बिना नामांकन बने BJP जिलाध्यक्ष: तो क्या स्मृति को खुश करने के लिए हुआ ऐसा?

गुरुवार को बीजेपी ने प्रदेश के ग्यारह जिलाध्यक्षों की सूची जारी की। इसमें अमेठी के जिलाध्यक्ष की नियुक्ति पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

अमेठी: सत्ताधारी दल यूपी में कुछ मुद्दों पर पहले से घिरी है। विपक्ष उसके विरुद्ध सड़क से सदन तक हमलावर है। इसकी वजह है कि बीजेपी खुद अपने कुछ कदमों से विपक्षियों को बोलने को मौका दे देती है। हुआ ये कि गुरुवार को बीजेपी ने प्रदेश के ग्यारह जिलाध्यक्षों की सूची जारी की। इसमें अमेठी के जिलाध्यक्ष की नियुक्ति पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

बिना नामांकन बने जिलाध्यक्ष

दरअसल, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने गुरुवार को यूपी के 11 जिलाध्यक्षों के नामों की सूची जारी की जिसमें काशी क्षेत्र के जिलाध्यक्ष के नाम भी सम्मिलित है। मुख्यालय से जारी सूची में अमेठी के भी जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा हुई है। हालांकि यहां पर हुई जिलाध्यक्ष की नियुक्ति मानको को दरकिनार करके की गई है। बीजेपी प्रदेश नेतृत्व ने काशी क्षेत्र के अमेठी से मौजूदा जिलाध्यक्ष दुर्गेश त्रिपाठी को पुनः जिलाध्यक्ष बनाया है।

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दुर्गेश की पहचान अमेठी में केंद्रीय मंत्री एवं सांसद स्मृति ईरानी के निकटतम नेता के रूप में होती है। गुरुवार को जिलाध्यक्ष के रूप में उनके नाम की हुई घोषणा के बाद अमेठी में सियासी पारा गर्म हो गया है। वहीं पार्टी के अंदर गुटबाजी ने और व्यापक रूप ले लिया। कारण ये है कि 20 नंबर 2019 को प्रदेश नेतृत्व ने काशी क्षेत्र के अमेठी से जिलाध्यक्ष पद के नामांकन की जो सूची तैयार की थी उसमे जिलाध्यक्ष दुर्गेश त्रिपाठी का नाम दर्ज नही था। बावजूद इसके पार्टी ने जिस नेता ने नामांकन ही नही किया उसे जिलाध्यक्ष बनाकर अपने लिए एक मुसीबत मोल ली है।

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ये है नामांकन सूची

कांग्रेस एमएलसी ने कहा- BJP नियमों में भरोसा नही रखती

वहीं इस मामले पर कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य दीपक सिंह ने कहा के भारतीय जनता पार्टी नियमों में भरोसा नही रखती। वो अधिकतर काम नियम विरुद्ध करती है। अब ये तो उनका अंदरूनी मामला है।

क्या कहना है जिलाध्यक्ष का

इस बाबत जिलाध्यक्ष दुर्गेश त्रिपाठी बताते हैं कि प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें मनोनीत किया है, और वो पार्टी को 2019 के चुनावी परिणाम की तरह और शिखर पर ले जाएंगे।