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आगरा में हो रही बंदरों की नसबंदी, लेप्रोस्कोपी का लिया जा रहा सहारा

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AdminBy Admin

Published on 11 March 2016 5:05 PM GMT

आगरा में हो रही बंदरों की नसबंदी, लेप्रोस्कोपी का लिया जा रहा सहारा
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आगरा: आगरा में बंदरों की बढ़ती संख्या से आगरावासी खासे परेशान हैं। इससे निजात पाने के लिए बंदरों की नसबंदी की जा रही है।

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरुआत

-साइंटिफिक तरीके से बंदरों की नसबंदी की जा रही है।

-इससे बंदरों को किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होगी।

-इसकी शुरुआत एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जा रही है।

-प्रयोग सफल होने पर इसका दायरा बढ़ाया जाएगा।

-प्रोजेक्ट का मकसद अधिक से अधिक मोहल्लों में बंदरों की बढ़ती आबादी पर लगाम लगाना है।

-जिला प्रशासन की और से उठाया जा रहा कदम।

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अन्य कदम भी उठाए जा रहे

-इस प्रोजेक्ट का व्यापक असर न होने पर बंदरों को पकड़कर अन्यत्र छुड़वाने की कार्रवाई की जाएगी।

-आगरा विकास प्राधिकरण के साथ वन्य जीव संरक्षण एसओएस संस्था ने उठाया है कदम।

-इसी क्रम में तीन अलग-अलग स्थानों पर रखे गए पिंजरों में अब तक 55 बंदर पकड़े गए।

-बंदरों की लेप्रोस्कोपी के लिए वेटनरी डॉक्टरों टीम बनाई गई है।

  एनिमल एम्बुलेंस एनिमल एम्बुलेंस

क्या बताया वाइल्ड लाइफ के डॉक्टर ने ?

-वाइल्ड लाइफ एसओएस के डॉक्टर बैजू ने बताया कि 55 बंदर पकड़े गए थे।

-उसमें से 15 मादा बंदरिया थीं, जो 2-3 माह के बच्चे की मां होने के बावजूद गर्भवती निकलीं, जो हैरानी की बात है।

-यदि बंदर पकड़ने का निर्णय नहीं लिया जाता तो इनकी संख्या एक साल में तिगुनी हो जाएगी।

-पहले फेज में 500 बंदर पकड़ने की अनुमति मिली थी, उसमें एक ही दिन में 55 पकड़े गए।

-बंदरों की सीमित संख्या से आम लोगों को कम नुकसान पहुंचेगा, जो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।

आगरा में बीच रास्ते कुछ यूं दिख जाते हैं आवारा बंदर आगरा में बीच रास्ते कुछ यूं दिख जाते हैं आवारा बंदर

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