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जानिए क्यों इस गांव में सावन के पहले दिन मनाई गई दीपावली

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NewstrackBy Newstrack

Published on 21 July 2016 12:02 PM GMT

जानिए क्यों इस गांव में सावन के पहले दिन मनाई गई दीपावली
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चंदौली: सावन के मास में अगर लोग दीपावली मनाएं तो एक बार आपको आश्चर्य जरूर होगा है, लेकिन चंदौली के एक गांव में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। सावन के पहले दिन इस गांव में गांव के लोगों ने दीपक से पूरे गांव को जगमगा दिया।

chandoli

बना पूर्णरुपेण शौचमुक्त गांव

ये गांव है चंदौली जनपद का मुहम्मदपुर। इस गांव में कल यानि बुधवार को साल सावन के पहले ही दिन दीपावली देखने को मिली। इस गांव के लोगों ने 8-10 हजार दीपक से गांव को जगमगा दिया। ऐसा करके गांव के लोगों ने यहां आए जिलाधिकारी कुमार प्रशांत का स्वागत किया। पटाखे छोड़े। आगे चलकर पूरा नजारा पर्व से कार्यक्रम में तब्दील हो गया।

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गांवों के प्रयास से मकसद में मिली कामयाबी

इस कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि चंदौली जनपद का ये पहला गांव (मुहम्मदपुर) है जो पूर्ण रूप से शौचमुक्त है। उन्होंने बताया कि जिस लगन और निष्ठा से इतने कम समय में गांव के लोगों ने जो कर दिखाया, वो काबिले तारीफ है। उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी गांव को स्वच्छ और सुन्दर बनाने के लिए वहां रहने वाले लोगों को आगे आना होगा, तभी हम अपने प्रयास में सफल होंगे।

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बना पहला ओडीएफ गांव

जिलाधिकारी कुमार प्रशांत ने कहा कि पहले चरण में कुल 26 गांव को चुना गया था। जिसमें मुहम्मदपुर ने जिले में पहला ओपेन डिफिकेशन फ्री विलेज(ODF) यानी 'खुले में शौच मुक्ति गांव' होने का खिताब जीता है। दूसरे चरण में कुल 40 गांव लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मुहम्मदपुर के ग्रामवासियों ने मेहनत की, उसी तरह सभी गांव कोशिश करेंगे तो लगभग डेढ़ साल में चंदौली जनपद ओडीएफ घोषित हो सकता है। इस गांव के सभी घरों में शौचालय बनवाया गया। जो लोग सक्षम थे उन्होंने अपने पैसे से शौचालय बनवाया और असमर्थ लोगों को जिला प्रशासन की मदद मिली।

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इस उपलब्धि पर गांव के प्रधान गायत्री देवी को सम्मानित किया गया। इस पर ग्राम प्रधान ने कहा कि उनका गांव ओडीएफ घोषित हुआ। इससे सिर्फ वही नहीं पूरा गांव के लिए सम्मान की बात है। ग्राम प्रधान ने ये भी बताया दीपवाली का त्योहार विजय का त्योहार है और आज हम गांववालों ने खुले में शौच और गंदगी पर विजय पाई है। इसलिए इस खुशी के मौके पर पूरा गांव 8 से 10 हजार दीयों से सजाया गया है और गांव में दीपावली जैसा माहौल है।

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