यूपी में खेती को लेकर कृषि मंत्री का ये प्लान, किया बड़ा एलान

उत्तर प्रदेश के कृषिमंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया है कि खेत से बीज लेकर बाजार तक उपलब्ध कराने की पूरी व्यवस्था कृषि उत्पादक संगठन के माध्यम से ही की जाएगी।

Published by Ashiki Patel Published: June 21, 2020 | 10:48 pm
Modified: June 21, 2020 | 10:50 pm

मनीष श्रीवास्तव

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया है कि खेत से बीज लेकर बाजार तक उपलब्ध कराने की पूरी व्यवस्था कृषि उत्पादक संगठन के माध्यम से ही की जाएगी। गाजीपुर के भांवरकोल ब्लॉक के ग्राम जोगा मुसाहिब स्थित कृषि उत्पादक संगठन, शिवांश कृषक प्रोड्यूसर लिमिटेड द्वारा निर्माणाधीन सीड प्रोसेसिंग प्लांट का शिलान्यास के मौके पर उन्होंने बताया कि गाजीपुर जनपद के 10 ब्लॉक को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत केला, मिर्चा, टमाटर तथा मटर की खेती के लिए कवरेज प्रदान की गयी है।

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सीड प्रोसेसिंग प्लांट के लिए मिलता है अनुदान

कृषि मंत्री ने बताया कि भारत सरकार और राज्य सरकार के सहयोग से कृषि विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश के 100 कृषि उत्पादक संगठन व कंपनियों को सीड प्रोसेसिंग प्लाण्ट की स्थापना के लिए शत प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे कृषि उत्पादक संगठन जिनके पास 3 वर्ष का अनुभव और ऑडिटेड बैलेंस शीट उपलब्ध है, उनमें से प्रथम चरण में 11 कृषि उत्पादक संगठनों का चयन किया गया है।

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गाजीपुर ने इन सब्जियों के उत्पादन में दिखाई दिलचस्पी

इन कृषि उत्पादक संगठनों को 18-18 लाख रुपये का चेक भी प्रदान कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन्हीं 11 कृषि उत्पादक संगठनों में से एक शिवांश द्वारा निर्माणाधीन सीड प्रोसेसिंग प्लाण्ट का आज शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि गाजीपुर जनपद पूर्वी उत्तर प्रदेश के अंदर मिर्चा, टमाटर, मटर और प्याज की खेती में अग्रणी भूमिका अदा कर रहा है।

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किसान बिना जरूरी भाग-दौड़ से बचेंगे

इधर, यूपी के कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा ने कृषि उत्पादों की मार्केटिंग की समस्यां को दूर करने के लिए एक सक्षम प्रणाली विकसित करने का निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि किसान को सभी विभागों के कार्यो का केन्द्र बिन्दु के रूप में मानते हुए कृषि, पशुपालन, उद्यान, मत्स्य, दुग्ध आदि सभी गतिविधियों की समन्वित कार्य योजना तैयार कर उसे क्रियान्वित किया जाये। जिससे किसान को विभिन्न कार्यालयों में अनावश्यक रूप से भाग-दौड़ न करनी पड़े। इसके अतिरिक्त प्रत्येक जनपद में प्रमुखता से होने वाले उत्पाद विशेष को चिन्हित करते हुए उनके प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वित करायी जाये।

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