92 करोड़ की शराब: शराबी डकार गए बोतलें, नहीं डरते कोरोना से

शराबियों की माताएं और पत्नियां दरबदर हो रही हैं और उनके बच्चों का भविष्य तबाह हो गया है। वर्तमान में लोगों के अंदर कोरोना का डर भरा हुआ है मगर शराबियों पर इस डर का कोई असर नहीं पड़ रहा है।

Published by SK Gautam Published: November 21, 2020 | 3:35 pm
Modified: November 21, 2020 | 3:39 pm
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92 करोड़ की शराब: शराबी डकार गए बोतलें, नहीं डरते कोरोना से-(courtesy-social media)

बी.के. कुशवाहा

झांसी। भले ही शराब के ठेके से खरीदी जाने वाली हर एक बोतल पर चेतावनी स्वरुप लिखा होता है कि शराब पीना सेहत के लिए हानिकारक है परन्तु इसके बावजूद लोग अपनी जिंदगी की परवाह नहीं करते और कड़वे जहर के घूंट भर-भर कर पीते हैं। शराब के सेवन से कइयों का शरीर कांप रहा है और कइयों की शक्लें डरावनी बन गई है। कई लोग शराब पीने को शगुन समझते हैं परन्तु अपने पारिवारिक सदस्यों का उनको बिल्कुल ख्याल नहीं है। शराब बुंदेलखंडवासियों की जवानी को खा गई है। अनेकों घर बर्बाद हो गए हैं।

शराबियों को कोरोना का कोई डर नहीं

शराबियों की माताएं और पत्नियां दरबदर हो रही हैं और उनके बच्चों का भविष्य तबाह हो गया है। वर्तमान में लोगों के अंदर कोरोना का डर भरा हुआ है मगर शराबियों पर इस डर का कोई असर नहीं पड़ रहा है। मार्च से देशभर में कोरोना वायरस का कहर फैल गया था। लॉकडाउन पर लगाया गया था। इसके बावजूद शराबियों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी होती रही है। उधर, एक तरफ आर्थिक मंदहाली की बातें चल रही हैं जिसके तहत किसान, मजदूर और व्यापारी वर्ग आदि आत्महत्याएं कर रहा है जबकि दूसरी तरफ झाँसी मंडल में रहने वाले सात माह में एक अरब से ज्यादा की शराब पी गए हैं। जानकारी के अनुसार शराब पीने वालों में जहां अनपढ़ वर्ग शामिल है, वहीं पढ़ा-लिखा वर्ग, जिसने अच्छे समाज सृजना करनी होती है, भी शामिल है।

प्यासों का गला तर करने की परंपरा भी खत्म हो गई है

बुंदेलखंड में इस तपिश और लू के थपेड़ों से बचने के लिए एक अदद छांव का ठिकाना भी नहीं रहा। प्यासों का गला तर करने की परंपरा भी खत्म हो गई है। ऐसे में लोगों ने नया ठिकाना खोज निकाला है। सूखाग्रस्त बुंदेलखंड के लोगों को मय खाना नजर आने लगा है। वैसे भी कविवर हरिवंश राय बच्चन के शब्दों में मेल कराने के लिए मयखाना ही तो है। लिहाजा लोग उनके गीतों पर गौर फरमाते हुए आपसी भेदभाव को ताख पर रखकर पहुंच जा रहे हैं। इसी का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि अप्रैल से लेकर अक्तूबर माह तक झाँसी मंडल में एक अरब 95 करोड़ 26 लाख 17 हजार चार सौ रुपयों की देशी शराब गटक गए।

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बुंदेलखंड में रोज लाखों रुपयों की शराब बिकती है

इस संबंध में उप आबकारी आयुक्त एस के राय ने बताया कि आम दिनों में बुंदेलखंड में रोज लाखों रुपयों की शराब बिकती है। त्योहार या नए साल के जश्न के दौरान इसमें इजाफा हो जाता है। लेकिन वित्तीय वर्ष के पहले महीने में बिक्री इतनी होगी आबकारी विभाग को भी इसकी उम्मीद नहीं थी। इस समय कोराना वायरस भी चल रहा है। इसके बावजूद झाँसी मंडल में शराब की बिक्री में बढ़ोत्तरी होती जा रही है। बताते हैं कि झाँसी मंडल में एक अरब 95 करोड़ 26 लाख 17 हजार चार सौ रुपयों की देशी, 91 करोड़ 87 लाख, 66 हजार रुपयों की विदेशी और 58 करोड़ 55 लाख 97 हजार सात सौ चालीस की बीयर पी गए हैं।

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सात माह में झाँसी मंडल में 8639900 लीटर पी गए देशी शराब

झाँसी मंडल में झाँसी, ललितपुर और जालौन जिला आता है। अप्रैल से लेकर अक्तूबर माह तक तीनों जिलों में 8639900 लीटर देशी शराब, 2296915 अंग्रेजी शराब की बोतल व 4504598 बीयर की बोतल डकार गए हैं। इस प्रकार झाँसी मंडल के शराब के शौकीन एक अरब 95 करोड़ 26 लाख 17 हजार चार सौ रुपयों की देशी, 91 करोड़ 87 लाख 66 हजार की विदेशी और 58 करोड़ 55 लाख 97 हजार सात सौ चालीस रुपयों की बीयर पी गए हैं।

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झाँसी मंडल में है इतनी शराब की दुकानें व मॉडल शॉप

झाँसी में 233 देशी, 72 अंग्रेजी, 57 बीयर, चार मॉडल शॉप व 22 भांग की दुकान है। इसी तरह जालौन में 213 देशी, 62 विदेशी, 48 बीयर, दो मॉडल शॉप, 29 भांग की दुकान व ललितपुर में 81 देशी, 35 विदेशी, 28 बीयर, पांच मॉडल शॉप व 11 भांग की दुकानें है।

हर साल बढ़ती है पीने वालों की तादाद

इस संबंध में उप आबकारी आयुक्त एस के राय कहते हैं कि पिछले साल शराब और बीयर की नई पॉलिसी आई थी जिसके चलते पहले महीने में मांग के आपेक्ष में सप्लाई नहीं थी। इस बार वैसा नहीं रहा। वित्त वर्ष के पहले महीने से ही लोगों को शराब और बीयर मिलने लगी थी। उनका कहना है कि वैसे भी हर साल शराब और बीयर पीने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है।

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बात तलाक तक जा पहुंचती है

पुलिस थानों, वूमेन सेल और पंचायतों आदि से प्राप्त जानकारी के अनुसार शराब ने कई घर तोड़ दिए हैं। शराबी व्यक्ति घर में शोर-शराबा डालते हैं। अपनी पत्नियों, बच्चों और माता-पिता के साथ लड़ाई-झगड़ा करते हैं। जबरन पैसे मांगते हैं जिस कारण कई घरों की गाड़ी पटरी से उतर जाती है और बात तलाक तक जा पहुंचती है।

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