जल्दी जल्दी देखिये! ऐसे होते हैं भगवान् , तैयार हुआ स्केच

क्या आप कभी भगवान् को देखें हैं, पौराणिक कथाओं के अनुसार सनातन धर्म में 33 करोड़ देवी देवता है, क्या आप जानते हैं की ईश्वर कैसा दिखता है, कैसा होता है? लेकिन अगर सभी को मिलकर जो एक ईश्वर है अगर हमें उसका चेहरा देखना हो कैसे देखेंगे?

नई दिल्ली: क्या आप कभी भगवान् को देखें हैं, पौराणिक कथाओं के अनुसार सनातन धर्म में 33 करोड़ देवी देवता है, क्या आप जानते हैं की ईश्वर कैसा दिखता है, कैसा होता है? लेकिन अगर सभी को मिलकर जो एक ईश्वर है अगर हमें उसका चेहरा देखना हो कैसे देखेंगे?

दरअसल, अमेरीकी वैज्ञानिकों ने ईश्वर का चेहरा खोज लिया है, उनका कहना है की ईश्वर का चेहरा किसी युवा और खूबसूरत स्त्री जैसा है, बताया जा रहा है कि अमेरीकी वैज्ञानिकों ने बहुत सारे अमरीकी चेहरों पर रिसर्च करके ईश्वर का एक स्केच तैयार किया है। रोचक तथ्य यह है, धार्मिक परंपराओ को मानने वाले भारत में अभी ऐसा रिसर्च नहीं हुआ है।

अधिक जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरी रिसर्च पत्रिका पीएलओएस वन में प्रकाशित कि गयी थी।

भगवान् हैं जवान, यूनिवर्सिटी ऑफ़ नार्थ कैलिफ़ोर्निया…

खास बात यह है कि अमेरीकी ईसाईयों ने ईश्वर के चेहरे को बूढा नहीं बल्कि जवान बताया और उसी आधार पर रिसर्च की गई, वैज्ञानिकों और मनोवैज्ञानिकों ने 511 अमरीकी ईसाईयों की मदद से यूनिवर्सिटी ऑफ़ नार्थ कैलिफ़ोर्निया के चेपल हिल पर यह चित्र बनाया।

भगवान देखने में ऐसे…

बताते चलें कि अध्ययन में भाग लेने वालों ने लगभग हजारो लोगों ने रूप अलग-अलग चेहरे जोड़े और चुना कि प्रत्येक जोड़े से कौन सा चेहरा वैसे दिखाई देता है जैसे कि उन्होंने भगवान को प्रकट करने की कल्पना की।

इसके बाद सभी चयनित चेहरों को संयोजित करके, शोधकर्ताओं ने एक समग्र ‘ईश्वर का चेहरा’ इकट्ठा किया जो दर्शाता था कि प्रत्येक व्यक्ति ने भगवान को कैसे प्रकट किया।

शोधकर्ताओं ने पाया, माइकल एंजेलो से मॉन्टी पायथन…

उनके परिणाम आश्चर्यजनक थे, माइकल एंजेलो से मॉन्टी पायथन तक, भगवान के चित्रों ने लगभग हमेशा उन्हें पुराने और विशाल सफेद दाढ़ी वाले कोकेशियान आदमी के रूप में दिखाया है लेकिन शोधकर्ताओं ने पाया कि कई ईसाईयों ने भगवान को छोटी, अधिक स्त्री, और कम कोकेशियान के रूप में देखा।

वास्तव में, भगवान की लोगों की धारणाओं ने आंशिक रूप से अपने राजनीतिक विचारधारा पर भरोसा किया।

लिबरल और कंज़रवेटिव ने ऐसा किया सोध…

शोधकर्ता लिबरल ने भगवान् को अधिक स्त्री, छोटे, और अधिक प्यार भरे रूप में देखा, तो वहीं कंज़रवेटिव ने शोध में पाया कि भगवान को कोकेशियान और उदारवादियों से अधिक शक्तिशाली हैं।

मुख्य लेखक का ये रहा सुझाव…

इस अध्ययन के मुख्य लेखक जोशुआ कॉनराड जैक्सन ने सुझाव देते हुए कहा कि ये पूर्वाग्रह उस तरह के समाजों से उभरे हैं जिन्हें उदारवादी और रूढ़िवादी चाहते हैं।

शोध से चला पता…

इसके साथ ही बताते चलें कि पिछले शोध से यह बात सामने आया है कि उदारवादियों से ज़्यादा एक सुव्यवस्थित समाज में रहने के लिए रूढ़िवादी चाह रखते हैं, और चाहते हैं कि शक्तिशाली भगवान द्वारा दुनिया चलाई जाए।

दूसरी तरफ, उदारवादी सहिष्णु समाज में रहना चाहते हैं, और सोचते हैं की एक प्रेम से भरे भगवान द्वारा बेहतर विनियमित किया जाएगा, लोगों की धारणाएं भी अपनी जनसांख्यिकीय विशेषताओं से संबंधित हैं। छोटे कद काठी के लोग एक छोटे से दिखने वाले भगवान में विश्वास करते थे।

भगवान दिखने में आकर्षक…

जो लोग शारीरिक रूप से आकर्षक थे वे अधिक शारीरिक रूप से आकर्षक भगवान में विश्वास करते हैं। और अफ्रीकी अमेरिकियों ने एक ऐसे भगवान में विश्वास किया जो काकेशियन लोगों की तुलना में अधिक अफ्रीकी अमेरिकी दिखता हो।