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दशहरे के दिन खुलता है ये मंदिर, यहां विधि विधान से की जाती है रावण की पूजा

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Published on 11 Oct 2016 10:17 AM GMT

दशहरे के दिन खुलता है ये मंदिर, यहां विधि विधान से की जाती है रावण की पूजा
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कानपुरः अधर्म पर धर्म की और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक रावण का व्यक्तित्व शायद ऐसा ही है। हम सरेआम रावण को दोषी मानते है और उसका पुतला जलाते है लेकिन क्या आपने सोचा है कि रावण का यही व्यक्तित्व उसकी पूजा भी कराता है। पूरे देश में विजयादशमी में रावण का वध कर चाहे उसका पुतला जलाया जाता हो, लेकिन यूपी के कानपुर में एक ऐसी जगह है जहां दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। इतना ही नहीं यहां पूजा करने के लिए रावण का मंदिर भी मौजूद है। इसे केवल दशहरे के मौके पर ही खोला जाता है।

आगे की स्लाइड में पढ़ें क्यों की जाती है रावण की पूजा...

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कराया जाता है दूध से स्नान

रावण का ये मंदिर उद्दोग नगरी कानपुर में मौजूद है। विजयदशमी के दिन इस मंदिर में पूरे विधिविधान से रावण का दुग्ध स्नान और अभिषेक कर श्रृंगार किया जाता है। उसके बाद पूजन के साथ रावण की स्तुति कर आरती की जाती है।

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रावण के पूजन का है यहां विधान

ब्रह्म बाण नाभि में लगने के बाद और रावण के धराशाही होने के बीच कालचक्र ने जो रचना की उसने रावण को पूजने योग्य बना दिया। यह वह समय था जब राम ने लक्ष्मण से कहा था कि रावण के पैरो की तरफ खड़े हो कर सम्मान पूर्वक नीति ज्ञान की शिक्षा ग्रहण करो। क्योंकि धरातल पर न कभी रावण के जैसा कोई ज्ञानी पैदा हुआ है और न कभी होगा। रावण का यही स्वरूप पूजनीय है और इसी स्वरुप को ध्यान में रखकर कानपुर में रावण के पूजन का विधान है।

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साल में एक बार खुलता है ये मंदिर

1868 में बने इस मंदिर में तब से लेकर आज तक निरंतर रावण की पूजा होती है। लोग हर साल इस मंदिर के खुलने का इंतजार करते है। मंदिर खुलने पर यहां पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना के साथ रावण की आरती की जाती है। कानपुर में मौजूद रावण के इस मंदिर के बारे में यह भी मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने से लोगों के मन की मुरादें भी पूरी होती है। लोग इसी लिए यहां दशहरे पर रावण की विशेष पूजा करते हैं। यहां दशहरे के दिन ही रावण का जन्मदिन भी मनाया जाता है। बहुत कम लोग जानते होंगे कि रावण को जिस दिन राम के हाथों मोक्ष मिला उसी दिन रावण पैदा भी हुआ था।

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क्या कहते हैं मंदिर के प्रबंधक केके तिवारी?

यह मंदिर साल में एक बार ही खुलता है। इसका भक्तों को बेसब्री से इंतजार रहता है और मंदिर खुलने के बाद दूध से स्नान करा कर पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है।

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