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मरीजों से खान हॉस्पिटल में हो रहा खिलवाड़, स्वास्थ्य विभाग ने बताया फर्जी

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Published on 5 Sep 2017 5:12 AM GMT

मरीजों से खान हॉस्पिटल में हो रहा खिलवाड़, स्वास्थ्य विभाग ने बताया फर्जी
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शाहजहांपुर: जैसे-जैसे सूबे में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, वैसे ही फर्जी अस्पतालों का भी खुलासा हो रहा है। यूपी के शाहजहांपुर में स्वास्थ्य विभाग ने एक फर्जी अस्पताल का खुलासा किया है, जहां ऑपरेशन से लेकर हर गंभीर बीमारी का इलाज किया जा रहा था।

खास बात ये है कि ना ही डाक्टरों के पास कोई डिग्री है और न ही अस्पताल का रजिस्ट्रेशन। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग अस्पताल को सील करने और अस्पताल के कथित एमडी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।

ये है थाना सदर बाजार क्षेत्र के पुवायां रोड पर फर्जी तौर पर चल रहा डॉ. खान चेरिटेबल हॉस्पिटल। इस अस्पताल में डॉक्टर्स तो तैनात है, लेकिन ये जानकर आपको हैरानी होगी कि सभी डॉक्टर्स की डिग्रियां फर्जी है। यहां तक इस अस्पताल का कहीं भी कोई रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। लेकिन यहां मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां छोटी बीमारी से लेकर बड़े आपरेशन तक किए जा रहे हैं।

सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापेमारी की तो फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। अस्पताल में डॉक्टर्स के सभी प्रमाण पत्र और डिग्रियां फर्जी निकलीं। यहां जिस वक्त छापा मारा गया तो भी दर्जनों मरीजों का इलाज चल रहा था। बाहर और अंदर से देखकर ये कोई नहीं कह सकता था कि ये अस्पताल फर्जी भी हो सकता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के माने तो ये अस्पताल पूरी तरह से फर्जी है, जिसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

अस्पताल के फर्जी होने के खुलासे के बाद वहां मौजूद कथित डॉक्टर्स की हवाईयां उड़ गई। यहां न ही कोई असली डॉक्टर था और न ही कोई ट्रेंड कर्मचारी ही था। सब कुछ काम चलाऊ था। जब फर्जी डॉक्टर से सवाल किया गया तो वो खुद को अभी भी डॉक्टर बताने से नहीं चूक रहे और अपनी डिग्री को असली बता रहे हैं। डॉक्टर्स का कहना है ये अस्पताल और वो खुद फर्जी नहीं हैं। उन्होंने चार साल कॉलेज में रहकर पढ़ाई की है।

यूपी में करीब दस हजार लड़के हैं, जो ये काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि यहां जिसको ज्यादा जरूरत होती है, उसको बोतल उड़ाई जाती है। भारतीय चिकित्सा परिषद में मेरी रसीद कटी हुई है। उनका कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट मे मामला फाइनल हो जाएगा, तब हमें रजिस्ट्रेशन नंबर दे दिया जाएगा।

क्या है डिप्टी सीएमओ नरेश पाल का कहना

डिप्टी सीएमओ नरेश पाल ने बताया कि सूचना के बाद भी खान चैरिटेबल हॉस्पिटल चल रहा है, छापेमारी मे कुछ दवाएं मिली हैं, साथ ही मरीज भी भर्ती मिले हैं। जब उन्होंने अस्पताल का रजिस्ट्रेशन और डॉक्टर की डिग्री के बारे में पूछा तो न तो कुछ सही बता पाए और न ही डिग्री दिखा पाए। वो खुद कबूल रहे हैं कि अस्पताल फर्जी तरीके से चल रहा था। एक मेडिकल स्टोर पर भी फर्जी तरीके से खोल रखा था। उसके भी सही कागज नहीं दिखा पाए। आगे अगर कोई कागज नहीं दिखा पाते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पकड़ा गया ये फर्जी अस्पताल पिछले लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा था। यहां बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहा है कि आखिर इससे पहले स्वास्थ्य विभाग की नजरों से कैसे बचता रहा? चर्चा है कि ये फर्जी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के संरक्षण में ही चल रहा था। अब देखना ये है कि इलाज के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले इस फर्जी अस्पताल के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है?

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