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PM मोदी ने शिंजो को भेंट की ये खास दरियां, जानिए कहां और किसने किए तैयार

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 29 Oct 2018 5:47 AM GMT

PM मोदी ने शिंजो को भेंट की ये खास दरियां, जानिए कहां और किसने किए तैयार
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के दो दिवसीय दौरे पर हैं। मोदी ने यामांशी प्रांत में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से मुलाकात की। होटल माउंट फूजी में मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने शिंजो आबे को गिफ्ट दिया।

गिफ्ट में मोदी ने शिंजो आबे को यूपी के मिर्जापुर जिले में निर्मित खास किस्म की दरियां और गुजरात में बने दो कटोरे भेंट किये। आइये जानते है ये दरियां यूपी के किस जिले में बनी है और इस दरी की खासियतें क्या है।

मिर्जापुर के बुनकरों ने तैयार की हैं ये खास दरियां

पीएम मोदी ने शिंजो आबे को जो दरियां भेंट की है। वह यूपी के मिर्जापुर जिले में निर्मित की गई है। इसे यहां के बुनकरों ने अंतिम रूप प्रदान किया है। इन दरियों और कटोरे को अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की निगरानी में बनाया गया है।

इसे फ्लोरल और खास चौकोर की नक्काशी से बनाया गया है। इसमें नीला, लाल और हल्दी की तरह पीले रंग का इस्तेमाल करके सदियों पुरानी भारतीय वस्त्रों की संस्कृति को दर्शाने की कोशिश की गई है।

ये है मिर्जापुरी दरियों की खासियतें

मिर्जापुरी दरियों की खास बात ये है कि ये आकार में काफी बड़े और वजन में काफी हल्के होते है। इनके उपर चित्रकारी का बेजोड़ नमूना देखने को मिलता है। जो और कहीं की निर्मित की गई दरियों में बहुत कम ही दिखाई देती है। चाहें कितनी बार भी इसकी धुलाई कर लें। लेकिन इनका रंग कभी भी हल्का नहीं पड़ता है। दूसरे शहरों में तैयार होने वाले दरियों से ज्यादा वक्त मिर्जापुरी दरियों को बनाने में लगता है।

मिर्जापुर में कुटीर उधोग का हाल

यूपी के मिर्जापुर शहर का नाम पहले पीतल बर्तन उद्योग के लिए पूरे सूबे में प्रमुखता के साथ लिया जाता था। इसके अलावा मिर्जापुर की कालीन और दरी, चुनार के चीनी मिट्टी के बर्तनों की भी अपनी विशिष्ट पहचान थी।

जबकि देश आजाद होने के बाद काटन मिल, कंबल कारखाना, कछवां में कृषि यंत्र बनाने की इकाई स्थापित की गई।

लेकिन उपेक्षात्मक सरकारी नीतियों के चलते धीरे-धीरे काटन मिल, कंबल कारखाना बंद हो गए और कछवां का कृषि संयत्र अपने अंत की ओर अग्रसर है। जबकि पीतल बर्तन उद्योग आखिरी सांसें गिन रहा है। जिसके चलते जनपद के युवाओं को यहां काम-धंधा मिलना बंद हो गया और मजबूरी में उन्हें घर-द्वार छोड़ कर महानगरों का रुख करना पड़ा।

किसी भी दल ने नहीं लिया संज्ञान

मिर्जापुर के लोगों का कहना है कि यहां शासन और प्रशासन की उदासीनता के चलते कुटीर उधोग धीरे –धीरे बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। चुनाव आते ही सभी दल यहां वोट मांगने के लिए चलते आते है लेकिन किसी ने भी इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनाया। धीरे धीरे-धीरे काटन मिल, कंबल कारखाना बंद हो गए लेकिन किसी भी नेता ने रोटी रोटी के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किया।

इसका नतीजा ये हुआ कि कई कारखाने बंद हो गये और कुछ बंद होने के कगार पर पहुंच गये है। लोगों को न तो उनके मुताबिक काम यहां मिलता है और न ही मजदूरी। इसलिए कारीगर अब यहां से शहरों की तरफ पलायन कर रहे है।

पीएम मोदी ने गिफ्ट में दिए ये खास कटोरे

पीएम मोदी ने शिंजो आबे को दो कटोरे भी भेंट किए हैं। ये दोनों कटोरे गुलाबी और पीले स्फटिक से बने हैं। गुलाबी और पीला स्फटिक राजस्थान में पाया जाता है। इन दोनों कटोरों को गुजरात के खंभात क्षेत्र के मशहूर कारीगर शब्बीर हुसैन इब्राहिम भाई शेख ने बनाया है। इन दोनों कटोरों को हाथ से बनाया गया है। इन्हें बनाने में किसी भी मशीन का प्रयोग नहीं किया गया है।

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