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भौतिक स्वरूप न होने के बाद भी दुनियाभर में ‘क्रिप्टो करेंसी’ का करिश्मा

raghvendra

raghvendraBy raghvendra

Published on 28 Oct 2017 9:52 AM GMT

भौतिक स्वरूप न होने के बाद भी दुनियाभर में ‘क्रिप्टो करेंसी’ का करिश्मा
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नई दिल्ली। आभासी मुद्रा यानी ‘क्रिप्टो करेंसी’ ने दुनियाभर में तहलका मचाया हुआ है। क्रिप्टो करेंसी का अन्य मुद्रा की तरह कोई भौतिक स्वरुप नहीं होता। यह एक ऐसी करेंसी है जिसको आप न तो देख सकते हैं और न ही छू सकते हैं। यह केवल इलेक्ट्रॉनिक स्टोर होती है अगर किसी के पास बिटक्वाइन जैसी क्रिप्टो करेंसी है तो वह आम मुद्रा की तरह ही सामान खरीद सकता है बशर्ते सामान बेचने वाला उसे स्वीकार कर ले।

यूं क्रिप्टो करेंसी हैं तो बहुत लेकिन करीब 842 ऐसी हैं जिनका बाजार पूंजीकरण करीब 166 अरब डॉलर का है। लगभग हर रोज नई क्रिप्टो करेंसी पेश की जा रही है। जापान ने क्रिप्टो करेंसी को वैध मुद्रा के रूप में मंजूरी दे दी है। इसके बाद उनकी स्वीकार्यता में काफी बढ़ोतरी हुई है। भारत में भी तकनीक के जानकार निवेशक क्रिप्टो करेंसी में हाथ डाल रहे हैं। बिटक्वाइन क्रिप्टो करेंसी में सबसे ज्यादा प्रचलित और मशहूर है।

बिटक्वाइन की एक यूनिट हाल ही में 6 हजार डॉलर तक पहुंच गई थी। इसने पिछले एक साल में निवेशकों को करीब 670 फीसदी रिटर्न दिया है। बिटक्वाइन समेत अन्य ऐसी करेंसी की कीमतें बढ़ रही हैं जिस कारण बड़ी तादाद में भारतीय निवेशक इस तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं और इनमें भी बड़ा वर्ग 30 से 40 साल की आयु वाला है। मना जा रहा है कि कम आपूर्ति के कारण बिटक्वाइन की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

जोखिम से सावधान

क्रिप्टो करेंसी में हाथ डालने से पहले इसके जोखिमों के बारे में जानना सबसे जरूरी है। क्रिप्टो करेंसी सेबी, रिजर्व बैंक, या इरडा जैसे किसी प्रमुख नियामक के अधिकारक्षेत्र में नहीं आती है। इसलिये इसमें जो कुछ करना है अपने ही रिस्क पर करना है। क्रिप्टो करेंसी में उतार-चढ़ाव बहुत अधिक है। जून के अंत में यह अफवाह उड़ी थी कि एथेरियम के संस्थापक की एक कार दुर्घटना में मौत हो गई, जिसके बाद यह करेंसी करीब 20 फीसदी गिर गई थी।

बिटक्वाइन समुदाय में बिखराव की खबरों से भी बिकवाली शुरू हो गई थी। क्रिप्टो करेंसी खरीदने और बेचने वालों के एक-दूसरे से अनजान होना भी एक जोखिम है। हालांकि भारत के क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज कड़े केवाईसी (नो योर कस्टमर) मानक अपनाते हैं। हाल-फिलहाल बिटक्वाइन से संबंधित कई स्कीमें आ गयी हैं। बड़े लुभावने सपने दिखाये जा रहे हैं। अनुमान है कि दुनिया में एक हजार से ज्यादा ही क्रिप्टो करेंसी हैं और रोजाना एक नई बाजार में आ जाती है। सो बहुत सोच समझ कर पसा लगाना चाहिये। जोखिम कम करने के लिए बिटक्वाइन या ऐसी किसी करेंसी में उतना ही निवेश से शुरुआत करनी चाहिये जिसे गंवाने की आप क्षमता रखते हैं।

