सरकार के रूप में स्थापित करने में बेहद मदद की है। अब तो शहर की जनता भी इसे लेकर बेहद उत्साहित है। वह उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रही है, जब शहर में मेट्रो का उद्घाटन हो और उसे शहर के जाम भरी सड़कों से निजात मिल सके।

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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे को भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता रहा है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे कई मायनों में बेहद खास है। यह देश का सबसे तेजी से बनने वाला एक्सप्रेस वे माना जाने लगा है। इसे मात्र 22 महीनों के रिकॉर्ड समय में पूरा किया जा रहा है। इस एक्सप्रेस वे कई खूबियां हैं। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर कहीं भी शराब की दुकानें नहीं होंगी। देश में इस तरह का यह पहला मार्ग होगा।

सीएम अखिलेश यादव ने अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट में विश्वस्तरीय सुविधाअों के साथ सुरक्षित सफर को प्राथमिकता दी है। उम्मीद की जा रही है कि अक्टूबर महीने से इस पर सौ किलोमीटर की स्पीड से अधिक तेजी से गाडियां दौड़ सकेंगी। इस एक्सप्रेस वे के जरिए गावों को भी शहर से जोड़ा जाएगा जिससे किसान अपने सामान को आसानी से मंडियों तक पहुंचा सकेंगे और उन्हें उसका उचित मूल्य मिल सकेगा।

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लैपटॉप योजना

सीएम अखिलेश यादव ने गांवों को डिजिटल करने के फैसले के अंतर्गत साल 2012 में लैपटॉप योजना की शुरुआत की थी। हालांकि इसका काफी विरोध भी हुआ था। उन्हें अपनी पार्टी के लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा था। लेकिन अखिलेश ने अपनी बात मनवाई और पार्टी के घोषणा पत्र में इस योजना को जगह दी। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सीएम बनते ही उन्होंने वरिष्ठ आईएएस अफसर पार्थसारथी सेन शर्मा को इसका जिम्मा सौंपा था।

सीएम अखिलेश यादव की यह सोच रही है कि बच्चों के साथ बड़े भी लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं। इससे गांवों की तस्वीर बदल सकती है। जिसका असर अब दिखना भी शुरू हो गया है। पूरी तैयारी के साथ इस योजना को लागू किया गया है। इस वजह से हजारों करोड़ की योजना पर करप्शन का साया नहीं पड़ा।

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कन्या विद्या धन योजना

सत्ता में आते ही अखिलेश सरकार ने कन्या विद्या धन योजना की फिर से शुरुआत की। उल्लेखनीय है कि इससे पहले मायावती सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया था। कन्या विद्या धन योजना के तहत प्रदेश सरकार यूपी बोर्ड के साथ-साथ सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से इंटर पास करने वाली छात्राओं को आगे की पढाई जारी रखने के लिए 30 हजार रुपए देती है। कन्या विद्या धन योजना में गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार की बेटियों को वरीयता दी जाती है।

इस योजना के तहत चयनित लडकियों को पैसा उनके बैंक खाते में दिया जाता है। राजनीतिक पंडित भी इसे अखिलेश सरकार की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखते हैं। हालांकि अब सरकार ने इसमें संशोधन कर यूपी मदरसा शिक्षा परिषद और यूपी संस्कृत शिक्षा परिषद की इंटरमीडिएट स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण छात्राएं को भी शामि‍ल करने की योजना बनाई है।

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अखिलेश यादव ने सत्ता में आते ही महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनजर '1090 हेल्पलाइन सेवा' की शुरुआत की। इस सेवा के अंतर्गत कोई भी पीड़ित महिला या उसकी महिला रिश्तेदार अश्लील कॉल, मैसेज आने पर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती है। हेल्पलाइन में शिकायत करने वाली महिला की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। पीड़िता की सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए थाने या किसी ऑफिस में नहीं बुलाया जाता है।

हेल्पलाइन में श‍िकायत दर्ज करने का काम महिलाएं ही करती हैं, जिससे पीडित महिलाएं बे‍झ‍िझक होकर अपनी बात कहती हैं। हेल्पलाइन सेंटर दर्ज शिकायत पर तब तक काम करता है, जब तक उस पर पूरी कार्रवाई नहीं हो जाती है।

अखिलेश सरकार की यह योजना काफी सार्थक रही। इसके परिणाम भी सकारात्मक रहे। आगामी चुनाव को देखते हुए वर्तमान सत्ताधारी दल इसी भुनाने की पूरी कोशिश करेगी।

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gomtiगोमती रिवर फ्रंट

सीएम अखिलेश यादव ने गोमती की सफाई को लेकर 'गोमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' की शुरुआत की। इस प्रोजेक्ट के तहत गोमती नदी को साफ कर उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें खेलों से लेकर योग और नदी से लेकर जंगल तक से जुड़े रोमांच को तैयार करने का काम तेजी से किया जा रहा है। यह प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने में विशेष योगदान देगा। अखिलेश सरकार इसी गुजरात के साबरमती फ्रंट की तरह विकसित करना चाहती है। हालांकि शहर वासी उत्सुक हैं कि उनके सपनों का लखनऊ कैसा बनने जा रहा है।

गोमती रिवर फ्रंट के अंतर्गत कार पार्किंग, वेटलैंड, लॉन, प्लाजा, मल्टी परपज कोर्ट, बच्चों के खेल का मैदान, गोमती फ्लावर शो, वाटर शो और निर्मल ज्योति रंगीन फव्वारों का शो लोगों का मनोरंजन करेगा।

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