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विदेशों में क्रिसमस की धूम, यीशु के जन्मदिन पर लाइटिंग और क्रिसमस ट्री से सज गए बाजार

suman

sumanBy suman

Published on 19 Dec 2016 11:49 AM GMT

विदेशों में क्रिसमस की धूम, यीशु के जन्मदिन पर लाइटिंग और क्रिसमस ट्री से सज गए बाजार
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लंदन: विदेशों में क्रिसमस एक बड़े त्योहार के रूप में मनाया जाता है। इंग्लैंड में क्रिसमस की तैयारियां नवंबर मध्य से ही शुरू हो जाती हैं। यहां लोग घरों को रंग-बिरंगी लाइट्स से सजाते और क्रिसमस ट्री लगाते हैं। पारंपरिक सजावट में प्लास्टिक की घंटी, मोमबत्ती, कैंडी केन्स, बड़े मोजे, पुष्पमालाएं और फ़रिश्तों से सजाया जाता है। हालांकि क्रिसमस के अवसर पर स्नो फ़ॉल को शुभ शगुन माना जाता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन की वजह से अब केवल उत्तरी भाग यानी स्कॉटलैंड के लोग ही बर्फबारी का आनंद ले पाते हैं, लेकिन इंग्लैंड के हर इलाके में क्रिसमस की सजावट, क्रिसमस मार्केट, क्रिसमस लाइट्स देखने को मिल जाता है। लंदन में क्रिसमस विंटर वंडरलैंड का आयोजन किया जाता है। जहां कई तरह के फन गेम्स रखा जाते हैं। इंडिया के कई स्टार के कंसर्ट्स आयोजित किए जाते हैं। क्रिसमस की तैयारी पर Newstrack.com के लिए लंदन से मधु चौरसिया की रिपोर्ट...

यहां प्लास्टिक ही नहीं, ऑरिजनल क्रिसमस ट्री की भी बहुत डिमांड होती है। हर साइज के क्रिसमस ट्री बाजारों में उपलब्ध होते हैं। खासतौर से कुछ जगहों में बड़े आकार के क्रिसमस ट्री क्रेन की मदद से लगाए जाते हैं। जैसे ट्रफेल्गर स्कॉयर, चर्च, कुछ मॉल और सरकारी ऑफिसों में बड़े आकार के ट्री सजाए जाते हैं। यहां ऑक्सफर्ड स्ट्रीट को महीनों पहले से बेहद ख़ास अंदाज से सजाया जाता है। हर शॉपिंग कॉम्प्लैक्स को क्रिसमस थीम पर डेकोरेट किया जाता है। इस स्ट्रीट की रौनक ख़ास तौर पर क्रिसमस के अवसर पर देखने लायक होती है।

यहां क्रिसमस से पहले काफी भीड़ देखने को मिलती है। जिनमें विदेशी पर्यटकों की संख्या काफी ज्यादा होती है। लंदन में सेंटा रेस का आयोजन किया जाता है जिसमें सभी सेंटा के कॉस्ट्यूम में एक साथ नज़र आते हैं। जगह-जगह आइस स्केटिंग की व्यवस्था की जाती है। टेम्प्रेररी मार्केट लगाए जाते हैं जहां क्रिसमस से जुड़ी हर सामग्री उपलब्ध होती है। मॉल में क्रिसमस पर खरीदारी के अच्छे और लुभावने ऑफर्स निकाले जाते है। रेस्तरा और होटलों में भी काफी भीड़ देखने को मिलती है।

इस अवसर पर घरों में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। जिनमें टर्की, चिकेन, पुडिंग, चॉकलेट्स, वाइन का सेवन किया जाता है। लोग एक दूसरे से मिलते हैं। उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं। यहां के हर स्कूल में नन्हें-मुन्हें बच्चे छुट्टी से पहले जीजस क्राइस्ट की जीवनी पर कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। इस अवसर पर सरकारी अवकाश होता है।

क्रिसमस को सभी ईसाई लोग मनाते हैं और आजकल कई गैर ईसाई लोग भी इसे एक धर्मनिरपेक्ष, सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाते हैं। क्रिसमस के दौरान उपहारों का आदान-प्रदान, सजावट का सामन और छुट्टी के दौरान मौज-मस्ती के कारण यह एक बड़ी आर्थिक गतिविधि बन गया है। क्रिसमस की तैयारी 12वीं रात को उतारी जाती है जो 5 जनवरी की शाम का दिन होता हैं।

अमेरिका में, "क्रिसमस की खरीदारी का मौसम" आम तौर पर ब्लैक फ्राइडे को शुरू होता है ये दिन धन्यवाद (Thanksgiving) दिन के बाद आता है। हालांकि बहुत से दुकानों में क्रिसमस के सामान अक्टूबर की शुरुआत से ही मिलने लगते हैं। एक अर्थशास्त्री के विश्लेषण के अनुसार रूढ़िवादी मिक्रोएकोनोमिक सिद्धांत( microeconomic theory), उपहार में वृद्धि-देने के कारण क्रिसमस एक डेथवेट लॉस (deadweight loss) इस नुकसान की गणना उपहार देने और उपहार लेने के बीच के खर्च को जोड़ कर होता है। साल 2001 में क्रिसमस के अवसर पर केवल अमेरिका में 4 अरब डॉलर की डेथवेट लॉस हुआ था।

अंग्रेजों ने जब भारत में अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। उस वक्त उन्हें लगा ईसाई धर्म को फैलाने की जरूरत होगी। उस समय 25 दिसम्बर वह दिन था, जब से दिन बड़े होने लगते थे। हिन्दुओं में इसके महत्व को भी नहीं नकारा जा सकता था। शायद इसीलिए इसे बड़ा दिन कहा जाने लगा, ताकि हिन्दू इसे आसानी से स्वीकार कर सकें। अब भारत में ईसाई ही नहीं महानगरों में हर धर्म के लोग क्रिसमस पर सजावट करते हैं। ख़ास तौर पर बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिलता है। माता पिता भी सेंटा के रूप में बच्चों को उपहार भेंट करते हैं। महानगरों में मॉल और शॉपिंग कॉम्पलेक्स की शोभा देखते बनती है।

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