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शाह मस्ताना जयंती: सिरसा से दूर वीरान जगह पर बनाया था ‘डेरा’, ऐसे आया विवादों में

आज दुनिया भर में डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायी है। पूरी दुनिया में इसकी अनगिनत शाखाएं संचालित हो रही है। राम रहीम पर साध्वी की ओर से यौन शोषण का आरोप लगाये जाने के बाद से डेरा सच्चा सौदा विवादों में आ गया था।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 22 Nov 2018 6:05 AM GMT

शाह मस्ताना जयंती: सिरसा से दूर वीरान जगह पर बनाया था ‘डेरा’, ऐसे आया विवादों में
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नई दिल्ली: शाह मस्ताना महाराज सोशल मीडिया में आज टॉप ट्रेंडिंग में बने हुए है। 23 नवम्बर को उनकी जयंती मनाई जाएगी। वे किसी परिचय के मोहताज नहीं है। इन्होने ही सबसे पहले डेरे की स्थापना की थी। जिसे आज डेरा सच्चा के नाम से जाना जाता है। बाद में बाबा राम रहीम को डेरे का प्रमुख घोषित किया गया था।

आज दुनिया भर में डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायी है। पूरी दुनिया में इसकी अनगिनत शाखाएं संचालित हो रही है। राम रहीम पर साध्वी के यौन शोषण का आरोप लगने के बाद से डेरा सच्चा सौदा विवादों में आ गया था। तब से लगातार इसके अनुयायियों की संख्या में गिरावट आ रही है। Newstrack.com आज आपको शाह जी मस्तान महराज और डेरा सच्चा सौदा से जुड़े विवादों के बारें में बता रहा है।

शाह मस्ताना महाराज के बारें में जान लें ये जरुरी बातें

शाह मस्ताना महाराज ने 1948 में सिरसा से दूर बंजर और वीरान जगह पर सबसे पहले डेरे की स्थापना की थी। उन्होंने इस जगह पर काफी दिनों तक बैठकर तप किया था। जिसे बाद में दुनिया भर में डेरा सच्चा सौदा के नाम से एक नई पहचान मिली। शाह मस्ताना ने 1948 से लेकर 1960 तक डेरा सच्चा सौदा की गद्दी संभाली थी। बाद में उन्होंने ही गुरमीत राम रहीम को गद्दी सौंप दी थी।

शाह महाराज ने 1990 में जब राम रहीम को डेरा प्रमुख की गद्दी सौंपी थी तब राम रहीम की उम्र 23 साल थी। उन्होंने अनुयायियों के सामने इस बात की घोषणा की गई थी कि गुरमीत राम रहीम 60 वर्ष तक गद्दी पर विराजमान रहेंगे। यानी कि बाबा करीब 83 साल की उम्र तक गद्दी पर राज करेंगे।

1990 में राम रहीम ने संभाली डेरे की गद्दी

वर्ष 1990 के दौरान गुरमीत राम रहीम ने डेरे की गद्दी संभाली। डेरा संभालते ही पहला काम, डेरे के विस्तार को गति देने के रूप में किया। डेरे को प्रोफेशनल तरीके से बढ़ाया। संस्था किसी भी राजनीतिक या व्यावसायिक संबंधों से अलग एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट सोयायटी होने का दावा करती है। इसके अलावा तीन विशेष अस्पताल और एक इंटरनैशनल आई बैंक भी है। रेवेन्यू रिकॉर्ड के अनुसार डेरे के पास डेरे के पास 700 एकड़ जमीन है। आमदनी के नाम पर डेरे के पास अनुयायियों का दिया गया दान था।

डेरा के पास साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति

एक अनुमान के मुताबिक देश और विदेश में साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति है। परिणाम यह है कि अकेले सिरसा का डेरा और आसपास ही 500 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम, बहुउद्देश्यीय अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, लघु उद्योग और खेती के लायक जमीन शामिल है। राम रहीम के समय में हरियाणा से ही 25 लाख अनुयायी बने।

डेरा का दुनिया भर में पांच करोड़ अनुयायी का दावा

दुनियाभर में डेरे के करीब पांच करोड़ अनुयायी होने का दावा भी किया जाता है। डेरा भारत से लेकर अमरीका तक फैला हुआ है। साथ ही देश और विदेश में भी डेरे को मजबूत किया गया। वर्ष 2012-13 के दौरान आयकर विभाग के अनुमान के मुताबिक गुरमीत राम रहीम की इन्कम करीब 30 करोड़ रुपए सालाना थी। इतनी कमाई के बावजूद वह एक रुपया भी टैक्स नहीं देते थे। तीन साल पहले तक करीब 16,44,833 रुपए प्रतिदिन आय थी।

