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ताजमहल में दफन हैं 4 मुमताज, जानें कौन था शाहजहां के दिल के पास

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NewstrackBy Newstrack

Published on 3 May 2016 11:42 AM GMT

ताजमहल में दफन हैं 4 मुमताज, जानें कौन था शाहजहां के दिल के पास
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आगरा: मोह्ब्बत की निशानी ताजमहल का नाम जहन में आते ही मुगल बादशाह शाहजहां और उनकी बेगम मुमताज के प्रेम की प्रतीक खूबसूरत संगमरमरी इमारत की तस्वीर उभरती है। जहां शहंशाह और उनकी बेगम, एक-दूसरे के बगल में दफन हैं। हर रोज यहां हजारों सैलानी ताज के दीदार को आते हैं, लेकिन शायद ही किसी को पता चलता हो कि ताज में तीन और मुमताज भी दफन हैं। यहां शाहजहां की तीन और बेगमों के भी खूबसूरत मकबरे बने हैं। मगर, यहां सैलानियों के कदम कभी नहीं पड़ते।

मुमताज के साथ शाहजहां की तीन बेगमों का कब्र

इतिहास के पन्नों की ये हकीकत आज भी सैलानियों की पहुंच से दूर है। लोग केवल शाहजहां और मुमताज की कब्र देखकर लौट जाते हैं। उन्हें तो ये भी नहीं पता होता कि शाहजहां की तीन बेगम और थीं।

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पश्चिम गेट पर है फतेहपुरी महल बेगम का मकबरा

ताज के पश्चिमी गेट से प्रवेश करते ही दाई ओर कोठरियां बनी हुई हैं। इसी इमारत की छत पर फतेहपुरी महल बेगम का मकबरा स्थित है। ये कौन थीं, किसकी बेटीं और शाहजहां से इनका निकाह कब हुआ। इसका एतिहासिक अभिलेखों में कोई उल्लेख नहीं हैं। स्मारक के बाहर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने एक बीजक लगा रखा है। इसके मुताबिक मुताबिक फतेहपुरी महल बेगम, शाहजहां की पत्नी थीं।

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पूर्वी गेट पर है बेगम अकबराबादी महल बेगम का मकबरा

शाहजहां की एक और बेगम अकबराबादी महल बेगम थी। इनका मकबरा पूर्वी गेट की बाई ओर कोठरियों की छत पर बना है। इन कोठरियों में वर्तमान में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल का नियंत्रण कक्ष स्थापित हैं। एएसआइ के मुताबिक अकबराबादी महल बेगम का असली नाम इजुन्निसा बेगम था, इन्हें सरहिंदी बेगम भी कहा जाता है।

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पूर्वी गेट के बाहर है कंधारी बेगम का मकबरा

शाहजहां की एक और बेगम कंधारीबेगम है। इनका मकबरा ताज पूर्वी गेट के बाहर है। इसके सामने ही एक मस्जिद भी बनी है, जिसे काली मस्जिद और संदली मस्जिद भी कहा जाता है। इतिहासकार सईद अहमद मारहेरवी की पुस्तक अकबराबाद मुरक्का के मुताबिक कंधारी बेगम, मिर्जा मुजफ्फर हुसैन की पुत्री थीं। इनका निकाह बादशाह शाहजहां के साथ 1610 में हुआ था। मतलब मुमताज से पहले वे शाहजहां की बेगम बनी थी। माना जाता है कि पूर्वी गेट के बाहर बना मकबरा उन्हीं का है।

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