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आज भी भारत में रहते हैं महिषासुर के वंशज, दुर्गा पूजा के दौरान मनाते हैं शोक

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Published on 4 Oct 2016 1:33 AM GMT

आज भी भारत में रहते हैं महिषासुर के वंशज, दुर्गा पूजा के दौरान मनाते हैं शोक
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महिषासुर देवी दुर्गा के हाथों महिषासुर के वध की पेंटिंग

कोलकाताः देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्ध कितने साल पहले हुआ, ये किसी को नहीं पता। फिर भी आपको ये जानकर अचरज होगा कि देवी दुर्गा के हाथों मारे गए सबसे ताकतवर असुर के वंशज आज भी भारत में रहते हैं। खुद को असुर राज का खानदानी बताने वाले ये लोग शारदीय नवरात्रि के दस दिन शोक मनाते हैं।

आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, कहां रहते हैं महिषासुर के वंशज...

महिषासुर असुर समुदाय के पुरुष

कहां रहते हैं महिषासुर के वंशज?

खुद को महिषासुर का वंशज बताने वाले असुर समुदाय के कम ही लोग हैं। ये बिहार, झारखंड, असम और उत्तरी बंगाल में रहते हैं। नवरात्रि के दस दिन तक महिषासुर की याद में शोक मनाने वाले ये लोग देवी दुर्गा की प्रतिमा को भी कभी नहीं देखते। ये महिषासुर को 'हुदुर दुर्गा' कहते हैं। जो संथाली में महिषासुर का नाम है। साथ ही ये लोग किसी भी देवी-देवता की पूजा भी नहीं करते हैं।

आगे की स्लाइड में पढ़िए, किस तरह मनाते हैं शोक...

महिषासुर असुर समुदाय के बच्चे और युवा

किस तरह मनाते हैं शोक?

असुर समुदाय की सुषमा के मुताबिक दुर्गा ने हमारे राजा और बलशाली महिषासुर की हत्या की थी। इसी तरह रावण को भी ये लोग आराध्य मानते हैं और इसी वजह से दशहरा के दिन भी शोक में डूबे रहते हैं। शारदीय नवरात्रि के दसों दिन ये अपनी नाभि, नाक और छाती पर करंज का तेल लगाते हैं और अपने पूर्वजों को याद करते हैं।

आगे की स्लाइड में पढ़िए, कौन तोड़ेगा असुरों का रिवाज...

महिषासुर सुषमा असुर की फाइल फोटो

सुषमा तोड़ेंगी रिवाज

झारखंड के गुमला में रहने वाली सुषमा ने इस साल असुर समुदाय के इस रिवाज को तोड़ने का फैसला किया है। कोलकाता के फूलबागान में होने वाली दुर्गापूजा में वह जाएंगी और पूजा का उद्घाटन भी उन्हीं से कराया जाएगा। उन्होंने रिवाज तोड़ने के बारे में बताया कि समुदाय के बच्चों को स्कूलों और कॉलेजों में बेइज्जत होना पड़ता है। लोग उन्हें राक्षस कहते हैं। सुषमा का कहना है कि मैं पूजा में जाकर दिखाना चाहती हूं कि हम भी इंसान हैं।

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