जलवा है बिटक्वाइन का

‘बिटक्वाइन’ की एक यूनिट की कीमत 21 अक्टूबर को 6000 डॉलर (3.90 लाख रुपए) के स्तर पर पहुंच गई यानी भारतीयों को एक बिटक्वॉइन खरीदने के 3.90 लाख रुपए खर्च करने होंगे। अनुमानों के अनुसार एक बिटक्वाइन का भाव 10,000 डॉलर तक पहुंच सकता है। दुनिया भर में एक करोड़ से अधिक बिटक्वाइन हैं। माना जा रहा है कि यह करेंसी इस तरह डिजाइन की गयी है कि यह 2 करोड़ से ज्यादा नहीं बन सकतीं। इसीलिये इसकी सप्लाई कम और डिमांड ज्यादा है।

कैसे मिलते हैं बिटक्वाइन

ऑनलाइन गेमिंग, क्विज को सॉल्व करने पर आपको बिटक्वाइन मिलते हैं, साथ ही, पैसे देकर भी बिटक्वाइन खरीदा जा सकता है। कालाधन, हवाला का धंखा, ड्रग्स की खरीद-बिक्री, फिरौती की रकम, टैक्स की चोरी और आतंकवादी गतिविधियों में इसके ज्यादा इस्तेमाल की वजह से भी बिटक्वाइन खबरों में रहता है। ऐसे अनगिनत वेबसाइट हैं जो बिटक्वाइन को स्वीकार कर रही हैं। प्लेन की टिकट, होटल रूम, इलेक्ट्रॉनिक्स, कार, कॉफी और किसी अन्य चीज के लिए भी पेमेंट स्वीकार किये जा रहे हैं।

किसने बनाया बिटक्वाइन

बिटकॉइन को 2009 में प्रचलित किया गया। इसको बनाने वाला कौन है यह आज तक पता नहीं चल पाया है। वैसे अनुमान लगाया जाता है कि जापान के सतोषी नाकामोतो नामक एक सॉफ्टवेयर डेवलपर इसे बनाया था। यह भी कहा जाता है कि नाकामोतो के पास दस लाख बिटक्वाइन हैं और वह दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल है।

क्रिप्टो करेंसी को मान्यता नहीं

बिटक्वाइन को ज्यादातर देश इसलिए मान्यता नहीं दे रहे हैं क्योंकि इसके जरिए होने वाली खरीद-फरोख्त और इसके धारकों का पता लगाना मुश्किल है। असल में, मनीलांड्रिंग यानी काले धन को सफेद में बदलने की प्रक्रिया में बिटक्वाइन काफी मददगार साबित हो रहे हैं। भारत में अपने खाते में रुपए बिटक्वाइन में बदलवाकर डाल दिए जाएं और उन्हें दुनिया में कहीं भी जाकर डॉलर में भुना लिया जाए, तो उसकी धरपकड़ नहीं हो सकती।

हवाला, टैक्स चोरी, मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त, हैकिंग और आतंकी गतिविधियों में बिटक्वाइन के बढ़ते इस्तेमाल ने अर्थशास्त्रियों, सुरक्षा एजेंसियों और सरकारों तक की नींद उड़ा दी है। कुछ महीने पहले लाखों कंप्यूटर्स को वायरस रैंसमवेयर ने हैक कर लिया। जब कंपनियों ने इस वायरस को हटाना चाहा तो उनसे भारी कीमत देने को कहा गया और कीमत सामान्य मुद्रा में नहीं, बल्कि बिटक्वाइन के रूप में मांगी गई थी। इस मुद्रा का पता लगाने की भरसक कोशिशें चल रही हैं किंतु अभी तक सफलता नहीं मिली है।

चीन के मार्केट रेग्युलेटर ने पिछले महीने क्रिप्टो करंसी के बाजार पर दबाव बनाया, जिससे कि दुनिया के सबसे बड़े बिटक्वाइन एक्सचेंज में से एक ‘बीटीसी चाइना’ को यह घोषणा करनी पड़ी कि सितंबर महीने के बाद वह ट्रेडिंग को बंद कर रहा है। भारत में भी रिज़र्व बैंक क्रिप्टो करेंसी के प्रचलन के पक्ष में नहीं है।

