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काशी में डॉक्‍टर दंपति की अनोखी मुहिम, बेटी होने पर नहीं लेते फीस

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NewstrackBy Newstrack

Published on 25 Feb 2016 12:50 PM GMT

काशी में डॉक्‍टर दंपति की अनोखी मुहिम, बेटी होने पर नहीं लेते फीस
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वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लड़कियों की गिरती संख्या, भ्रूण हत्या से निजात पाने के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान चला रहे हैं। इनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक डाॅक्‍टर दंपति ने भी ऐसी ही एक अनोखी मुहिम शुरू की है। इसमें वो बेटियों की मुफ्त में डिलेवरी कर रहे हैं। डॉ. शिप्राधर श्रीवास्तव ने अपने पति डॉ. एमके श्रीवास्तव के साथ ये मुहिम चला रही हैं।

करते हैं बेटियों की मुफ्त डिलेवरी

डॉक्टर दंपति अपने हॉ‍स्पिटल में बेटियों की मुफ्त में डिलेवरी करते हैं। खासबात ये है कि डा.शिप्राधर ने एक साल के अंदर ऐसी 100 बेटियों की मुफ्त में डिलेवरी करके इतिहास रच दिया है। यूपी में ये पहला हॉस्पिटल बन गया है जहां सौ बेटियों की मुफ्त डिलेवरी हुई है।

बेटी की डिलेवरी करती डॉ.

डॉक्टर दंपति डेढ़ साल से चला रहे अभियान

समाज में बिगड़ी बेटियों की स्थिति सुधारने के लिए इस डॉक्टर दंपति ने लगभग डेढ़ साल पहले ‘बेटी नहीं है बोझ, बदलेंगे हम सोच’ योजना की शुरुआत की थी। यह योजना अब एक मिशन बन गया है। डॉ.शिप्रा कहती हैं कि वह समाज सेवा करते-करते वर्ल्ड रिकार्ड बनाने की कोशिश करेंगी।

ऐसे शुरू हुई योजना

डॉ.शिप्रा बताती है कि डिलेवरी के बाद ज्यादातर परिजन को जब मालूम होता है कि बेटी जन्मी है तो वे मायूस हो जाते है। कई बार तो घरवाले रोने लगते है। कई बार परिजन यहां तक कहते हैं कि आपने मेरी बेटी भी चीर दिया औऱ बेटी पैदा हो गई। डॉ.शिप्रा कहती हैं कि ऐसे हालात देखकर उनका मन उद्वेलित हो उठता था कि आखिर बेटी के प्रति ऐसी सोच कब खत्म होगी। लिहाजा अपने यहां आने वाले मरीजों और उनके परिजन की ऐसी सोच को बदलने के लिए उन्होंने ये पहल की। जब लोगों पर पैसे का बोझ नहीं पड़ेगा, तो शायद वे दुखी न हो। डॉ.शिप्रा का यह मिशन कई हद तक सफल भी हुआ है। क्षेत्र के लोगों की मानसिकता और सोंच में परिवर्तन आता दिखाई दे रहा है। अब उनके अस्पताल में किसी बेटी का जन्म होता है तो ख़ुशी का माहौल दिखाई देता है।

बुरे समय में भी नहीं ली एनजीओ की मदद

डा.शिप्रा बताती हैं कि एक समय ऐसा आया कि उनके हॉस्पिटल में लगातार बेटियों की ही डिलेवरी का सिलसिला चला। इस दौरान उन्हे पैसे की कुछ दिक्कत हुई तो उनके पति डा.एमके श्रीवास्तव ने उनका हौसला बढ़ाया औऱ आर्थिक मदद की। पति ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए वे इसके लिए किसी भी एनजीओ या अन्य किसी से आर्थिक मदद नहीं लेंगे। डॉक्टर दंपति दंपति ने इस मिशन को अपने द्वारा कमाए गए पैसों से ही पूरा करने का संकल्प लिया है।

गरीब बच्चियों देती हैं शिक्षा

डॉ.शिप्रा मुफ्त में डिलेवरी करने के साथ-साथ गरीब बच्चियों को मुफ्त में शिक्षा देने का नेक काम भी करती हैं, ताकि वे शिक्षित होकर अपने पैरों पर खड़ी हो सके।

ऐसे करेंगे बेटियों के परिजनों का हौसला अफजाई

डॉ.शिप्रा कहती है कि वे जल्द ही एक कार्यक्रम आयोजित कर अपने अस्पताल में पैदा हुई सौ बेटियों के परिजनों को आमंत्रित करेंगी और उन्हें उपहार भेंट करेंगी। उपहार में वे पीएम द्वारा चलाई जा रही सुकन्या समृद्धि योजना का खाता खुलवाकर परिजनों को भेंट करेंगी। योजना की पहली किस्त वे स्वयं देंगी, बाकि किस्त उनके परिजनों को जमा करनी होगी।

भारत विकास परिषद ने किया सम्मानित

डॉ.शिप्रा अपने इस मिशन की वजह से पूरे शहर में नामचीन हो गईं हैं। हाल ही में भारत विकास परिषद ने नोएडा में आयोजित एक समारोह में उन्हें पुरस्कृत किया था। लोगों से मिल रहे इस सम्मान से डॉक्टर दंपति काफी उत्साहित हैं और अपने इस मिशन को जीवन पर्यंत जारी रखना चाहते हैं।

23 फरवरी, 2016 को पैदा हुई थी 100वीं बेटी

डा.शिप्रा बताती हैं कि 25 जुलाई 2014 को उन्होंने पहली बच्ची की डिलेवरी की थी। इसके डेढ़ साल बाद 23 फरवरी 2016 को उन्होंने 100वीं बेटी की डिलेवरी की। पहली बच्ची के मां का नाम निरुपमा सिंह है और 100 वीं बच्ची के मां का नाम प्रियंका है। प्रियंका कहती है कि आज के समय में इससे बड़ा पुण्य का काम और कोई नहीं हो सकता। आज बेटियों की ऐसी हालत के लिए हमारी सोच व काफी हद तक पैसा भी जिम्मेदार है।

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