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मेरे पास कोई दुःख आ ना सके, धूप मुझे मुरझा ना सके, मेरे साया बनके चले, मेरे पापा

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Published on 18 Jun 2017 7:31 AM GMT

मेरे पास कोई दुःख आ ना सके, धूप मुझे मुरझा ना सके, मेरे साया बनके चले, मेरे पापा
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संध्या यादव

लखनऊ: पापा आप कितने मासूम हो.. मुझे आज भी याद है कि जब एक दिन आपका मोबाइल में गेम खेलने का मन हुआ मैंने आपको गेम ऑप्शन खोल कर दे दिया। कुछ देर तो आप बड़े आराम से खेलते रहे। पर अचानक आप मुझे आवाज देने लगे। मैं दौड़कर भागती हुई आई। मैंने आपका चेहरा देखा। उस वक़्त आपका चेहरा उस 4 साल के बच्चे की तरह मासूम लग रहा था, जिससे गलती से कांच का गिलास टूट जाता है।

तभी आपने मेरा फ़ोन देते हुए कहा- बेटा, मैंने कुछ नहीं किया है, ये गेम अपने आप बंद हो गया है, न जाने ये क्या शुरू होने लगा। पर यकीन मानो बेटी मैंने नहीं किया है...उफ्फ पापा, उस दिन मैंने जाना कि जो पापा पूरी दुनिया से मेरे लिए लड़ने को तैयार रहते हैं, उनका दिल तो मुझसे भी कई गुना ज्यादा मासूम है।

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fathers day specail story

उस पूरे दिन मेरे दिल में एक ख्याल ने जमकर हलचल मचाई। मैं सोचती रही कि पापा आप भले ही इस नए जमाने की चीजों से अंजान हों, पर एक ख़ास बात जो शायद दुनिया के हर पापा की खासियत होती है वो यह कि अगर उनकी बेटी की स्कूटी शहर के किसी भी कोने पर खराब हो जाए या फिर बेटे को कहीं किसी चौराहे पर पुलिस ने रोक लिया हो, तो वो एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं।

जहां बेटी की स्कूटी ख़राब हुई होती है, उसके आसपास से लेकर दूर-दराज तक किसी न किसी जानकार का पता लगा कर बेटी की हेल्प के लिए भेज देते हैं और अगर बेटे को पुलिस ने रोका है तो कहीं न कहीं से सोर्स लगाकर उसे छुड़वा ही लेते हैं।

ये पापा के अलावा कौन कर सकता है। कभी कॉलेज का कोई फॉर्म भरना हो या फिर बेटे के लिए किसी वैकेंसी का पता करना हो, वो बाहर निकल जाते हैं। नहीं देखते हैं कि मौसम अच्छा है या बुरा... पापा मैंने आपके लिए बड़े से बड़े गिफ्ट देखे, लेकिन जब उन्हें आपके प्यार के सामने रखा, तो बहुत ही छोटे नजर आए।

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मैं तो क्या शायद दुनिया के हर पापा आपकी तरह ही मासूम हैं। उनकी आंखों में प्यार तो समुद्र के पानी से भी गहरा होता है, पर वो वो कभी जताते नहीं हैं उनकी हर नाराजगी में हमारे लिए प्यार होता है, पर न जाने वो क्यों बताते नहीं हैं, उनकी हर बात में हमारी ख़ुशी छिपी होती है, पर ना जाने क्यों हम महसूस नहीं कर पाते हैं चंदा ने पूछा तारों से, तारों ने पूछा हजारों से... सबसे प्यारा कौन है... पापा मेरे पापा.. फिल्म ‘मैं ऐसा ही हूं’ का ये सांग सुनते ही हर किसी के दिल में एक न एक बार अपने पापा का प्यार जरुर जाग जाता है। अक्सर लोग कहते हैं कि मैं अपने पापा से ज्यादा मां के करीब हूं। पर मैं यह पूछना चाहती हूं कि कभी आपने अपने पापा के करीब आने की कोशिश की?

