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बर्थडे: पंडित ने बताई थी ये युक्ति, तब हुआ था 'हरिवंश राय' का जन्म, पढ़ें ये रोचक कहानी

हरिवंश राय बच्चन का जीवन काफी संघर्षों भरा रहा है। उनकी किताब मधुशाला बहुत फेमस है और कई भाषाओं में उसका अनुवाद हुआ है।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 27 Nov 2018 7:03 AM GMT

बर्थडे: पंडित ने बताई थी ये युक्ति, तब हुआ था हरिवंश राय का जन्म, पढ़ें ये रोचक कहानी
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लखनऊ: मशहूर कवि हरिवंश राय बच्चन का आज जन्मदिन है। साल 1907 में यूपी के प्रतापगढ़ जिले के बाबू पट्टी गांव में उनका जन्म हुआ था। हरिवंश का जीवन काफी संघर्षों भरा रहा है। उनकी किताब मधुशाला बहुत फेमस है और कई भाषाओं में उसका अनुवाद हुआ है। आज हम आपको हरिवंश राय बच्चन से जुड़े कुछ रोचक किस्से बता रहे है।

पंडित ने बताई ये युक्ति तब हुआ था हरिबंश का जन्म

हरिवंश राय के पिता लाला प्रताप नारायण श्रीवास्तव और मां सुरसती देवी प्रतापगढ़ जिले के बाबू पट्टी गांव के रहने वाले थे। सुरसती देवी को शुरू में 2 संतान हुई, लेकिन पैदा होते ही उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद दोनों एक पंडित से मिले। पंडित ने सुरसती देवी और लाला प्रताप को 3 बर्तन दिए और कहा कि इस बर्तन को लेकर अपने घर से दक्षिण की तरफ जाओ। जहां शाम हो जाए, वहीं रुक जाना। फिर वहीं घर बनवाकर हरिवंश पुराण सुनना तो संतान सुख मिलेगा।

दोनों बर्तन लेकर गांव से पैदल चले और शाम तक करीब 54 किलोमीटर दूर इलाहाबाद के चक जीरो रोड पहुंचे और रुक गए। लाला प्रताप नारायण ने वहीं घर बनवा लिया और पत्नी सुरसती देवी के साथ रहने लगे। कुछ दिनों बाद चक जीरो रोड में सुरसती देवी ने एक बेटी बिट्टनदेई को जन्म दिया। इसके बाद भगवानदेई हुईं। लगातार 2 बेटी होने से लाला प्रताप परेशान हो उठे, उन्हें। वंश चलाने के लिए एक बेटा चाहिए था।

इसके बाद दंपती ने पंडित के कहने के मुताबिक, जीरो रोड मकान में ही हरिवंश पुराण सुना, जिसके बाद हरिवंश राय बच्चन का जन्म हुआ। उसके बाद एक और बेटा शालिग्राम हुआ। इस तरह हरिवंश राय बच्चन कुल 6 भाई-बहन थे। कुछ समय बाद इनके पिता ने यमुना किनारे स्थित जमुना क्रिश्चियन कॉलेज के सामने गली में एक मकान बनाया। यहीं साल 1935 में हरिवंश राय बच्चन ने मधुशाला की रचना की।

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जीवन का ऐसा दौर जब अकेले पड़ गये थे बच्चन

बालीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के एक छोटे से गाँव बाबू पट्टी में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। यह जिला इलाहाबाद से 62 किलोमीटर की दूरी पर है। वर्ष 1926 में हरिवंश राय की शादी श्यामा से हुई थी जिनका टीबी की लंबी बीमारी के बाद वर्ष 1936 में निधन हो गया। इस बीच वे नितांत अकेले पड़ गए। वर्ष 1941 में बच्चन ने तेजी सूरी से शादी की। हरिवंश राय बच्चन के दो पुत्र अमिताभ बच्चन और अजिताभ हुए।

1935 में आई मधुशाला’ रचना से मिली पहचान

हरिवंश राय बच्चन को सबसे अधिक लोकप्रियता ‘मधुशाला’ से मिली। हरिवंश राय बच्चन की यह रचना 1935 में लिखी गई थी। हरिवंश राय बच्चन की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह यह थी कि वे बहुत ही गंभीर मुद्दों को सरल अंदाज में बयां करते थे।

भांजे को 30,000 में बेच दिया था मकान

साल 1984-85 में डॉ. बच्चन ने अपने इस पैतृक आवास को सिर्फ 30,000 में भांजे रामचंद्र को बेच दिया था। लेकिन आज भी उनके बेटे अमिताभ और परिवार के सदस्य इस घर को देखने वाले आते हैं। रामचंद्र के 4 बेटों में बंटवारे के बाद मकान का तो जैसे अस्तित्व नहीं के बराबर रह गया। लेकिन डॉ. हरिवंश राय बच्चन के भांजे के बेटे अनूप रामचंदर ने उनके कमरे को आज भी पहले की तरह ही रखा है। उनकी यादगार चीजें संभाल कर रखी हैं।