तेजी से बढ़ती कीमत

दो साल पहले जून 2015 में एक बिटक्वाइन की कीमत करीब 20 हजार रुपए थी, जो 2017 मई के अंत में 2 लाख 25 हजार तक पहुंच गई। बिटक्वाइन की कीमतें तो असल में हजारों गुना बढ़ी हैं। जैसे, जुलाई 2010 में एक बिटक्वाइन का मूल्य 0.05 अमेरिकी डॉलर था, जो अब 6 हजार अमेरिकी डॉलर हो गया है। इधर जिस तरह से जापान में इसे एक कानूनी मुद्रा के रूप में मान्यता दी गई, उसके आधार पर अर्थशास्त्री अनुमान लगा रहे हैं कि साल के अंत तक एक बिटक्वाइन की कीमत 6 लाख रुपए तक पहुंच जाएगी।

जालसाजों से बचें

जिन लोगों को क्रिप्टो करेंसी की जानकारी नहीं वे ठगों के जाल में भी फंस रहे हैं। लोगों को बिटक्वाइन के नाम पर सिक्के थमा देने का धंधा पकड़ा जा चुका है। वहीं बिटक्वाइन का नेटवर्क बनाने का भी धंधा चल रहा है जिसमें पोंज़ी स्कीम या एमएलएम की तरह ज्यादा से ज्यादा लोगों को मेम्बर बनाने का टास्क दिया जाता है।

बिहार में ही बिटक्वाइन की वेबसाइट पर निवेश और इसके बदले उन्हें प्रतिदिन, साप्ताहिक और मासिक रिटर्न का लालच दिया गया। जब काफी रकम जमा हो गयी तो घोटालेबाज साईट बंद करके भाग गए। इंदौर में एटीसी नामक क्रिप्टो करेंसी के घोटालेबाज पकड़े गये थे। जब सरकार ने तीन लाख संदिग्ध मुखौटा कंपनियों के बैंक खातों पर रोक लगाई, तो कहा गया कि इनमें से कई कंपनियां बिटक्वाइन के जरिए कारोबार कर रही हैं।

हालांकि अब तो सामान्य व्यापारियों को भी बिटक्वाइन में लेन-देन करना आसान लग रहा है क्योंकि इस पर किसी सरकार या बैंक का नियंत्रण नहीं है। इसमें नोटबंदी का डर भी नहीं है। नोटबंदी के बाद से भारत में बिटक्वाइन की ट्रेडिंग काफी बढ़ी है। पिछले साल भर में देश के बिटक्वाइन एक्सचेंजों का कारोबार काफी बढ़ा है और क्रिप्टो करंसी यूजर्स की संख्या 10 लाख से अधिक हो गई है।

बिटकॉइन माइनिंग

आम भाषा में माइनिंग का मतलब है खनन। चूँकि बिटक्वाइन का कोई भौतिक रूप तो है नहीं सो इसकी माइनिंग (बिटक्वाइन का निर्माण) परंपरागत तरीके से नहीं हो सकती। अत: कम्प्यूटर द्वारा बिटक्वाइन को बनाना ही माइनिंग कहा जाता है। यह काम करने वाले माईनर्स कहे जाते हैं और बिटक्वाइन माईनर्स को माइनिंग के लिए एक ख़ास हार्डवेयर या शक्तिशाली कंप्यूटर और बिटक्वाइन माइनिंग सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है।

बिटक्वाइन के लेन-देन के लिए बिटक्वाइन एड्रेस का प्रयोग किया जाता है। कोई भी ब्लॉकचेन में अपना खाता बनाकर इसके ज़रिये लेन देन कर सकता है। बिटक्वाइन की सबसे छोटी संख्या को सातोशी कहा जाता है। एक बिटकॉइन में 10 करोड़ सातोशी होते हैं।

नफा-नुकसान

बिटक्वाइन के बेशुमार फायदे हैं। जैसे, इसे ई-मेल की तरह दुनिया में कभी भी, कहीं भी, किसी को भी ट्रांसफर किया जा सकता है। कोई सरकार या बैंक इस मुद्रा पर सेंसरशिप नहीं लगा सकता। इसके सिस्टम को हैकिंग-प्रूफ माना जाता है। बिटक्वाइन की नकली मुद्रा बनाना भी नामुमिकन है क्योंकि मैथेमेटिकल कोड पर आधारित सिस्टम में फर्जी कोड जनरेट नहीं हो सकता।

