तैयार हो रहा एक और विकास दुबे, 16 साल से दबंग कोटेदार पर मेहरबान

मामला जनपद के कर्नलगंज तहसील के 29 मजरों और लगभग साढ़े चार हजार आबादी वाले ग्राम पंचायत परसा गोंडरी का है। सरकार बसपा की हो या सपा की या फिर भाजपा लेकिन कर्नलगंज तहसील में परसा गोंडरी के कोटेदार राजेन्द्र तिवारी का ही सिक्का चलता है।

गोंडा। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार को लेकर सदैव जीरो टालरेंस की नीति रही है। नियम के खिलाफ कुछ भी हो यह उन्हें बर्दाश्त नहीं है, लेकिन यहां कुछ अधिकारी काकस बनाकर सरकार की साख को पलीता लगाने का कार्य कर रहे हैं। पूर्ति निरीक्षकों और तहसील कर्मियों की सहभागिता से दबदबा कायम कर 16 वर्षों से एक कोटेदार गरीबों का राशन डकार रहा है। शिकायतों में आरोप साबित हुए तब भी मामूली अर्थदंड लगाकर भ्रष्टाचार पर पर्दा डालते हुए अधिकारी अभयदान देते रहे।

आयुक्त, जिलाधिकारी, मुख्य राजस्व अधिकारी और एसडीएम का आदेश भी इस भ्रष्ट कोटेदार का बाल बांका नहीं कर सका। कारण कुछ भी रहा हो लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने नियम कानूनों को ताक पर रखकर उसकी मदद की। कोटेदार के मनमानी की शिकार जनता कार्रवाई के लिए अब भाजपा सरकार में भी आपूर्ति विभाग, तहसील के आला अफसर और जिले के हुक्मरानों की चौखट पर माथा टेक रही है। उधर चार माह पहले निलम्बित कोटेदार पर गुपचुप तरीके से नौंवीं बार मामूली अर्थदंड लगाकर दुकान बहाली की प्रक्रिया चल रही है।

16 वर्ष से शिकायत कर थके ग्रामीण

मामला जनपद के कर्नलगंज तहसील के 29 मजरों और लगभग साढ़े चार हजार आबादी वाले ग्राम पंचायत परसा गोंडरी का है। सरकार बसपा की हो या सपा की या फिर भाजपा लेकिन कर्नलगंज तहसील में परसा गोंडरी के कोटेदार राजेन्द्र तिवारी का ही सिक्का चलता है। तभी तो राशन वितरण में अनियमितता और कालाबाजारी के आरोपों की पुष्टि के बाद भी सिर्फ अर्थदंड और चेतावनी की खानापूर्ति से वह आज भी कोटेदार बना हुआ है। इस कोटेदार के कारनामों से कई बार प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी संकट खड़ा हुआ।

शायद ये इकलौता कोटेदार है, जिनपर आजतक बर्खास्तगी की कार्यवाई नहीं की गई। शुरुआत से ही गरीबों के लिए संचालित उचित दर की दुकान को मनमाने तरीके से चलाने के लिए कुख्यात राजेन्द्र तिवारी के खिलाफ समय समय पर ग्रामीणों ने शिकायत की और का विरोध किया लेकिन अपने प्रभाव के चलते हर बार वह बच निकलता है। लगातार 16 वर्ष से शिकायत करते करते ग्रामीण थक गए लेकिन आज तक कोटेदार का बाल बांका नही हुआ, न ही पीड़ितों को न्याय मिल सका।

मामूली अर्थदंड से बहाली की संस्तुति

ग्राम पंचायत परसा गोंडरी की निवासी सोनी पत्नी अजीजुल, जैनुलनिशा पत्नी शेर मोहम्मद, शैल कुमारी पत्नी गोविन्दराम, मालती देवी पत्नी मनोज कुमार एवं निमोनी पत्नी कन्हैयालाल ने जिलाधिकारी को प्रेषित पत्र में कहा है कि बार-बार आरोप सिद्ध होने के बाद मात्र अर्थदंड देकर अभयदान दिए जाने से यहां का कोटेदार दबंगई से कोटे की दुकान पर पर जमा हुआ है। गत वर्ष गांव के राम मनोहर, मनोज कुमार समेत कई अन्य द्वारा दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र पर अफसरों के आदेश पर क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक ने गांव पहुंच कर जांच की और अंत्योदय और पात्र गृहस्थी योजना की कार्डधारक श्रीमती सीमा पत्नी संजय समेत 31 महिलाओं के बयान दर्ज किए।