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अनुयायियों के पैसे से 250 डेरे का सफर

राम रहीम ने डेरा प्रमुख बनने के बाद सब कुछ बदलकर रख दिया। डेरा सिर्फ धर्म का केंद्र न रहकर काप्र्रोरेट कंपनी की तरह काम करने लगा था। शहरों की प्रमुख सड़कों से सटी जमीन खरीदकर नामचर्चा घर बनाए गए। स्थानीय संगत ने खुद पैसे खर्च कर नामचर्चा घर तैयार किए और मलकीयत डेरे के नाम कर दी। ऐसे करीब 105 डेरे हरियाणा में हैं। एक डेरे के पास कम से कम एक करोड़ की लागत की जमीन है। देश और विदेश में ऐसे लगभग 250 डेरे हैं जिनके पास एक करोड़ से लेकर 50 करोड़ तक की जमीन है।

परमार्थ के नाम पर लोगों से बसूला जाता चंदा

परमार्थ के नाम पर डेरा समर्थक हर माह आमदनी से कुछ हिस्सा निकालते थे। समर्थक न सिर्फ पैसा देते हैं बल्कि नि:शुल्क सेवा के नाम पर अलग-अलग काम भी करते हैं। डेरोमें खेती का काम हो या फिर निर्माण कार्य, हर काम के लिए अनुयायी खुद को आगे कर देते थे। इस तरह से बहुत-सा खर्च बच जाता था। यहां से जो भी फसल पैदा होती थी, उसे भी अनुयायी खरीदते थे।

डेली यूज के उत्पादों से भी आमदनी हुई

साथ ही कुछ कंपनियां बनीं, जो अलग-अलग उत्पाद तैयार करती थी। इन कंपनियों से रसोई में काम आने वाले सामान के साथ-साथ खाने-पीने के उत्पाद तैयार होते थे। साथ ही ऐलोविरा जूस और इसी तरह के कई जूस भी तैयार किए जाते थे। यह सामान एम.एस.जी. के नाम से बेचा जाता था। इसी नाम से अलग-अलग शहरों में दुकानें भी खोली गई थीं।

शाह सतनाम ने 60 वर्ष तक गद्दी पर राज करने की की थी घोषणा

राम रहीम के जेल जाने के बाद से उसके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा छिड़ चुकी है। लेकिन डेरा सूत्रों की मानें तो उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। क्योंकि शाह सतनाम ने जब उन्हें 1990 में 23 साल की उम्र में गद्दी सौंपी थी, तो अनुयायियों के सामने इस बात की घोषणा की गई थी कि गुरमीत राम रहीम 60 वर्ष तक गद्दी पर विराजमान रहेंगे। यानी कि बाबा करीब 83 साल की उम्र तक गद्दी पर राज करेंगे।

उसके बाद राम रहीम ने अपना उत्तराधिकारी घोषित करना था। ऐसे में उनके उत्तराधिकारी को लेकर अनुयायियों में कोई चर्चा नहीं हो रही।

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क्या है डेरा सच्चा सौदा विवाद

डेरा सच्चा सौदा के आश्रम की एक साध्वी ने 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को गुमनाम लेटर भेजा था। इसमें साध्वी ने लिखा कि वह पंजाब की रहने वाली है और सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में 5 साल से रह रही है। डेरे में साध्वियों का यौन शोषण किया जा रहा है। लेटर में बठिंडा कुरुक्षेत्र की कुछ साध्वियों के यौन शोषण किए जाने की बात भी लिखी थी।

साध्वी ने इंसाफ की गुहार लगाई थी और यह भी कहा था कि मैं अपना नाम-पता लिखूंगी तो मुझे मार दिया जाएगा। इसकी किसी एजेंसी के माध्यम से जांच कराई जाए। हमारा डॉक्टरी मुआयना करवाना चाहिए, ताकि घरवालों को पता चले कि यहां क्या चल रहा है।

साध्वी के लेटर में लिखी बातों का कुछ हिस्सा बेहद आपत्तिजनक था।

इस गुमनाम लेटर के बाद ही बवाल शुरू हुआ। इसके बाद डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ एक के बाद एक कई विवाद सामने आए। रणजीत सिंह हत्याकांड और फिर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड। तीनों मामले में डेरा प्रमुख आरोपी हैं।

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