1 मई को कर्मचारी घरों में मोमबत्तियां जलाकर जताएंगे विरोध, जानें पूरा मामला

केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारियों के डीए व अन्य भत्तों में कटौती के विरोध में आगामी 1 मई को दोपहर 12 बजे देश भर के कर्मचारी अपने घरों पर मोमबत्ती जलाकर सरकार के इस फैसले का विरोध करेंगे।

लखनऊ: केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारियों के डीए व अन्य भत्तों में कटौती के विरोध में आगामी 1 मई को दोपहर 12 बजे देश भर के कर्मचारी अपने घरों पर मोमबत्ती जलाकर सरकार के इस फैसले का विरोध करेंगे तथा प्रधानमंत्री को ईमेल से ज्ञापन भेज कर सरकार से फैसले से पुनर्विचार करने का अनुरोध करेंगे।

इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीपी मिश्रा, और महामंत्री प्रेम चंद्र ने बताया कि इप्सेफ के पदाधिकारियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग करके यह निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में इप्सेफ से जुड़े केंद्र सरकार और राज्यों के कर्मचारी संगठन भागीदारी करेंगे। इसके बाद लाकडाॅउन समाप्त होने पर बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी।

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1 करोड़ कर्मचारी फैसले से खफा

वीपी मिश्रा ने बताया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा महंगाई भत्ता तथा अन्य भत्तों में कटौती करने से देश भर के कई करोड़ कर्मचारी आक्रोशित हैं।

उनका कहना है कि देश भर के आवश्यक सेवा जिसमें डॉक्टर, नर्सेस, पैरामेडिकल स्टाफ, वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी तकनीकी सेवा वाले कर्मचारी कोविड -19 जैसी भयंकर महामारी को दूर करने तथा संक्रमित लोगों को स्वास्थ्य करने में जी जान से लगे हुए हैं।

उनका परिवार भी संक्रमित हो जा रहा है इसके साथ ही देशभर के कर्मचारी स्वेच्छा से एक दिन का वेतन भी दिया हैं। लाखों कर्मचारी लाक डाॅउन में गरीबों मजदूरों को भोजन देने तथा उन्हें सामग्री उपलब्ध कराने में रात दिन लगे हैं।

जिससे कोरोना के संक्रमण में कमी आई है स्वास्थ्य एवं पुलिस के कई कर्मचारी अपनी जान भी गवां चुके हैं। इप्सेफ के राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्रा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा डीए फ्रीज करने के निर्णय के उपरांत राज्य सरकारों ने डीए तो सभी कर्मचारियों का फ्रिज कर दिया इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 भत्ते और फ्रीज कर दिया।

2 दिन का वेतन काटने का आदेश निर्गत करना उचित नहीं: वीपी मिश्रा

वही राजस्थान सरकार द्वारा 30 प्रतिशत वेतन कटौती का निर्णय इसी भांति कई राज्यों में कर्मचारियों के वेतन से अतिरिक्त कटौती की जा रही है।

उन्होंने कहा कि एक दिन का अनिवार्य रूप से वेतन काटना व उदाहरण स्वरुप उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में 2 दिन का वेतन काटने का आदेश निर्गत करना उचित नहीं है। इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता है।

इस तरह की सरकार की नीतियों से कर्मचारियों का मनोबल तो टूट ही रहा है साथ ही आक्रोश भी व्याप्त हो रहा है क्योंकि उसको भविष्य में अपने परिवार के भरण पोषण करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

वीडियो कांफ्रेंसिंग में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान, झारखंड, महाराष्ट्र के क्रमबद्ध शशि कुमार मिश्रा महासचिव कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा, अमरनाथ सिंह अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ, घनश्याम यादव महामंत्री राजकीय निगम महासंघ, अतुल मिश्रा राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ केके सचान, अशोक कुमार,सुरेश रावत आदि शामिल हुए।

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