यह पहले से तय है कि इतने ही बिटक्वाइन बनेंगे तो फिर अलग से एक भी बिटक्वाइन बनाना नामुमकिन है। अगर कोई चाहता है कि पैसे ट्रांसफर करने, आर्थिक लेन-देन करने में न तो बीच में कोई बैंक या व्यक्ति आए और न ही ट्रांजेक्शन फीस ले तो यह सिर्फ बिटक्वाइन में मुमकिन है। बिटकॉइन में दशमलव के आठवें अंक तक छोटी रकम भेजी जा

सकती है।

कैसे होता है लेन-देन

बिटक्वाइन का लेन देन कम्प्यूटर नेटवर्कों के जरिए बिना किसी मध्यस्थता के किया जा सकता है। इस डिजिटल करेंसी को डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है। जटिल कम्प्यूटर एल्गोरिथम्स और कम्प्यूटर पावर से इस मुद्रा का निर्माण किया जाता है जिसे माइनिंग कहते हैं। जिस तरह रुपए, डॉलर और यूरो खरीदे जाते हैं, उसी तरह बिटकॉइन की भी खरीद होती है। ऑनलाइन भुगतान के अलावा इसको पारम्परिक मुद्राओं में भी बदला जाता है। बिटकॉइन की खरीद-बिक्री के लिए एक्सचेंज भी हैं, लेकिन उसका कोई औपचारिक रूप नहीं है।

  • बिटकॉइन के लेनदेन में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता है।
  • इसमें कोई क्रेडिट लिमिट नहीं होती है।
  • खरीदार की पहचान का खुलासा किए बिना पूरे बिटक्वाइन नेटवर्क के प्रत्येक लेन देन के बारे में पता किया जा

    सकता है।

कैसे पाएं क्रिप्टो करेंसी

  • इंटरनेट पर मौजूद एक्सचेंज वेबसाइट्स प्रमुख मुद्राओं के बदले में बिटक्वाइन जैसी क्रिप्टो करेंसी उपलब्ध कराती हैं। इसी तरह कुछ ऐप्स भी फीस लेकर बिटक्वाइन बेचते हैं। स्मार्टफोन के जरिए ऐप डाउनलोड करके भी बिटक्वाइन हासिल किए जा सकते हैं। भारत में जेबपे नामक ऐप से इसकी खरीद बिक्री हो रही है।
  • वस्तुओं या सेवाओं को बेचने के बदले उनका भुगतान बिटक्वाइन में मांगा जाए।
  • बिटक्वाइन माइनिंग। इसके लिए सिस्टम पर बिटक्वाइन से जुड़ा कम्यूनिटी सॉफ्टवेयर इंस्टाल करना पड़ता है। कम्यूनिटी सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने पर शुरुआत में कुछ बिटक्वाइन मुफ्त मिलते हैं। फिलहाल एक नए माइनर को रिवॉर्ड के रूप में 25 बिटक्वाइन मिलते हैं।

कुछ और बातें

  • वर्ष 2009 में बिटक्वाइन 36 पैसे का था जो 2013 आते-आते 12 हजार रुपये का हो गया।
  • जेबपे और यूनॉकॉइन समेत कई वेबसाइटों के जरिए भारत में बिटक्वाइन व्यापार किया जा सकता है। बिटक्वाइन खरीदने के लिए एक बिटक्वाइन वॉलेट होना चाहिए। बिटक्वाइन का कारोबार एक ब्लॉक चेन के जरिए होता है जो वॉलेटधारियों का नेटवर्क होता है।
  • चूँकि वर्चुअल करेंसी एक नयी अर्थव्यवस्था है इसलिए इसकी कीमत छोटी अवधि में ही बढ़ या घट सकती है।
  • लेन-देन अपरिवर्तनिय होते हैं और वे केवल धन प्राप्त करने वाले व्यक्ति द्वारा ही वापस किए जा सकते हैं। इसका मतलब है कि उन्ही लोगों और संगठनों के साथ व्यापार करें जिन को आप जानते हैं।
  • इसमें कुछ भी गुमनाम नहीं है। सभी लेनदेन सार्वजनिक होते हैं और नेटवर्क पर स्थायी रूप से होते हैं। जिसका मतलब है कि कोई भी लेनदेन देख सकता है।
  • बिटक्वाइन के बारे में भारत सरकार अब तक कोई राय नहीं बना पाई है। वित्त मंत्रालय की एक कमेटी अभी इस पर अपनी रिपोर्ट तैयार ही कर रही है।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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