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इस दिव्‍यांग स्‍टूडेंट को पीएम ने दिया मेडल, जानिए संघर्ष भरी कहानी

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AdminBy Admin

Published on 20 Feb 2016 2:43 PM GMT

इस दिव्‍यांग स्‍टूडेंट को पीएम ने दिया मेडल, जानिए संघर्ष भरी कहानी
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वाराणसी: पीएम नरेंद्र मोदी सोमवार को बीएचयू के दीक्षांत समारोह में टॉपर दिव्यांग स्‍टूडेंट पंखुड़ी जैन के साथ मंच साझा किया। मोदी ने उसे अपने हाथों से गोल्ड मेडल दिया। बीएचयू के कुलपति जीसी त्रिपाठी ने शनिवार को पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी। पंखुड़ी को जब ये पता चला तो उनके साथ पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। पंखुड़ी, उसके पिता राकेश जैन और मां अर्चना ने कहा कि यह सुन बहुत अच्छा लग रहा था। बचपन से यहां तक का सफर पंखुडी के लिए बेहद संघर्षपूर्ण और उपेक्षा भरा रहा है।

जानिये पंखुड़ी की कहानी

पंखुड़ी दो बहन हैं और दोनों ही दिब्यांग हैं। माता-पिता ने उनको पढ़ाने और इलाज में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। इसका नतीजा अब सामने आ रहा है। दोनों बेटियों में से एक पंखुड़ी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बीएससी ऑनर्स (गणित) में 9.38 सीजीपीए के साथ चांसलर्स मेडल, महाराजा डॉ. विभूति नारायण मेडल और बीएचयू मेडल पाने का हक हासिल किया। पंखुडी के इस जज्बे और उपलब्धि को देखकर बीएचयू की एकडमिक काउंसिल ने 22 फरवरी को शताब्दी वर्ष दीक्षांत समारोह के मंच पर पीएम मोदी, मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी, चांसलर डॉ. कर्ण सिंह के साथ बिठाने का फैसला किया।

शनिवार को था पंखुड़ी का जन्‍मदिन

कुलपति ने शनिवार को इसकी जानकारी दी तो पंखुड़ी के घर में दो दो खुशियों का जश्न मनाया गया। संयोगवश शनिवार को पंखुड़ी का जन्मदिन भी है। पंखुड़ी के पिता इसे आईएएस बनाना चाहते थे लेकिन शारीरिक अपंगता के कारण ये सपना छोड़ दिया। बेटी वैज्ञानिक बन कर नासा से जुड़ना चाहती थी पर टीचर्स ने कहा उसमें भी दिक्कत आएगी। ऐसे में अब इन दोनों का सपना पूरा नहीं हो सका है। इसके बावजूद पिता और बेटी ने हार नही मानी है। पंखुड़ी कहती है वह ऐसा कुछ करना चाहती हैं जिससे माता पिता को उस पर गर्व हो। पंखुडी अब शिक्षक बन कर अपने जैसी स्‍टूडेंट्स को शिक्षित करना चाहती हैं।

बीएचयू से पूरी हुई शिक्षा

महामना की बगिया से ही पंखुड़ी ने अपनी पूरी पढ़ाई की। सेंट्रल हिंदू गर्ल्स कॉलेज से हाई स्कूल और इंटर किया। हाईस्कूल में 9.6 सीजीपीए और इंटर में 91.3 फीसदी नंबर हासिल किए। अब बीएससी में 9.38 सीजीपीए है। वह इससे थोड़ा मायूस है। उसने सोचा था कि बीएससी में ओवरऑल टॉप करेगी पर ऐसा नहीं हो सका। फिर भी जो मिला उससे संतुष्ट है। हाईस्कूल से बीएससी तक 90 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल करने वाली पंखुड़ी कहती हैं कि सफलता के लिए घंटों पढ़ना जरूरी नहीं। बस नियमित पढ़ें ध्यानपूर्वक पढ़ें और फोकस्ड स्टडी करें। मैं तो कॉलेज के अलावा रोजाना दो घंटे ही घर पर पढ़ती थी।

पंखुड़ी को है एचएसएमएन टाइप थ्री डिजीज

पंखुड़ी बताती है कि उसे एचएसएमएन टाइप थ्री डिजीज है और यह जन्म से है । मुझे ही नहीं मेरी बहन हर्षिता भी इसी बिमारी से पीड़ित है। ये एक तरह की न्यूरो प्रॉबल्म है। इसमें दोनों पैरों में काफी कमजोरी होती है। घर में तो चल लेती हूं पर बाहर बिना सहारे या बिना व्हील चेयर के नहीं चल पाती। पापा-मम्मा ने मुंबई में इस रोग के विशेषज्ञ को दिखाया था, उनकी दवा चल रही है। ज्यादा मेहनत करने पर कमजोरी बढ़ जाती है तब बिल्कुल भी नहीं चल पाती। कभी-कभी तो हाथ भी काम नहीं करते।

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