आपके किसी अपने को सांप ने काटा तो जाएं सत्ती मां की शरण में

इस जगह को आम जन मानस अमवां सिंह गांव के सत्ती मां के नाम से भी जानते है । लोग बताते है की अमवां गांव के परमल सिंह को जहरीले सांप ने काट लीया था। जब ये बात उनकी पत्नी को पता चला तो घर से दौड़ते हुए उस जगह जाने लगीं जहां परमल सिंह को सापं ने काटा था ।

गाजीपुर: जिले के अमवां सिंह गांव में मां सत्ती का स्थान स्थित है जहां आने से सांप का विष अपने आप ही उतर जाता है । ये जगह जिला मुख्यालय से करीब 50 कि0मी०की दुरी पर स्थित है।  ये जगह बाराचवर ब्लाक मुख्यालय के अन्तर्गत पड़ता है । इस जगह पर यू पी के साथ साथ बिहार, महाराष्ट्र,  हरिद्वार से सापं के काटे हुए लोग आते है। इस जगह को लोग मां सत्ती धाम से भी लोग जानते है ।

लोग अमवां सिंह गांव के सत्ती मां के नाम से भी जानते है

इस जगह को आम जन मानस अमवां सिंह गांव के सत्ती मां के नाम से भी जानते है । लोग बताते है की अमवां गांव के परमल सिंह को जहरीले सांप ने काट लीया था। जब ये बात उनकी पत्नी को पता चला तो घर से दौड़ते हुए उस जगह जाने लगीं जहां परमल सिंह को सापं ने काटा था । लोगो ने बताया कि जब मां सत्ती दौड़ कर जाने लगीं तो बिच रास्ते मे एक बड़ा तालाब पड़ा उस तलाब के पानी के ऊपर ही चलने लगी और उस स्थान पहुंच गई।

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जहां उनके पती को साप ने काटा था। यहां के कुछ बुजुर्गों का कहना है की सत्ती होने लगी तो उस वक्त कहां कि आज से इस स्थान पर सापं के काटे हुए जो व्यक्ति आयेगा तो सापं का जहर ऊतर जाएगा ।

इस स्थान उस वक्त जंगल हुआ करता था

इस स्थान उस वक्त जंगल हुआ करता था । जंगल से सटा हुआ तालाब और तालाब के उस पार छोटा सा गांव बसा वैसे इस गांव का नाम अमवां सिंह कैसे पड़ा यहां के लोगो का कहना है कि इस बारे मे हमे कुछ जानकारी नहीं है।गांव के लोगों का कहना है की आज से करीब बीस साल पहले यहां कुछ नहीं था।

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सिर्फ मां सती का एक छोटा सा स्थान और अगल-बगल जंगल हुआ करता था । यहां चरवाहे अपने पशुओं को लेकर आते थे उस वक्त यहां सिर्फ गांव के लोग ही सांप के काटने पर आते थे और ठीक हो जाते थे। (ये स्थान कब हुआ बिख्याता) स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जगह आज से करीब 20 साल पहले सती मां के नाम से एक भोजपुरी फिल्म आई थी तभी से यह जगह काफी प्रचलित हो गया ।

आज यूपी के हर जगह से लोग आते है

सावन व नवरात्रि मे होती है लाखो की भीड़ वैसे तो इस जगह पर साल के बारहो महीने भीड़ लगीं रहती है लेकिन सोमवार और शुक्रवार को भीड़ अत्यधिक होती है सावन और नवरात्रि के महीने में यूपी के साथ साथ बिहार के लोग भी आते हैं जिससे काफी भीड़ उमड़ती है सावन के सोमवार और शुक्रवार को भीड़ की वजह से करीब 4 किलोमीटर तक गाड़ियों की लम्बी लाइनें लग जाती है ।और मुख्य मार्ग जाम हो जाता है।

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आज भी मौजूद है तलाब

उस जगह पर आज भी वो तालाब मौजूद है । जिस तलाब के पानी के उपर मां सत्ती दौड़ते हुए अपने पती परमल सिंह के पास पहुंच कर अपने पती के शव के साथ सत्ती हो गई थी। एक स्थानीय व्यक्ति का कहना है कि ये तालाब बहुत बड़ा था। लेकिन समय के साथ साथ तालाब भरता गया और जो बचा था।यहां के दबंग लोग मिट्टी गिराकर पाट दिये। तालाब के नाम पर बस नीसानी बचा है।

इस जगह का महत्व

यहां के मंहत अंजनी दास जी का कहना है कि। इस जगह पर अगर सांप के काटे हुए व्यक्ति बिना कहीं दवा व झाड़ फुक कराये आते है तो वो व्यक्ति यहां से ठीक होकर हीं जाते है।यहां वही लोग नहीं बच पाते है ।जो लोग कहीं दवा व झाड़ फुक कराये रहते है