बीजेपी के इस कद्दावर नेता ने नागरिकता संशोधन कानून पर कही ये बड़ी बात

इस कानून से किसी भी भारतीय मुस्लिम के हितों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। व्यापक बातचीत, विचार विमर्श और सभी पक्षों से बातचीत के बाद इस कानून की रूपरेखा तैयार की गई थी।

Published by Aditya Mishra Published: December 20, 2019 | 9:41 pm
Modified: December 20, 2019 | 9:42 pm
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लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने आज मुस्लिम समाज के धर्म गुरुओं, सूफी संतों, प्रबुद्ध लोगों से भेंट के दौरान कहा कि नागरिकता संशोधन कानून किसी भी भारतीय की, चाहे वह किसी भी धर्म का मानने वाला हो उसके अधिकार को प्रभावित नहीं करता है। यह केवल अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में सताए गए धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करने की बात करता है।

इस कानून से किसी भी भारतीय मुस्लिम के हितों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। व्यापक बातचीत, विचार विमर्श और सभी पक्षों से बातचीत के बाद इस कानून की रूपरेखा तैयार की गई थी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने सभी से अपील की कि वे किसी के भी बहकावेें में न आए और शान्ति व सौहार्द बनाए रखने में अपनी भूमिका का निर्वहन करें।

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पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष इसे लेकर केवल भ्रम फैलाने और मुस्लिमों को गुमराह करने का काम कर रहा है। पिछले 60 सालों में विपक्ष ने यही रणनीति अपनाकर अल्पसंख्यकों को बुनियादी सुविधाओं और उनके अधिकार से वंचित रखा।

अब जब मोदी-योगी सरकार की ‘सबका साथ-सबका विकास‘ की नीति से उन्हें भी मुख्यधारा से जोड़कर विकास में हिस्सेदार होने का मौका मिल रहा है तो विपक्ष अपनी खिसकती जमीन को बचाने के लिए बंटवारे, अराजकता और हिंसा की राजनीति कर रहा है।

खुद लोकसभा में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पड़ोसी देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिक अधिकार दिए जाने और उनके सम्मान की रक्षा का अनुरोध किया था, लेकिन, अब वही कांग्रेस मुस्लिम समुदाय को भड़का कर घटिया राजनीति कर रही है।

नागरिकता संशोधन कानून से मुसलमानों  को कोई खतरा नहीं: कल्वे जवाद

मुस्लिम धर्मगुरू मौलाना कल्वे जवाद ने कहा नागरिकता संशोधन कानून से मुसलमानों  को कोई खतरा नहीं है। किसी को यदि इस कानून से कोई भ्रम है तो बात करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि फसाद से पोलिटिक्ल पार्टियों का फायदा होगा और मुसलमानों का नुकसान होगा। पार्टियां यही चाहती है कि मुसलमानों का नुकसान हो ताकि वह मुसलमानांे की हमदर्दी हासिल कर सके।

इस दौरान शिया धर्मगुरू मौलान रजा हुसैन, सूफी धर्मगुरू मौलाना मोइनुद्दीन अशरफ, शिया धर्मगुरू मौलाना शबाहत हुसैन, सूफी धर्मगुरू मौलाना जलालुद्दीन, मौलाना हसनैन बकई, मौलाना अलीशाह मलंग सहित मुस्लिम समाज के कई नुमाइंदे मौजूद रहे। जिन्होने प्रदेश के चैनों अमन के लिए समाज में जाकर उनका भ्रम दूर करने के लिए जनजागरण करने का निश्चिय लिया।

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