योगी सरकार को जोरदार झटका! अभी-अभी आया HC का फैसला, लगी रोक

 उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को इलाहाबाद हाई-कोर्ट ने जोरदार झटका दिया है। बता दें कि इलाहाबाद हाई-कोर्ट ने ओबीसी की 17 जातियों को एससी में शामिल करने पर सीएम योगी ने फैसला लिया था। जिस पर अब रोक लगा दी गई है।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को इलाहाबाद हाई-कोर्ट ने जोरदार झटका दिया है। बता दें कि इलाहाबाद हाई-कोर्ट ने ओबीसी की 17 जातियों को एससी में शामिल करने पर सीएम योगी ने फैसला लिया था। जिस पर अब रोक लगा दी गई है। वहीं इस फैसले को लेकर विपक्ष लगातार योगी सरकार पर हमला बोल रहा था।

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यूपी में वोट-बैंकिग को लेकर जातिवाद हमेशा ही नेताओं के लिए एक बड़ा मुद्दा बना रहता है। इसी को लेकर यूपी सीएम योगी ने 17 जातियों को एससी में शामिल करने को लेकर फैसला लिया था। जोकि इस फैसले पर अब सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।

आपको बता दें कि जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राजीव मिश्र की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकार के फैसले को गलत माना है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के फैसले लेने का अधिकार सरकार को नहीं था।

इस पर हाई कोर्ट ने योगी सरकार से कहा कि प्रदेश सरकार को इस तरह का फैसला लेने का अधिकार नहीं है। सिर्फ संसद ही एसटी/एससी जातियों में बदलाव करने का अधिकार रखती है।

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सुप्रीम कोर्ट से इन जातियों को मिला था दर्जा

जानकारी के लिए बता दें कि योगी सरकार ने 24 जून को जातियों को लेकर शासनादेश जारी किया था। योगी सरकार ने 17 पिछड़ी जातियों (ओबीसी) को अनुसूचित जातियों (SC) की सूची में शामिल कर दिया है।

योगी सरकार ने इन जातियों को अनुसूचित जातियों की लिस्ट में शामिल करने के पीछे का कारण बताते हुए कहा था कि ये जातियां सामाजिक और आर्थिक रूप से ज्यादा पिछड़ी हुई हैं।

इन 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र देने का फैसला किया था। इसके लिए जिला अधिकारियों को इन 17 जातियों के परिवारों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया गया था।

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ये हैं पिछड़ी जातियां

ये पिछड़ी जातियां मल्लाह, केवट, कश्यप, भर, धीवर, प्रजापति, राजभर, कहार, कुम्हार, धीमर, मांझी, बाथम, निषाद, बिंद, मछुआरा, तुरहा, गौड़ इत्यादि हैं। इन पिछड़ी जातियों को अब एससी कैटेगरी की लिस्ट में डाला गया था। योगी सरकार ने जिला अधिकारी को इन 17 जातियों के परिवारों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।