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इन वजहों से केजरीवाल को मिली कामयाबी, धरे रह गए भाजपा के सारे दावे

भाजपा ने चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में शाहीनबाग के मुद्दे को प्रमुखता से उछालकर ध्रुवीकरण की पूरी कोशिश की मगर अरविन्द केजरीवाल को जितनी भारी विजय मिली है उससे साफ है कि भाजपा अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सकी।

SK Gautam

SK GautamBy SK Gautam

Published on 11 Feb 2020 2:26 PM GMT

इन वजहों से केजरीवाल को मिली कामयाबी, धरे रह गए भाजपा के सारे दावे
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अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने भारी जीत दर्ज की है। पूरी ताकत लगाने के बावजूद भाजपा दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सकी। भाजपा नेताओं के सारे दावे धरे के धरे रह गए। कांग्रेस तो खाता तक नहीं खोल सकी। शाहीनबाग का मुद्दा भी इस चुनाव में काफी उछला। माना जा रहा था कि इस मुद्दे को लेकर ध्रुवीकरण हो सकता है मगर ऐसा नहीं हो सका। केजरीवाल ने सकारात्मक चुनाव प्रचार किया और पांच साल के अपने कामकाज के आधार पर वोट मांगा। जनता ने उन्हें विकास के पैमाने पर खरा मानते हुए अगले पांच साल के लिए जनादेश दे दिया।

नहीं हो सका धुव्रीकरण

भाजपा ने चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में शाहीनबाग के मुद्दे को प्रमुखता से उछालकर ध्रुवीकरण की पूरी कोशिश की मगर अरविन्द केजरीवाल को जितनी भारी विजय मिली है उससे साफ है कि भाजपा अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सकी। केजरीवाल ने एक बार भी शाहीनबाग नहीं गए और इस मुद्दे पर काफी सतर्कता बरती। केजरीवाल को मुस्लिमों का पूरा समर्थन मिला क्योंकि कांग्रेस कहीं भी भाजपा को चुनौती देने की स्थिति में ही नहीं थी। ऐेसे में मुस्लिमों ने भाजपा को हराने के लिए आप को जमकर समर्थन दिया। इसके साथ ही केजरीवाल दूसरे वर्गों का समर्थन पाने में भी सफल रहे। मुस्लिम बहुल सीटों पर विजय के साथ ही आप अपने काम के दम पर अन्य सीटें भी जीतने में कामयाब रही।

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मोदी पर निशाने से परहेज

इस बार के चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी ने काफी सतर्कता बरती। अरविन्द केजरीवाल सहित पार्टी के दूसरी कतार के नेताओं ने भी पीएम मोदी पर सीधा निशाना साधने से परहेज किया। आप नेता पीएम मोदी पर हमले की जगह अपने पांच साल के काम पर ही वोट मांगते रहे। अरविन्द केजरीवाल अब पहले से काफी परिपक्व राजनीतिज्ञ हो गए हैं। जब पाक के मंत्री फवाद चौधरी ने पीएम मोदी पर व्यंग्य कसते हुए आप के समर्थन की बात कही तो केजरीवाल ने चौधरी को लताड़ लगाते हुए कहा कि मोदी जी हमारे भी पीएम हैं। पाक हमारे आंतरिक मामलों में दखल न दें। आप ने यह समझने में कोई गलती नहीं की कि अगर उन्होंने पीएम मोदी पर सीधा कोई वार किया तो उन्हें इसका खामियाजा भुगताना पड़ेगा। केजरीवाल की इस परिपक्वता ने आप को जिताने में बड़ी भूमिका निभाई।

बिजली-पानी व शिक्षा का मुद्दा

अरविन्द केजरीवाल और उनकी पार्टी ने बिजली-पानी के मुद्दे को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और उसे इस मुद्दे पर आम लोगों का बड़ा समर्थन भी मिला। आप नेताओं ने बिजली, पानी और शिक्षा के क्षेत्र में हुए कार्यों की ज्यादा चर्चा की और इन मुद्दों पर जनता का समर्थन पाने में कामयाबी हासिल की। प्रचार के दौरान केजरीवाल ने जब-जब जनता से संवाद किया तब-तब जनता ने मुफ्त बिजली-पानी के मुद्दे पर केजरीवाल को जमकर समर्थन दिया। भाजपा ने केजरीवाल पर मुफ्तखोरी के आरोप लगाए और उनकी छवि को नकारात्मक बनाने की कोशिश की मगर उसे कामयाबी नहीं मिली।

सीएम का मजबूत चेहरा

आम आदमी पार्टी ने चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में सीएम चेहरे का सवाल प्रमुखता से उठाया। जहां आप के पास अरविन्द केजरीवाल सरीखा सीएम का सशक्त चेहरा था वहीं भाजपा इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं दे पा रही थी। अरविंद केजरीवाल ने चुनावी सभाओं से लेकर प्रेस कांफ्रेंस तक हर जगह अमित शाह को सीएम उम्मीदवार घोषित करने की चुनौती दी, मगर भाजपा जनता के बीच इस मुद्दे पर भी कोई जवाब नहीं दे सके। इसका कारण यह था कि उनके पास कोई मजबूत चेहरा नहीं था।

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सकारात्मक चुनाव प्रचार

आम आदमी पार्टी ने सकारात्मक चुनाव प्रचार किया। पार्टी के नेताओं ने अपनी चुनावी सभाओं में कोई सस्ती बात नहीं की और छिछले आरोप भी नहीं लगाए। दूसरी ओर भाजपा की ओर प्रचार के दौरान कई नेताओं ने छिछले आरोप लगाए। एक भाजपा नेता ने तो केजरीवाल को आतंकवादी तक बता दिया। आप की ओर से भाजपा के आरोपों का सधा हुआ जवाब दिया गया मगर भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता को लेकर इस तरह की बयानबाजी नहीं की गई। आप कार्यकर्ता और नेता अपनी सरकार के पांच साल के कामकाज पर ही वोट मांगते रहे और विकास के मुद्दों को ही फोकस किया। माना जा रहा है कि सकारात्मक चुनाव प्रचार का पार्टी को काफी फायदा मिला।

मोहल्ला क्लीनिक का फायदा

मौजूदा दौर में स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा भी काफी अहम हो गया है। मोहल्ला क्लीनिक ने भी केजरीवाल सरकार को काफी लोकप्रियता दिलाई। आम आदमी पार्टी मोहल्ला क्लीनिक पर लगी भीड़ को वोटों में तब्दील करने में कामयाब रही। आप सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को आकर्षित किया। हालांकि भाजपा ने मोहल्ला क्लीनिक के मुद्दे पर भी आम आदमी पार्टी को घेरने की कोशिश की पर चुनाव परिणाम इस बात की तस्दीक करते हैं कि भाजपा को इसमें तनिक भी कामयाबी नहीं मिली।

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