अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर की उत्तर कोरिया को घेरने की तैयारी

Published by September 15, 2017 | 1:28 pm
उत्तर कोरिया के एक सैन्य अड्डे पर सहयोगियों के साथ किम जोंग उन

उत्तर कोरिया के एक सैन्य अड्डे पर सहयोगियों के साथ किम जोंग उन

वाशिंगटन : अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर कोरिया की घेरेबंदी की पूरी तैयारी कर ली है। अमेरिका की कोशिशों के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से उत्तर कोरिया पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन प्रतिबंधों से उत्तर कोरिया के बड़े निर्यातों को निशाना बनाने के साथ ही उसे तेल की आपूर्ति में 30 फीसदी की कटौती की जाएगी।

अमेरिका के प्रस्ताव को 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद ने इसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया को सैन्य कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों पर उत्तर कोरिया ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। उत्तर कोरिया ने अमेरिका को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि उसे इन प्रतिबंधों की कीमत चुकानी होगी। इन प्रतिबंधों के बाद अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनातनी और बढ़ गई है।

ट्रंप ने कहा-सैन्य कार्रवाई भी है विकल्प
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण को लेकर कड़ा रुख अपनाए हुए हैं। ट्रंप ने इशारों इशारों में साफ कर दिया है कि उत्तर कोरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई उनके लिए एक विकल्प है। कुवैत के अमीर सबा अल-अहमद अल-जबर अल-सबा के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई निश्चित तौर पर एक विकल्प बना रहेगा।

ट्रम्प ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी सेना अब कहीं अधिक ताकतवर है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि हमें उत्तर कोरिया पर इसका इस्तेमाल करने की नौबत नहीं आएगी। अगर हम उत्तर कोरिया पर इसका इस्तेमाल करते हैं तो यह उसके लिए बहुत बुरा दिन होगा। उन्होंने कहा कि हो सकता है हमें किसी के साथ बातचीत का मौका मिले, लेकिन मैं बातचीत नहीं करने जा रहा हूं। पिछले प्रशासन के विपरीत मैं उनके बारे में बात नहीं करता हूं। मेरा मानना है कि उत्तर कोरिया गलत रास्ते पर चल रहा है और उस पर अंकुश लगाना होगा।

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उत्तर कोरिया को सही रास्ते पर लाना है मकसद
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों को बड़ी विजय बताया है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने कहा कि अमेरिका दुनिया को यह बताना चाहता है कि हम कभी परमाणु हथियारों से लैस उत्तर कोरिया को स्वीकार नहीं करेंगे। सुरक्षा परिषद की राय है कि अगर उत्तर कोरिया ने अपना परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं किया तो उसे रोकने के लिए परिषद खुद कदम उठाएगी।

हेली ने कहा कि हमारी कोशिश है कि उत्तर कोरिया सही रास्ते पर चले। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रमों को ईंधन एवं धन मुहैया करवाने वाले साधनों को निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार बनाने और वितरित करने में तेल की मुख्य भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव के तहत गैस, डीजल और भारी ईंधन तेल में 55 प्रतिशत तक कटौती करने से उत्तर कोरिया को मिलने वाले तेल में 30 प्रतिशत तक की कमी आएगी। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया पर लगाए ये अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध हैं।

उत्तर कोरिया ने दी अमेरिका को चेतावनी
सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध लगाने के बाद उत्तर कोरिया बौखला गया है। उत्तर कोरिया ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की वजह से ये प्रतिबंध लगाए गए हैं और उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि उत्तर कोरिया अमेरिका के कदमों पर नजर रख रहा है। उसने चेतावनी दी कि वह खुद जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैयार और इच्छुक है।

बयान में कहा गया है कि अमेरिका उत्तर कोरिया के अपनी रक्षा के लिए उठाए गए वैध कदमों को बहाना बनाकर उसका दम घोटना चाहता है। इससे पूर्व उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन ने देश के छठे परमाणु परीक्षण को एक बड़ी जीत करार देते हुए परीक्षण से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों की सराहना की थी। उत्तरी कोरिया की सेना ने तीन सितम्बर को हाइड्रोजन बम के सफल परीक्षण का दावा किया था। किम ने कहा कि परमाणु परीक्षण उनके देश की बड़ी कामयाबी है जिसे देश के लोगों ने अपने खून की कीमत पर हासिल किया है। किम ने अमेरिका के जख्मों पर नमक छिड़कते हुए इसे अपने देश के वैज्ञानिकों का महान काम बताया है।