जब गांधीजी ने किया था हरिबंश राय का बचाव

अमिताभ बच्चन ने मार्च 2018 में अपने ब्लॉग में ब्रिटिश राज के उन दिनों को याद किया था, जब उनके पिता कवि हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला के लिए आलोचना हो रही थी। कुछ लोग आरोप लगा रहे थे कि हरिवंश शराब को ग्लैमराइज कर देश के यूथ को बर्बाद कर रहे हैं। अमिताभ ने लिखा था कि उस वक्त महात्मा गांधी मेरे पिता के बचाव में उतरे थे। गांधीजी ने कहा था कि कविता में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है।

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अमिताभ ने पिता के लिए ब्लॉग में लिखी थी ये बातें

अमिताभ बच्चन ने उस समय अपने ब्लॉग में लिखा था “मुधशाला, 85 साल पहले 1933 में लिखी गई। कविता कालजयी है और आज भी शानदार विचारों से लोगों को लाभ पहुंचा रही है। 1935 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में जब कविता पहली बार पढ़ी गई तो लोगों ने खूब सराहा और कविता को कई बार दोहराने के लिए कहा।”

उन्होंने लिखा- “कविता की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कुछ लोगों ने इसका दुष्प्रचार शुरू कर दिया। उन्होंने कविता को खुद का स्वार्थ सिद्ध करने के लिए लिखी एक नीरस रचना करार दिया। इसकी शिकायत महात्मा गांधी से भी की गई थी।

अमिताभ ने लिखा है कि लोगों ने गांधीजी से कहा, “एक युवा शराब के फायदे बढ़ा-चढ़ाकर बताकर देश के यूथ को पॉल्यूट (दूषित) कर रहा है। वह युवाओं को भ्रष्ट बना रहा है, उसे रोका जाए या गिरफ्तार किया जाए। इस दौरान एक युवक ने यह धमकी तक दी कि अगर हरिवंश राय बच्चन उसके शहर में गए तो वह उन्हें गोली मार देगा।”

राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे

वर्ष 1952 में हरिवंश राय बच्चन पढ़ने के लिए इंग्लैंड चले गए, जहां कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य/काव्य पर शोध किया। 1955 में कैम्ब्रिज से वापस आने के बाद आपकी भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिन्दी विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त हो गई। हरिवंश राय बच्चन राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे और 1976 में आपको पद्मभूषण की उपाधि मिली। ‘दो चट्टानें’ (कविता-संग्रह) के लिए 1968 में साहित्य अकादमी का पुरस्कार भी मिला था। हरिवंश राय बच्चन का 18 जनवरी, 2003 को मुंबई में निधन हो गया था।

मधुशाला के कुछ अंश आपके लिए….

1. धर्मग्रन्थ सब जला चुकी है, जिसके अंतर की ज्वाला, मंदिर, मसजिद, गिरिजे, सब को तोड़ चुका जो मतवाला, पंडित, मोमिन, पादिरयों के फंदों को जो काट चुका, कर सकती है आज उसी का स्वागत मेरी मधुशाला।।

2. सब मिट जाएँ, बना रहेगा सुन्दर साकी, यम काला, सूखें सब रस, बने रहेंगे, किन्तु, हलाहल औ’ हाला, धूमधाम औ’ चहल पहल के स्थान सभी सुनसान बनें, जगा करेगा अविरत मरघट, जगा करेगी मधुशाला।।

3. बिना पिये जो मधुशाला को बुरा कहे, वह मतवाला, पी लेने पर तो उसके मुह पर पड़ जाएगा ताला, दास द्रोहियों दोनों में है जीत सुरा की, प्याले की, विश्वविजयिनी बनकर जग में आई मेरी मधुशाला।।

4. सजें न मस्जिद और नमाज़ी कहता है अल्लाताला, सजधजकर, पर, साकी आता, बन ठनकर, पीनेवाला, शेख, कहाँ तुलना हो सकती मस्जिद की मदिरालय से चिर विधवा है मस्जिद तेरी, सदा सुहागिन मधुशाला।।

कोई भी हो शेख नमाज़ी या पंडित जपता माला, बैर भाव चाहे जितना हो मदिरा से रखनेवाला, एक बार बस मधुशाला के आगे से होकर निकले, देखूँ कैसे थाम न लेती दामन उसका मधुशाला!

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