आप ही बताइए कि आप कब आखिरी बार अपने पापा के साथ टाइम स्पेंड किये थे? कब आपने आखिरी बार ऑफिस जाते टाइम पापा की बाइक निकाली थी या फिर कब आखिरी बार आप उनके चेहरे पर स्माइल का रीजन बने थे नहीं याद है न.. जैसे जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं, वैसे वैसे वे अपनी दुनिया में खोते जाते हैं पर पापा ... वो तो आज भी सुबह 8 बजे उठकर ऑफिस के लिए निकालते हैं और शाम को 7 बजे लौटते हैं सिर्फ और सिर्फ अपने बच्चों के फ्यूचर को सुधारने के लिए ताकि उन्हें कभी कोई कमी महसूस न हो।

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पापा बचपन से लेकर आज तक आपने मेरे चेहरे पर स्माइल देखने के लिए अपनी स्माइल को तो जैसे भुला ही दिया है मुझे याद है जब मैं स्कूल में पढ़ती थी आप दिन-भर के थके हुए ऑफिस से आते थे पर फिर भी मुझे रात में बिठाकर पढ़ाते थे और हां मुझे वो भी याद है जब मैं आपको अपना हेयरबैंड पहनाती थी आप जरा भी नाराज नहीं होते थे और मैं आपको अपनी गुड़िया की तरह सजा देती थी।

पापा आपकी तरह ही मोहल्ले के शर्मा अंकल भी हैं वो भी आपकी तरह त्याग की मूर्ति हैं जब से मैं समझदार हुई हूं, तब से आपकी और उनकी दोस्ती देख रही हूं। पता है पापा उन्होंने अपनी लाइफ में कभी स्मार्टफ़ोन नहीं लिया, पर बेटे के लिए एंड्रॉइड सेट लाकर दिया। उनके जूते फट जाने के बावजूद वो कई दिनों तक सिलवाकर उन्हें पहनते रहे पर बेटे को हमेशा बाटा के जूते पहनाए। खुद तो सिटी बसों में धक्के खाते रहे पर बेटे को कभी साइकिल से भी न चलने दिया। उसे उन्होंने बाकायदा पल्सर बाइक दिलवाई। पापा कुदरत का अनोखा तोहफा होते हैं। इनकी कीमत जरा उन लोगों से पूछिए, जिनके पापा नहीं हैं।

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मां तो एक बार कमजोर भी हो जाती हैं, पर पापा आप तो वो नारियल हैं, जो ऊपर से देखने पर लोहे की तरह कड़े होते हैं, लेकिन अगर कोई अंदर झांकता है, तो रुई के फाहे की तरह सॉफ्ट होते हैं। बच्चों के लिए हर कदम पर बस त्याग ही करते हैं। अपने बच्चों की पॉकेटमनी के लिए खुद कम खर्च करते हैं, पर बच्चों के ऐश-ओ-आराम में कभी कोई कमी नहीं होने देते हैं। फादर्स डे के इस मौके पर मैं अपने और दुनिया के हर पापा को सेल्यूट करना चाहती हूं, जो हर कदम पर अपने बच्चों की ढाल बनकर खड़े रहते हैं। फिर चाहे इसके लिए उन्हें टैक्सी ड्राइवर बनना पड़े या फिर चाट का ठेला लगाना पड़े।

अपने बच्चों की एक हंसी के लिए वो समाज से लड़ने तक को तैयार हो जाते हैं, फिर क्यों लोग पापा के प्यार को समझ नहीं पाते हैं। इस फादर्स डे पर खुद से प्रॉमिस कीजिए कि आप अपने पापा के चेहरे पर स्माइल का रीजन बनेंगे। भले ही आप उन्हें गिफ्ट न दें, पर उनकी छोटी छोटी खुशियों का ख्याल रखकर उनके चेहरे पर स्माइल ला सकते हैं।

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