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पासपोर्ट-वीजा मामले में चीनी नागरिक की जमानत कड़े शर्तों के साथ मंजूर

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बिना पासपोर्ट बीजा के नेपाल के रास्ते भारत में घुसते पकड़े गए चाइनीज नागरिक ली जिकुन की कड़ी शर्तों के साथ जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति रामकृष्ण गौतम ने दिया है।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 8 May 2019 2:52 PM GMT

पासपोर्ट-वीजा मामले में चीनी नागरिक की जमानत कड़े शर्तों के साथ मंजूर
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बिना पासपोर्ट बीजा के नेपाल के रास्ते भारत में घुसते पकड़े गए चाइनीज नागरिक ली जिकुन की कड़ी शर्तों के साथ जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति रामकृष्ण गौतम ने दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि महाराजगंज के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिये याची को पासपोर्ट बीजा अवधि बढ़ाने की अर्जी देने और बीजा पासपोर्ट मिलने के बाद रिहा करने का आदेश दिया है।

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कोर्ट ने कहा है कि पासपोर्ट के लिए याची की पेशी जरूरी हो तो जेल अधीक्षक पेश करे। कोर्ट ने कहा है कि सीजेएम महाराजगंज पासपोर्ट बीजा जमा कराकर संतोषजनक प्रतिभिति लेकर रिहाई का आदेश दे।

कोर्ट ने यह भी शर्त लगायी है कि बिना कोर्ट की पूर्व अनुमति वह क्षेत्राधिकार से बाहर नहीं जायेगा। साक्ष्यां से छेड़छाड़ नहीं करेगा। दूसरा अपराध नहीं करेगा। गवाहों पर दबाव नहीं डालेगा।

कोर्ट ने बुलाये जाने पर पेश होगा। इन शर्तों के उल्लंघन करने पर अधीनस्थ अदालत को जमानत निरस्त करने का अधिकार होगा। याचिका पर भारत सरकार के अधिवक्ता जी.पी. सिंह ने भारत सरकार के सम्बन्धित विभाग से सहयोग न मिलने के बावजूद जमानत अर्जी का जोरदार विरोध किया।

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याची अधिवक्ता सन्त शरण उपाध्याय व श्रीमती साधना उपाध्याय का कहना था कि याची वैध पासपोर्ट बीजा पर भारत पढ़ने आया था। 2008 से कई कोर्स पूरे किये। वह 2011 से चाइनीज भाषा के अनुवादक को चेन्नई में नौकरी कर रहा है। 2017 में पासपोर्ट बीजा खो गया किन्तु एफआईआर नहीं लिखाई।

सह अभियुक्त सैयद इमरान नसीर ने पैनकार्ड व आधार कार्ड बनवाने में मदद की। आई डी बी आई बैंक में स्टीवन जेना के नाम से खाता खुलवाया। फर्जी दस्तावेज बनवाये और भारत से नेपाल बार्डर पार करने में मदद की।

जब वह नेपाल से भारत में सोनौली महाराजगंज में 9 जुलाई 18 को घुसा तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया। याची को 20 अक्टूबर 8 को पासपोर्ट बीजा मिला था जो 19 अक्टूबर 18 तक वैध था। इसके बाद नही बढ़ाया जा सका। कोर्ट ने कड़ी शर्ते लगाते हुए जमानत मंजूर कर ली है।

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