बड़ी खबर, अब दर्ज मूल्य की केवल एक फीसद देनी होगी स्टाम्प ड्यूटी

स्टाम्प मंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश भर में सभी धनराशि के ई-स्टाम्प जारी किये जा रहे हैं। ई-स्टाम्पिंग प्रणाली को जन सामान्य तक पहुंचाने के उद्देश्य से स्टाम्प वेंडरों को अधिकृत संग्रह केन्द्र (एसीसी) नियुक्त करने की अनुमति प्रदान की गयी है। इसके साथ ही एसबीआई के माध्यम से निबन्धन शुल्क ऑनलाइन जमा किये जाने की व्यवस्था भी लागू की गयी है।

लखनऊः निबंधित होने वाले विलेखों पर उल्लिखित मूल्य का 02 प्रतिशत एवं अधिकतम 20 हजार रूपये तक स्टाम्प ड्यूटी लिये जाने के स्थान पर विलेखों पर उल्लिखित मूल्य का 01 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी कर दी गयी है। स्टाम्प ड्यूटी की इस व्यवस्था को लागू करने से 60 से 70 प्रतिशत जनसामान्य को राहत मिलेगी साथ ही राजस्व में करीब 2000 करोड़ की वृद्धि होगी।

यह बात प्रदेश के स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल ने आज यहॉ बापू भवन स्थित सभागार में प्रेसवार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में 15622.60 करोड़ रूपये का सकल राजस्व की प्राप्ति हुई है।

इसे भी पढ़ें

रुकेगी फर्जी स्टांपों की छपाई, सरकार करने जा रही है ये काम

स्टाम्प मंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश भर में सभी धनराशि के ई-स्टाम्प जारी किये जा रहे हैं। ई-स्टाम्पिंग प्रणाली को जन सामान्य तक पहुंचाने के उद्देश्य से स्टाम्प वेंडरों को अधिकृत संग्रह केन्द्र (एसीसी) नियुक्त करने की अनुमति प्रदान की गयी है। इसके साथ ही एसबीआई के माध्यम से निबन्धन शुल्क ऑनलाइन जमा किये जाने की व्यवस्था भी लागू की गयी है।

स्टाम्प वादों के खात्मे को एक मुश्त समाधान योजना

श्री जायसवाल ने कहा कि विभाग द्वारा लम्बित स्टाम्पवादों के त्वरित निस्तारण हेतु ‘एक मुश्त समाधान योजना‘ लागू की गई है। इस योजना के प्रभावी होने से लम्बित स्टाम्पवादों के निस्तारण एवं राजस्व आय में वृद्धि होगी।

इसे भी पढ़ें

गोशालाओं के लिए जमीन खरीदने पर मिलेगी स्टाम्प ड्युटी से छूट

इस योजना के माध्यम से लम्बित स्टाम्पवादों का त्वरित निस्तारण होगा, स्टाम्पवादों के अन्तर्गत स्टाम्प कमी की राशि राज्य को प्राप्त होगी, जिसके फलस्वरूप राजस्व में अभिवृद्धि हो सकेगी। समाधान योजना के अन्तर्गत पक्षकारों को मात्र 100 रू0 का टोकन अर्थदण्ड देना होगा और शेष अर्थदण्ड से मुक्ति होगी, जिससे पक्षकारों को आर्थिक राहत प्राप्त होगी और पक्षकारों को न्याय में विलम्ब के कारण बढ़ने वाली ब्याज की देयता से राहत प्राप्त हो सकेगी तथा स्टाम्पवादों की संख्या में कमी आयेगी।