आई नई महामारी: अब इस देश में स्वाइन फीवर का कहर, मौतों से कांप उठा चीन

रॉयटर्स कंपनी की चीफ साइंस ऑफिसर यान झिचुन (Yan Xichun) ने कहा है कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर के स्ट्रेन से संक्रमित सुअर मर नहीं रहे हैं। ये उस तरह का फीवर नहीं है जो साल 2018 और 2019 चीन में फैला था।

Published by Chitra Singh Published: January 22, 2021 | 5:10 pm
African swine fever

आई नई महामारी: अब इस देश में स्वाइन फीवर का कहर, मौतों से कांप उठा चीन (photo- social media)

नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बाद चीन में एक नये वायरस ने जन्म लिया है। ये वायरस चीन के सुअरों को संक्रमित कर रहा है। इस नये वायरस का नाम अफ्रीकन स्वाइन फीवर (African swine fever) बताया जा रहा है। चीन में फैले इस नए स्ट्रेन की वजह से 1000 से अधिक सुअर संक्रमिल हो चुके हैं।

अफ्रीकन स्वाइन फीवर

चीनी कंपनी न्यू होप लिउही (New Hope Liuhi) देश की चौथी सबसे बड़ी पोर्क (Pork) यानी सुअर मांस विक्रेता कंपनी है। इस कंपनी ने अफ्रीकन स्वाइन फीवर (African swine fever) को लेकर कहा है कि उनके पास 1000 सुअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के दो नए स्ट्रेन मिले हैं। स्वाइन फीवर (swine fever) के कारण सुअर बेतरतीब तरीके से मोटे हो रहे हैं।

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संक्रमण के कारण सुअर के बच्चे हो रहे कमजोर

इस अफ्रीकन स्वाइन फीवर (African swine fever) का केस सामने आने के बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बिना लाइसेंस वाली वैक्सीन सुअरों को लगाने की वजह से यह वायरस फैला है। वहीं रॉयटर्स कंपनी की चीफ साइंस ऑफिसर यान झिचुन (Yan Xichun) ने कहा है कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर के स्ट्रेन से संक्रमित सुअर मर नहीं रहे हैं। ये उस तरह का फीवर नहीं है जो साल 2018 और 2019 चीन में फैला था। यान झिचुन (Yan Xichun) के अनुसार, अफ्रीकन स्वाइन फीवर (African swine fever) के संक्रमण फैलने के कारण सुअरों के बच्चे कमजोर पैदा हो रहे है।

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स्वाइन फीवर पोर्क उत्पादक डरे

बताते चलें कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर (African swine fever) के भय के कारण कई पोर्क (Pork) कंपनियों ने अपने सुअरों को मार दिया है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। वहीं जानकार बता रहे हैं कि सुअरों में नया स्ट्रेन तेजी से फैल सकता है। स्वाइन फीवर (African swine fever) से पोर्क (Pork) उत्पादक डरे हुए हैं कि कहीं उन्हें एक बार फिर बड़े नुकसान का सामना न करना पड़े, क्योंकि दो साल पहले 40 करोड़ सुअरों में से करीब आधे को खत्म कर दिया था।

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