इस जांच में कोटेदार राजेन्द्र तिवारी को अंन्त्योदय और पात्र गृहस्थी योजना के लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा से कम राशन देने, कुछ लाभार्थियों को 3-4 माह का खाद्यान्न न देने तथा प्राक्सी वितरण के समबन्ध में अभिलेख न उपलब्ध करा पाने के कारण उ.प्र. आवश्यक वस्तु (विक्रय एवं वितरण नियंत्रण विनियमन) आदेश 2016 व अनुबंध पत्र की शर्तों के अंर्तगत दण्डनीय मानते हुए जांच अधिकारी पूर्ति निरीक्षक ने अपनी आख्या प्रस्तुत की तो उपजिलाधिकारी कर्नलगंज द्वारा 25 जनवरी 2020 को उसकी दुकान का अनुबंध पत्र निलम्बित कर दिया गया।

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देवी पाटन मंडल के न्यायालय में अपील की 

एसडीएम के इस आदेश के विरुद्ध कोटेदार ने आयुक्त देवी पाटन मंडल के न्यायालय में अपील कर रखी है, जिसमें आगामी 08 जुलाई को ग्राहयता पर सुनवाई होनी है। ग्रामीणों की मानें तो कोटेदार राजेन्द्र के विरुद्ध कोतवाली कर्नलगंज में अपराध संख्या-643/2012 पर धारा-147, 435, 504, 506, आइपीसी के तहत अभियोग पंजीकृत है। जो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गोंडा के नयायालय में विचाराधीन भी है। जबकि शासनादेश संख्या-2715, 29.0.202-162सा./2001 खाद्य एवं रसद अनुभाग-6 दिनांकित-17.08.2002 के पैरा 10(घ) में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि दुकानदार के विरुद्ध कोई आपराधिक वाद पंजीकृत है तो उसे दुुकान आवंटित नही होगी।

इसके बावजूद आपूर्ति विभाग और तहसील प्रशासन ने मनमाने एवं गुपचुप ढंग से कोई जांच कराकर कोटा बहाली के लिए अपनी संस्तुति जिलाधिकारी को भेजा है। जबकि इस जांच की जानकारी शिकायत कर्ताओं को नहीं है। गांव में जोरों से चर्चा है कि आरोपी कोटेदार पर अर्थदंड लगाकर चेतावनी देते हुए कोटा बहाल करने की संस्तुति की गई है।

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साल 2004 से शुरु हुआ बचाने का खेल

परसा गोंडरी के उचित दर विक्रेता राजेन्द्र तिवारी द्वारा बाल पोषाहार एवं आवश्यक वस्तुओं के वितरण में अनियमितता, मापक मे घटतौली, निर्धारित मूल्य से अधिक की वसूली किए जाने और मनमानी से परेशान पीड़ित ग्रामीणों देवता प्रसाद उर्फ देव नरायन, हरी नरायन, अवध बिहारी, विश्वनाथ ने वर्ष 2004 में जिलाधिकारी व अन्य प्रशासनिक अफसरों से शिकायत की। नायब तहसीलदार हलधरमऊ द्वारा की गई जांच में आरोप की पुष्टि हुई। लेकिन 23 सितम्बर 2004 को तत्कालीन एसडीएम ने दंड स्वरुप दो हजार की जमानत की धनराशि जब्त की और कड़ी चेतावनी देकर कोटा बहाल कर दिया।

कोटेदार की कार्यप्रणाली में परिवर्तन नहीं आया तो पुनः ग्रामीणों ने शिकायत की तब फिर जांच में आरोप सिद्ध हुआ और 17 दिसम्बर 2005 को मात्र पांच सौ रुपए अर्थदंड और चेतावनी दी गई। जबकि वर्ष 2006 में जांच में आरोपों की पुष्टि पर एक हजार, 2008 में दो हजार, 2009 में दो हजार, 2010 में पांच सौ एवं 2013 में दो हजार एवं 2014 में अर्थदंड से दंडित किया गया और हर बार कड़ी चेतावनी के साथ कोटा बहाल कर दिया गया।

सीआरओ ने की थी निरस्त करने की संस्तुति

ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्य राजस्व अधिकारी वियोधन ने 16 जनवरी को ग्राम पंचायत परसा गोंडरी में विकास कार्यों की समीक्षा की जा रही थी तब पुनः ग्रामीणों ने उनसे कोटेदार द्वारा अनियमितता की शिकायत की गई। इसका जिक्र उनकी निरीक्षण टिप्पड़ी में है। इसके आधार पर तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी कर्नलगंज व जिला पूर्ति अधिकारी को कोटेदार का अनुबंध पत्र निरस्त कर नियमानुसार कार्यवाही के लिए आदेशित किया गया। किन्तु तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक की रिर्पोट पर एसडीएम ने फिर वही किया और दो हजार अर्थदंड लगाया और कड़ी चेतावनी देकर अभयदान दे दिया।

