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रात भर गर्भवती महिला को लेकर दौड़ा परिवार, इलाज के अभाव में तोड़ा दम

नोयडा प्रशासन की बड़ी लापरवाही के कारण एक गर्भवती महिला ने इलाज के अभाव में एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया। सुबह जब मीडिया ने व्यवस्था को जगाया तो नीद खुली, जांच का हवाला दे कर फिर सो गया सिस्टम।

Rahul Joy

Rahul JoyBy Rahul Joy

Published on 6 Jun 2020 10:37 AM GMT

रात भर गर्भवती महिला को लेकर दौड़ा परिवार, इलाज के अभाव में तोड़ा दम
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नोएडा। उत्तर प्रदेश के जिला गौतमबुद्ध नगर में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने की घटना सामने आई है। 8 महीने की गर्भवती महिला का । नोएडा के जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों ने भर्ती करने से मना कर दिया। रात भर परिजन महिला को लेकर अस्पतालों की चौखट पर इलाज के लिये गिड़गिड़ाते रहे, महिला दर्द से कराहती रही लेकिन निर्दयी अस्पतालों के अंदर की मानवता नही जागी। नोयडा के ज्यादातर अस्पतालों ने गर्भवती महिला को लेने से मना कर दिया और एक गर्भवती मां अपनी कोख में मासूम को लेकर निर्दयी दुनिया से हमेशा के लिये अलविदा कह दिया।

सोती रही व्यवस्था, गर्भवती महिला ने दम तोड़ा

जब नोयडा के बिजेन्द्र सिंह अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर इलाज के लिये नोएडा में भटक रहे थे, पत्नी दर्द से कराह रही थी और लाचार, मजबूर पति इलाज के लिये अस्पतालों के सामने गिड़गिड़ा रहा था,गर्भवती महिला की देख रेख और जांच शुरू से शिवालिक अस्पताल में चल रही थी। पीड़ित बिजेंद्र सिंह का कहना है कि उनकी पत्नी 8 माह से ज्यादा की गर्भवती है। 5 जून 2020 को उनकी पत्नी को पीड़ा शुरू हो गयी और वह अपनी पत्नी को लेकर रात भर अस्पतालों के चक्कर काटते रहे लेकिन किसी ने भी दाखिला नहीं दिया जिसके कारण उनकी पत्नी की एम्बुलेंस में ही मौत हो गयी। पीड़ितों के अनुसार गर्भवती महिला को लेकर वह लोग नोएडा के जिम्स हॉस्पिटल, मैक्स, एएसआई, जिला अस्पताल, शिवालिक और शारदा तक गए लेकिन सब ने एडमिट करने से मना कर दिया।

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सुबह खबर मीडिया में आने के बाद जागा प्रशासन।

नोयडा प्रशासन की बड़ी लापरवाही के कारण एक गर्भवती महिला ने इलाज के अभाव में एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया। सुबह जब मीडिया ने व्यवस्था को जगाया तो नीद खुली, जांच का हवाला दे कर फिर सो गया सिस्टम। भ्र्ष्टाचार में डूबा नोयडा प्रशासन जब तक नहीं जागेगा तब लोग मरते रहेंगे, बिलखते रहेंगे, और मानवता शर्मसार होती रहेगी।

नोएडा की यह कोई पहली घटना नही है। आयेदिन लोग इलाज के अभाव में, संसाधनों और डॉक्टरों के अभाव में दम तोड़ते रहते हैं। जिला अधिकारी ने नींद से जागते ही सिस्टम को जगाया और मामले की जांच के आदेश दे दिये। इस पूरे प्रकरण की जांच अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मुनींद्र नाथ उपाध्याय तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ दीपक अहोरी को सौंपी गई है। जिलाधिकारी ने दोनों अधिकारियों को इस प्रकरण में तत्काल जांच करते हुए कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं।

रिपोर्टर-दीपांकर जैन, नोयडा

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