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इस देश में आतंकवादी मारे गए लोगों की खोपड़ी से खेलते हैं 'फुटबॉल'

अधिकारियों और स्वतंत्र समूहों के अनुसार, 2002 के बाद से आतंकी हिंसा पाकिस्तान के कारण उत्तर-पश्चिम में 50 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए और सरकार द्वारा चलाए जा रहे शरणार्थी शिविर या शांतिपूर्ण इलाकों में किराए के मकान में शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 6 Jun 2019 10:58 AM GMT

इस देश में आतंकवादी मारे गए लोगों की खोपड़ी से खेलते हैं फुटबॉल
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नई दिल्ली: अभी तक आपने आतंकवादियों के जुल्म की ढेरों खबरें पढ़ी होगी। लेकिन आज हम आपको आतंकवादियों से जुड़ी एक ऐसी खबर के बारे में बता रहे है। जिसमें क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गई है।

बता दे कि ब्रिटिश मीडिया बीबीसी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर में स्थित जनजातीय जिले उत्तर वजीरिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के दौरान हवाई हमलों और जमीनी अभियानों में भारी संख्या में निर्दोष लोग मारे गए हैं।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक "पाकिस्तान में प्रति महीने 6-8 आतंकवादी घटनाएं होती हैं जिनमें महिलाओं, बच्चों, स्कूलों, चर्चो और बाजारों को निशाना बनाया जाता है। उत्तरी वजीरिस्तान में लोगों का कत्लेआम हो रहा है और आतंकवादी मारे गए लोगों के सरों से फुटबाल खेल रहे हैं।"

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बीबीसी का कहना है कि वो इस इलाके के कुछ पीड़ितों तक पहुंचने में सफल रहे है। डेरा इस्माइल खान के नजीरुल्लाह उनमें से एक हैं जिनके घर को सेना ने 2014 की शुरुआत में निशाना बनाया था और उनके परिवार के चार सदस्य मारे गए थे।

अधिकारियों और स्वतंत्र समूहों के अनुसार, 2002 के बाद से आतंकी हिंसा पाकिस्तान के कारण उत्तर-पश्चिम में 50 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए और सरकार द्वारा चलाए जा रहे शरणार्थी शिविर या शांतिपूर्ण इलाकों में किराए के मकान में शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं।

इस रिपोर्ट की पाकिस्तानी सेना ने कड़ी आलोचना करते हुए झूठ का पुलिंदा बताया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, सेना की मीडिया इकाई इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशन्स (आईएसपीआर) के हवाले से कहा गया है कि दो जून को प्रकाशित लेख अनकवरिंग पाकिस्तान्स सीक्रेट ह्यूमन राइट्स एब्यूजेज के कंटेंट में बिना किसी सबूत के पाकिस्तानी सेना पर आरोप लगाए गए हैं।

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लेख की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए सेना ने कहा कि बीबीसी ने उसे एक प्रश्नावली भेजी थी, जिसके जवाब में उन्होंने पूरा अवसर जानने तथा तथ्य जानने के लिए उससे संवाद करने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, मीडिया संगठन ने इस पर कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और पूर्वनिर्धारित और अनुमानित कहानी बना दी। बयान में कहा गया कि बीबीसी का लेख तत्कालीन व्याप्त माहौल की समझ और संदर्भ से परे है।

आईएसपीआर ने कहा, "रिपोर्ट में तथाकथित घटना की दी गई तारीख में उत्तरी वजीरिस्तान में जिस अभियान की बात की गई है, वह अभी तक शुरू नहीं हुआ है। इस क्षेत्र का उपयोग आतंकवादी देशभर में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने, उनकी योजना बनाने और संचालित करने के लिए करते रहे हैं।" बीबीसी के लेख में प्रमाणित या विश्वसनीय सूत्र का अभाव है और यह सिर्फ अफवाहों पर आधारित है।

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