अयोध्या में इस खास जगह पर बनाई जा सकती है मस्जिद, जानें इसके बारे में सबकुछ

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या देश ही नहीं, बल्कि विश्व के लोगों को एक नए रूप में आकर्षित करेगा।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या देश ही नहीं, बल्कि विश्व के लोगों को एक नए रूप में आकर्षित करेगा।

ऐसे में अयोध्या बड़े अंतरराष्ट्रीय धार्मिक शहर के रूप में विकसित हो सकता है। मस्जिद को 14 कोसी परिक्रमा के बाहर बनाया जा सकता है। कुसमाहा, जगनपुर और भदरसा गांव पर मस्जिद निर्माण कराया जा सकता है।

बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाने वाले बाबर के सेनापति मीर बकी की मजार कुसमाहा गांव में ही बनी है। राज्य सरकार ने इस तरह की एक और जगह राम जन्मभूमि मंदिर के पीछे आरा मशीन के पास भी चिह्नित की है। मस्जिद निर्माण का काम सुन्नी वक्फ बोर्ड को ही कराना है।

ये भी पढ़ें…अयोध्या फैसला: विवाद की शाम को आखिरी सलाम, देखें आस्था की रोचक तस्वीरें

प्रस्तावित ट्रस्ट के स्वरूप पर हुई बात

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने बाद ही केंद्र हरकत में आ गया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और गृह सचिव अजय भल्ला समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक हुई। पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की गई और सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित ट्रस्ट के स्वरूप पर भी बात हुई।

हालांकि संघ परिवार अभी ट्रस्ट में शामिल होने को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रहा है लेकिन केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि इसमें शंकराचार्य, श्री श्री रविशंकर और जग्गी वासुदेव जैसे जाने-माने धर्माचार्य, प्रतिष्ठित समाजसेवी और विभिन्न क्षेत्रों की सम्मानित हस्तियों को शामिल किया जाएगा।

ये भी पढ़ें…अयोध्या में मंदिर भी बनेगा और मजिस्द भी!

ट्रस्ट का काम मंदिर निर्माण की व्यवस्था सुनिश्चित करना है

सरकार द्वारा गठित किए जाने वाले ट्रस्ट का काम मंदिर निर्माण की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण पिछले 26 वर्षों से मंदिर के लिए पत्थर जुटा रहा राम जन्मभूमि न्यास ही कराएगा। राम जन्मभूमि न्यास के पास तीन मंजिला मंदिर के लिए जरूरी निर्माण सामग्री में से पहली मंजिल के पत्थर पहले से ही तराशे हुए रखे हैं।

विहिप के महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन के मुताबिक जैसे-जैसे निर्माण कार्य होगा, मंदिर के लिए बाकी निर्माण सामग्री भी तैयार हो जाएगी। जन्म भूमि न्यास की योजना अगले तीन वर्षों में मंदिर निर्माण पूरा कर लेने की है।

ये भी पढ़ें…बाबर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक, ऐसा रहा राम जन्मस्थान अयोध्या का सफर