HRD मंत्री रहते स्मृति ईरानी से जुड़ी थीं ये बड़ी CONTROVERSIES

Published by Rishi Published: July 6, 2016 | 2:32 am
Modified: July 6, 2016 | 7:09 am

नई दिल्लीः पीएम नरेंद्र मोदी ने स्मृति ईरानी को बड़ी उम्मीदों के साथ मानव संसाधन विकास (एचआरडी) जैसा अहम मंत्रालय सौंपा तो था, लेकिन इस मंत्रालय को संभालने के दौरान स्मृति लगातार ऐसे विवादों में घिरती गईं, जिनकी वजह से उनकी और सरकार की कई बार किरकिरी हुई और पीएम तक को जवाब देते नहीं बना। एक नजर उन विवादों पर, जिन्होंने स्मृति के एचआरडी मंत्री रहते तूल पकड़ा।

आईआईटी निदेशकों की नियुक्ति
साल 2015 में मशहूर परमाणु वैज्ञानिक अनिल काकोदकर ने आईआईटी मुंबई के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। बताया जा रहा है कि कुछ आईआईटी के निदेशक चुने जाने को लेकर स्मृति से उनका विवाद हो गया था। काकोदकर ने आरोप भी लगाया था कि स्मृति का मंत्रालय आईआईटी निदेशकों के चुनाव में हस्तक्षेप कर रहा है।

रोहित वेमुला की खुदकुशी
हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला ने इस साल 17 जुलाई को खुदकुशी कर ली थी। रोहित को हॉस्टल और कैंपस में घुसने से रोक दिया गया था। उस पर एबीवीपी समर्थक पर हमले का आरोप था। विपक्ष ने इस मामले में आरोप लगाया था कि स्मृति के मंत्रालय ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को पांच बार पत्र लिखकर रोहित के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा। स्मृति पर संसद में इस मामले में गलतबयानी का भी आरोप लगा था। साथ ही इस मामले में छात्रों ने भी जोरदार तरीके से उनके खिलाफ आवाज उठाई थी। सिर्फ स्मृति के अलावा सरकार की ओर से इस बारे में विपक्ष के हमले का जवाब देने के लिए कोई भी सामने नहीं आया था।

जेएनयू के परचे का मामला
स्मृति पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में देशद्रोही नारेबाजी के मामले में भी स्मृति घिरी थीं। उन्होंने इस मामले के बाद संसद में एक परचा पढ़ा था। जिसमें देवी दुर्गा के बारे में तमाम आपत्तिजनक शब्द थे। इस पर कांग्रेस के सदस्यों ने लोकसभा के वेल में आकर उनका विरोध किया था। विपक्ष ने स्मृति से माफी की मांग की, लेकिन स्मृति ने कहा कि वह माफी नहीं मांगेंगी और वह खुद दुर्गा की पूजा करती हैं।

डिग्री का विवाद
स्मृति ईरानी को एचआरडी मंत्रालय सौंपने के बाद ही उनकी डिग्री को लेकर भी सवाल उठने शुरू हो गए थे। विपक्ष का कहना था कि साल 2004 और 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अपनी शिक्षा के बारे में अलग-अलग जानकारी दी। दरअसल साल 2004 में स्मृति ने बताया था कि वह बीए पास हैं, जबकि 2014 में उन्होंने खुद को बी.कॉम पार्ट वन का छात्र बताया। उन्होंने खुद के पास अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी की डिग्री भी बताई थी, लेकिन यूनिवर्सिटी ने कहा कि स्मृति ने सिर्फ इंडिया-येल पार्लियामेंट्री लीडरशिप प्रोग्राम में हिस्सा लिया था।

कई अन्य विवाद भी जुड़े
स्मृति के मंत्रालय ने सभी केंद्रीय विद्यालयों को कहा कि तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन भाषा पढ़ाना बंद किया जाए और संस्कृत पढ़ाई जाए। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने बाकायदा इस मामले में पीएम मोदी को फोन किया था। वहीं, दिल्ली यूनिवर्सिटी ने जब चार साल के डिग्री कोर्स की शुरुआत करने की कोशिश की तो स्मृति के मंत्रालय की वजह से इसे लागू नहीं किया जा सका। स्मृति पर तब ये आरोप लगा कि वह एक ऑटोनॉमस इंस्टीट्यूशन के कामकाज में दखलंदाजी कर रही हैं। विपक्ष ने इसे भी मुद्दा बनाया था और सरकार के बड़े मंत्री जवाब देने की स्थिति में नहीं थे।