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यूपी का रिश्वतखोर एडीओ, विकास कार्य की फाइल पास करने के लिए लिया घूस

प्रदेश में जब 2017 में बीजेपी की सरकार बनी थी तो दावा किया गया था के यूपी से भ्रष्ट्राचार खत्म हो जाएगा। अब ढ़ाई साल बाद हर दिन की तरह अमेठी में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। वायरल वीडियो में एडीओ पंचायत खुलेआम विकास कार्यों से जुड़ी फ़ाइल पास करने के लिए रिश्वत ले रहें हैं।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 29 Jan 2020 3:51 PM GMT

यूपी का रिश्वतखोर एडीओ, विकास कार्य की फाइल पास करने के लिए लिया घूस
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अमेठी: प्रदेश में जब 2017 में बीजेपी की सरकार बनी थी तो दावा किया गया था के यूपी से भ्रष्ट्राचार खत्म हो जाएगा। अब ढ़ाई साल बाद हर दिन की तरह अमेठी में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। वायरल वीडियो में एडीओ पंचायत खुलेआम विकास कार्यों से जुड़ी फ़ाइल पास करने के लिए रिश्वत ले रहें हैं। मामला केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र से जुड़ा है तो चर्चा तो बनती ही है। ऐसे में वीडियो वायरल होते ही जिले में हड़कंप मच गया है।

शुकुल बाजार ब्लाक का मामला

मिली जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो जिले के शुकुल बाजार विकास खंड का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में यहां पर तैनात एडीओ पंचायत राम मिलन ने विकास कार्यों की फ़ाइल पास करने के लिए पांच-पांच सौ की 16 नोट (यानी आठ हजार रुपए) लिए हैं। पैसे देने के बाद पीड़ित काम करने की बात कर रहा है। लेकिन एडीओ कह रहें हैं कि 12 बचे हैं।

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इसके जवाब में पीड़ित ये कहता हुआ सुनाई दे रहा कि दो और ले लेना साहब। लेकिन उंगलियों से इशारा करते हुए यानी हिदायत देते हुए एडीओ कह रहे कि सात हजार और। जिस पर पीड़ित ने कहा दो और ले लेना, कहां से लाएं। इस मामले में जब डीएम अरूण कुमार से बात की गई तो उन्होंने मामले की जानकारी नही होने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर वीडियो सामने आएगा तो जांच कर दोषी के विरुद्ध अवश्य कार्यवाही की जाएगी।

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नोटबंदी के बाद भी नहीं टूटी भ्रष्ट्राचार की कमर

वैसे वीडियो सामने आने के बाद एक बात तो तय हो गई है के जो जिला जितना वीवीआईपी है उस जिले में सरकारी कार्यों का रेट उतना ही महंगा है। वैसे सरकार ने नोटबंदी करने के बाद बड़े बड़े दावे किए थे। सरकार ने कहा था कि इससे आतंकवाद और भ्रष्ट्राचार की कमर टूट जाएगी। लेकिन सच्चाई ये है के न तो आतंकवाद की कमर टूटी और न भ्रष्ट्राचार की। हां, बड़ी नोट आ जाने के बाद भ्रष्ट्राचार को और बढ़ावा मिल गया है।

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