जबकि सीआरओ की निरीक्षण टिप्पड़ी में उल्लेख था कि मौके पर मौजूद सभी ग्रामीणों ने एक सुर से कोटेदार द्वारा की जा रही घटतौली, अधिक मूल्य लेने और अनियमितता की शिकायत की थी। अपने निरीक्षण टिप्पणी में सीआरओ ने उचित दर विक्रेता के विरुद्ध वितरण अनियमितता के सम्बन्ध में गंभीर तयि उलिलखित करते हुए उप जिलाधिकारी कर्नलगंज और जिला पूर्ति अधिकारी से कोटेदार का अनुबंध पत्र निरस्त कर नियमानुसार कार्यवाही किए जाने की अपेक्षा की थी, लेकिन सीआरओ के स्पष्ट निर्देश का भी उपजिलाधिकारी पर कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने मात्र दो हजार रुपए अर्थदंड से दण्डित कर दुकान बहाल कर दिया।

जिलाधिकारी का आदेश दर किनार

शिकायत कर्ता ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2006 में 08 जून को कोटेदार द्वारा अनियमितता की शिकायत की गई तो तत्कालीन जिलाधिकारी आंेकार नाथ मिश्र ने उपजिलाधिकारी कर्नलगंज को जांच कर एक सप्न्ताह में आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। लेकिन उपजिलाधिकारी हीलाहवाली करते रहे। जिस पर जिलाधिकारी ने पुनः 27 जून 2006, 09 दिसम्बर 2006 व 18 जनवरी 2007 समेत आठ स्मृति पत्र जारी करना पड़ा। उन्होंने जिला पूर्तिअधिकारी से खुली बैठक कराकर कोटेदार के सम्बन्ध में ख्याति प्राप्त करने का भी निर्देश दिया था। लेकिन उनका यह आदेश भी बेकार साबित हुआ। एसडीएम ने 26 जुलाई 2007 को एक पत्र भेजकर अवगत कराया कि जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा खण्ड विकास अधिकारी हलधरमऊ को इस आशय का पत्र 22 जनवरी 2007 को ही भेजा जा चुका है।

कमिश्नर का आदेश भी रहा बेअसर

कोटेदार की भ्रष्ट कार्यप्रणाली पर विराम न लगाने और वर्ष 2013 में एसडीएम कर्नलगंज द्वारा लीपापोती के मामले की शिकायत ग्रामवासी शंकर सरन तिवारी, शिव कुमार, रामेश्वर पुत्रगण मुन्ना, अवध बिहारी, देव नरायन आदि ने तत्कालीन आयुक्त अशोक कुमार से की तो उन्होंने तमाम जांच रिर्पोट, अभिलेखों और साक्ष्यों को देखते हुए 04 अप्रैल 2014 को उपजिलाधिकारी कर्नलगंज को पुनः जांच कराकर नियमानुसार कार्यवाही का आदेश दिया। इस पर तत्कालान एसडीएम राम अभिलाख ने क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी कर्नलगंज से पुनः जांच कराया तो आरोपों की पुष्टि हुई।

जांच में पता चला कि कोटेदार द्वारा 02-04 माह के अंतराल पर खाद्यान्न का वितरण किया जाता है। र्काउधारकों के प्रति उसका व्यवहार भी ठीक नहीं है। अनियमितताएं गंभीर प्रकृति की हैं और अनुबंध की शर्तों का उललंघन मानते हुए एसडीएम ने 29 मई 2014 को पुनः दुकान का अनुबंध पत्र निलम्बित कर दिया। लेकिन कोटेेदार के रसूख के आगे यह आदेश भी बौना साबित हुआ और अफसरों की लीपापोती के कारण भ्रष्टाचारी कोटेदार का बाल बांका नही हुआ।

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आरोपों के घेरे में तहसील, पूर्ति विभाग

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रेषित पत्र में तहसील प्रशासन और पूर्ति विभाग पर कोटेदार से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा है कि पूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली से लगता है कि कोटेदार को कालाबाजारी के एजेंट के रुप में प्रतिस्थापित करने का काम कर रहा है। तो वहीं तहसील प्रशासन भी ऐन केन प्रकारेण भ्रष्ट कोटेदार को क्लीन चिट देकर दुकान के अनुबंध पत्र की बहाली की राह आसान करने में लगा है।

क्या कहते हैं उपजिलाधिकारी

उपजिलाधिकारी कर्नलगंज ज्ञानचंद गुप्ता से परसा गोंडरी के कोटे की दुकान की जांच के सम्बन्ध में जानकारी की गई तो उन्होंने बताया कि जांच अधिकारी नायब तहसीलदार हलधरमऊ की आख्या के आधार पर मामला जिलाधिकारी के यहां भेजा जा चुका है। अब जिलाधिकारी ही इस पर निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस कोटेदार की पूर्व कार्यप्रणाली, आपराधिक वाद और दंडात्मक कार्यवाही के सम्बन्ध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

रिपोर्टर- तेज प्रताप सिंह, गोंडा

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