इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का आदेश रद्द, कोर्ट ने कही ये बड़ी बात

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत संचार निगम माथुरा के महाप्रबंधक के याची कम्पनी को ब्लैकलिस्ट करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सुनवाई का मौका दिए बगैर किसी कम्पनी को ब्लैक लिस्ट नही किया जा सकता। नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाना जरूरी है।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत संचार निगम माथुरा के महाप्रबंधक के याची कम्पनी को ब्लैकलिस्ट करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सुनवाई का मौका दिए बगैर किसी कम्पनी को ब्लैक लिस्ट नही किया जा सकता। नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाना जरूरी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति बीके नारायण तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खण्डपीठ ने मेसर्स एस कुमार कंस्ट्रक्शन कम्पनी की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने बीएसएनएल को नियमानुसार कारण बताओ नोटिस जारी कर कार्यवाही करने की छूट दी है।

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याची का कहना है कि उसे मथुरा में केबल डालने का ठेका दिया गया। उसने समय से काम पूरा कर भुगतान के लिए समय समय पर बिल भेजा किंतु अधिकारियो ने भुगतान नही किया। इस मामले में आर्बिट्रेटर नियुक्त हुआ। विजिलेन्स जांच भी हुई। दोनों पक्षो को सुनकर आर्बिट्रेटर ने याची के पक्ष में अवार्ड दिया। जिसके खिलाफ निगम ने जिला जज के समक्ष चुनौती दी है जो लंबित है।

याची ने टेंडर भरा उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया। दोबारा बीएसएनएल ने टेंडर निकाला। याची ने आवेदन दिया तो उसे बिना सुने ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।जिसे याचिका में चुनौती दी गयी थी। कोर्ट ने ब्लैकलिस्ट करने के 27 जनवरी 17 के आदेश को रद्द कर दिया है।

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वादकारियों की परेशानी देख बुधवार को भी होगी नये केसो की सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों की शिक्षा सेवा ट्रिब्यूनल को लेकर लंबी हड़ताल के चलते प्रदेश के वादकारियों की परेशानी देख चीफ जस्टिस ने बुधवार 11 सितंबर को भी फ्रेस दाखिल मुकदमों की सुनवाई का निर्देश दिया है। वैसे बुधवार को फ्रेस मुकदमों की सुनवाई न होकर पुराने केस ही मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर सुने जाते हैं।

वकीलों के कार्य बहिष्कार के चलते हजारों की संख्या में नये दाखिल हो चुके केस की सुनवाई नही हो सकी है। ये केस कोर्ट में पडा हुआ है। कुछ ही दिनों बाद हाईकोर्ट में दशहरा की छुट्टियां भी होने वाली है।

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इस कारण यदि नये केसों की सुनवाई न हो सकी तो पेन्डेन्सी बढ़ जाएगी। मालूम हो कि हाईकोर्ट के वकील लखनऊ में शिक्षा ट्रिब्यूनल बनाने का विरोध कर रहे थे। इसको लेकर हाईकोर्ट के वकील लगभग दो सप्ताह से हड़ताल पर थे। इसके चलते सरकार को तो रेवेन्यू का नुकसान हुआ ही, प्रदेश के सुदूरवर्ती इलाकों से मुकदमा दाखिल करने आए वादकारियो को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी है।