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इप्सेफ ने किया एलान: 14 अक्टूबर को होगा बड़ा प्रदर्शन, देश भर के कर्मचारी देंगे धरना

इप्सेफ ने केंद्र सरकार पर उपेक्षापूर्ण और नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए आगामी 14 अक्टूबर को देश के सभी जिलों में प्रदर्शन किए जाने का एलान किया है।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 7 Sep 2020 1:14 PM GMT

इप्सेफ ने किया एलान: 14 अक्टूबर को होगा बड़ा प्रदर्शन, देश भर के कर्मचारी देंगे धरना
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मनीष श्रीवास्तव

लखनऊ: इंडियन पब्लिक सर्विस एम्पलाइज फेडरेशन (इप्सेफ) ने केंद्र सरकार पर उपेक्षापूर्ण और नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए आगामी 14 अक्टूबर को देश के सभी जिलों में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए धरना प्रदर्शन किए जाने तथा प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजने का एलान किया है। इससे पूर्व 15 सितंबर को इप्सेफ द्वारा जन जागरण अभियान शुरू किया जाएगा। इसी दिन बड़े आंदोलन की घोषणा भी की जा सकती है।

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इन्होंने लिया हिस्सा

इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी पी मिश्रा ने बताया कि सोमवार को इप्सेफ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक में कई राज्यों और केंद्रीय संगठनों के पदाधिकारियों व प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि बैठक में लगभग सभी राज्यों के पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र और राज्यों की सरकारों द्वारा कर्मचारियों की पीड़ा सुनना तो दूर उनके वर्षों से लंबित मांगों पर उपेक्षापूर्ण तथा आर्थिक क्षति पहुंचाने का रवैया अपनाने से देशभर के कर्मचारी आक्रोशित हैं।

लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण वे चुप हैं और सरकार द्वारा दी जा रही पीड़ा को सहते हुए कोविड-19 के मरीजों की सेवा में सभी जान पर खेलकर लगे हुए हैं। हजारों की संख्या में कर्मचारी और उनके परिवार के लोग संक्रमित हुए हैं। कुछ की मृत्यु भी हो चुकी है। पर, खेद है कि सरकार उनकी खबर तक नहीं ले रही है।

कर्मचारियों पर काम का बोझ

उन्होंने कहा कि 50 प्रतिशत पदों पर भर्ती न किए ना जाने से कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। डॉक्टर, नर्सेज, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, प्रयोगशाला सहायक, एक्सरे और अन्य टेक्नीशियन तथा वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी बीमारी से भयभीत हो गए है। बीमार हो जाने पर उन्हें सरकारी दवा, बेड आदि सुविधा भी नहीं मिल रही है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर सरकार का ऐसा ही रवैया रहा तो वह काम करना बंद कर देंगे।

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बैठक में इप्सेफ महामंत्री प्रेमचंद्र ने कर्मचारियों की मांगों के संबंध में बताते हुए कहा कि भीषण महंगाई से इस महामारी में कर्मचारी परिवार अधिक दुखी है। इसलिए वेतन और भत्तों की कटौती तत्काल वापस की जाए। 30 वर्ष की सेवा पर जबरन रिटायरमेंट किए जाने का आदेश वापस लिया जाए, पूरे देश मे लगभग 50 लाख पद खाली हैं।

कर्मचारियों को दीपावली से पूर्व बोनस दिया जाए

इन रिक्त पदों पर 3 माह में पदोन्नतिया व नियुक्तियां कर दी जाए, इस संबंध में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के भी आदेश हैं, कोविड-19 के कारण मृत कर्मचारियों के आश्रित को 50 लाख रुपए की सहायता राशि तथा मृतक आश्रित को नियुक्ति किए जाने पर तत्काल निर्णय किया जाए, केंद्रीय रिक्रूटमेंट बोर्ड द्वारा चयनित अभ्यर्थियों में से राज्यों के कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जाए। वर्तमान चयन समितियों व आयोगों को समाप्त किया जाए तथा सभी कर्मचारियों को दीपावली से पूर्व बोनस दिया जाए।

उन्होंने कहा कि अगर कर्मचारियों की मांगे नहीं मानी गई तो आगामी 14 अक्टूबर को देशभर में धरना प्रदर्शन कर के प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन भेजा जाएगा तथा अगले आंदोलन की घोषणा की जाएगी। बैठक में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल आदि राज्यों एवं केंद्रीय संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद थे।

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