Top

इस रत्न का जितना जल्दी मिलता है लाभ,उतना ही है बुरा परिणाम,इसलिए धारण करने पहले करें विचार

suman

sumanBy suman

Published on 14 Oct 2018 5:28 AM GMT

इस रत्न का जितना जल्दी मिलता है लाभ,उतना ही है बुरा परिणाम,इसलिए धारण करने पहले करें विचार
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

जयपुर: हर ग्रह का एक रत्न होता है। शनि ग्रह का रत्‍न नीलम है, जिसे अंग्रेजी में ‘ब्‍लू सेफायर’ कहते हैं। ज्‍योतिष विज्ञान में इसे कुरूंदम का रत्‍न कहते हैं। इस समूह में लाल रत्‍न को माणिक तथा दूसरे सभी रत्नों को नीलम कहते हैं। इसलिए नीलम सफेद, हरे, बैंगनी, नीले आदि रंगों में प्राप्‍त होता है। रत्नों में सबसे अच्‍छा ब्‍लू सेफायर नीले रंग का होता है। जिसका रंग आसमानी, गहरा नीला, चमकीला नीला आदि होता है।नीलम शनि ग्रह का रत्न कहलाता है। ऐसा माना जाता है कि मोर के पंख जैसे रंग वाला नीलम सबसे अच्‍छा माना जाता है। यह बहुत चमकीला और चिकना होता है। इससे आर-पार देखा जा सकता है। यह बेहद प्रभावशाली रत्‍न होता है तथा सभी रत्‍नों में सबसे जल्‍दी अपना प्रभाव दिखाता है। इसे पहने से शनि की बुरी दशा ठीक होती है। नीलम असर बहुत तीव्रता से दिखाता है। इसलिए नीलम कभी भी बिना ज्‍योतिषी की सलाह के नहीं पहनना चाहिए।

फायदे: नीलम शनि का रत्‍न है और अपना असर बहुत तीव्रता से दिखाता है इसलिए नीलम कभी भी बिना ज्‍योतिषी की सलाह के नहीं पहनना चाहिए। नीलम रत्न को पहनने के लिए कुंडली में निम्‍न योग होने आवश्‍यक हैं।

मेष, वृष, तुला एवं वृश्चिक लग्‍न वाले अगर नीलम को धारण करते हैं तो उनका भाग्‍योदय होता है। चौथे, पांचवे, दसवें और ग्‍यारवें भाव में शनि हो तो नीलम जरूर पहनना चाहिए। शनि छठें और आठवें भाव के स्‍वामी के साथ बैठा हो या स्‍वयं ही छठे और आठवें भाव में हो तो भी नीलम रत्न धारण करना चाहिए। शनि मकर और कुम्‍भ राशि का स्‍वामी है। इनमें से दोनों राशियां अगर शुभ भावों में बैठी हों तो नीलम धारण करना चाहिए लेकिन अगर दोनों में से कोई भी राशि अशुभ भाव में हो तो नीलम नहीं पहनना चाहिए।

बुरी नजर से बचना है तो करना होगा पहले ये काम, नहीं तो जा सकती है जान

शनि की साढेसाती में नीलम धारण करना लाभ देता है। शनि की दशा अंतरदशा में भी नीलम धारण करना लाभदायक होता है। शनि की सूर्य से युति हो, वह सूर्य की राशि में हो या उससे दृष्‍ट हो तो भी नीलम पहनना चाहिए। कुंडली में शनि मेष राशि में स्थित हो तो भी नीलम पहनना चाहिए।

कुंडली में शनि वक्री, अस्‍तगत या दुर्बल अथवा नीच का हो तो भी नीलम धारण करके लाभ होता है। जिसकी कुंडली में शनि प्रमुख हो और प्रमुख स्‍थान में हो उन्‍हें भी नीलम धारण करना चाहिए।क्रूर काम करने वालों के लिए नीलम हमेशा उपयोगी होता है।

suman

suman

Next Story