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उत्तर कोरिया ने मनाया जश्न
उत्तर कोरिया ने अब तक का अपना सबसे बड़ा परमाणु परीक्षण करने वाले वैज्ञानिकों के लिए सामूहिक जश्न का आयोजन किया जिसमें पटाखे फोड़े गए और विशाल रैली निकाली गई। वैज्ञानिक बसों में बैठकर निकले जिनकी एक झलक पाने के लिए नागरिक कतारों में खड़े रहे। हजारों प्रशंसक जश्न मनाने के लिए किम दो सुंग चौक में जुटे थे। कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार रैली में वक्ताओं ने कहा कि अगर अमेरिका और धोखेबाजों की भीड़ युद्ध प्रारंभ करती है तो उत्तर कोरिया की सेना बेहद निर्मम और शक्तिशाली हमला करके अमेरिकी साम्राज्यवादियों का अंत कर देगी। परमाणु परीक्षण की भले विश्वव्यापी निंदा की गयी हो मगर उत्तर कोरिया में इस कामयाबी पर जमकर जश्न मनाया गया।

रूस उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों के खिलाफ
दुनिया के तमाम बड़े देश परमाणु परीक्षण को लेकर उत्तर कोरिया के खिलाफ हैं, मगर रूस अभी भी उसके साथ मजबूती से खड़ा है। रूस के व्लादिवोस्तोक शहर में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेइ-इन के साथ बैठक के बाद रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने उत्तर कोरिया से बातचीत का आह्वान करते हुए कहा कि देश के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम का समाधान प्रतिबंध नहीं हैं। मून रूस से उत्तर कोरिया के खिलाफ और कड़े प्रतिबंधों का समर्थन करने की मांग कर रहे थे।

पुतिन ने बैठक के बाद कहा कि हमें उत्तर कोरिया को अलग-थलग नहीं करना चाहिए। तनाव बढ़ाने वाले कदमों से हर किसी को बचना चाहिए और संयम दिखाना चाहिए। दूसरी ओर मून का कहना था कि अगर उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को नहीं रोका गया तो स्थिति काबू से बाहर हो सकती है। मून ने कहा कि मेरा और राष्ट्रपति पुतिन का मानना है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम की दिशा में गलत तरीके से आगे बढ़ रहा है और सबसे बड़ा मुद्दा कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम करना है। उदारवादी रुख वाले मून ने मई में पद संभाला था और उन्होंने शुरुआत में उत्तर कोरिया को लेकर कूटनीतिक रवैया रखने को प्राथमिकता दी थी, लेकिन उत्तर कोरिया के हथियारों के परीक्षण जारी रहने के कारण उनकी सरकार ने अपना रुख कड़ा कर लिया है।

हाल के दिनों का सबसे बड़ा संकट
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतारेस का कहना है कि उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम को लेकर तनातनी हालिया वर्षों में दुनिया का सबसे खतरनाक संकट है और इसे लेकर वह गंभीर रूप से चिंतित हैं। एक फ्रांसीसी अखबार को दिए साक्षात्कार में गुतारेस ने कहा कि अब तक, हमने ऐसे युद्ध देखे हैं जो सोचे समझे निर्णय के बाद शुरू किए गए थे। लेकिन हम यह भी जानते हैं कि गंभीरता से विचार किए बिना काम करने के कारण बढ़े तनाव के कारण अन्य संघर्ष शुरू हुए। गुतारेस ने कहा कि ‘हमें यह उम्मीद करनी होगी कि इस खतरे की गंभीरता हमें बहुत देर होने से पहले तर्क के मार्ग पर ले जाएगी। सबसे बड़ा सवाल उत्तर कोरिया को परमाणु एवं बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से रोकना है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का सम्मान करना है। हमें हर कीमत पर सुरक्षा परिषद की एकता को बनाए रखना है क्योंकि यह एकमात्र माध्यम है जिसके जरिए सफलता की उम्मीद के साथ राजनयिक पहल की जा सकती है।

जर्मनी कूटनीतिक मदद के लिए तैयार
इस बीच जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा कि जर्मनी ईरान के साथ हुए समझौते के तर्ज पर उत्तर कोरियाई परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करने के लिए कूटनीतिक रूप से मदद करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान और छह महाशक्तियों के बीच 2015 में एक समझौता हुआ था। इसके तहत तेहरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को वापस लेना था और इससे संबंधित जांच के लिये अपने परमाणु केंद्रों के दरवाजे खोलने थे, जिसके बाद ईरान से कुछ प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं। कूटनीति के हिसाब से यह महत्वपूर्ण कदम था। उत्तर कोरिया को लेकर पैदा हुए संकट में मैं इस तरह के समझौते की कल्पना कर सकती हूं। यूरोप और खासतौर पर जर्मनी इसमें सक्रिय योगदान के लिए तैयार है।

चीन ने बंद की आपात निगरानी
इस बीच चीन ने कहा है कि उसने अपनी सीमा से लगे इलाके में रेडियोधर्मी विकिरण में कोई असामान्य वृद्धि नहीं पाई है और उत्तर कोरियाई परमाणु परीक्षण के बाद होने वाली आपात निगरानी बंद कर दी गई है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने खबर दी है कि आठ दिन की निगरानी के बाद कोई भी असामन्य परिणाम नजर नहीं आया। इसमें बताया गया है कि उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण से चीन के पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और आपातकालीन निगरानी की शर्तें पूरी होने के बाद इसे बंद किया गया है। शुरू में कुछ खबरों में कहा गया था कि कुछ इलाकों में विकिरण में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है।