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बजरंग दल का इतिहास: ऐसे हुई थी इसकी शुरुआत, इसलिए बनाया गया

वर्ष 1984 में विश्व हिन्दू परिषद की पहली धर्मसंसद मंदिर आंदोलन की शुरूआत के साथ ही हिंदू समाज में सांस्कृतिक चेतना पैदा करने के लिए विहिप ने अयोध्या में राम जानकी रथयात्रा के नाम से नियमित रूप से शोभायात्रा निकालनी शुरु की।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 3 Aug 2020 8:00 AM GMT

बजरंग दल का इतिहास: ऐसे हुई थी इसकी शुरुआत, इसलिए बनाया गया
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लखनऊ: वर्ष 1984 में विश्व हिन्दू परिषद की पहली धर्मसंसद मंदिर आंदोलन की शुरूआत के साथ ही हिंदू समाज में सांस्कृतिक चेतना पैदा करने के लिए विहिप ने अयोध्या में राम जानकी रथयात्रा के नाम से नियमित रूप से शोभायात्रा निकालनी शुरु की। इस राम जानकी रथयात्रा हिंदू समर्थक आंदोलन के रूप में प्रचारित किया गया और सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ। राम जानकी रथयात्रा में आने वाले अवरोधों को दूर करने के लिए साधु-संतो ने युवाओं से इस झांकी को निर्विघ्न रूप से जारी रखने का आहवान किया और इसके लिए पहली अक्टूबर 1984 में एक दल की स्थापना की गई, जिसे बजरंग दल के नाम से जाना गया।

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इसका राष्ट्रीय संयोजक विनय कटियार को बनाया गया था

इसका राष्ट्रीय संयोजक विनय कटियार को बनाया गया था। विनय कटियार के कानपुर का होने के कारण राम मंदिर आंदोलन के दौरान बजरंग दल सबसे ज्यादा कानपुर में ही फला-फूला। युवाओं को लगातार इससे जोड़ा गया। बजरंग दल का सूत्रवाक्य सेवा, सुरक्षा और संस्कृति है। हिंदू युवा शक्ति को समाज के प्रति संस्कारयुक्त सकारात्मक भूमिका की ओर प्रेरित करना भी बजरंग दल का मुख्य कार्य है। अयोध्या के सभी कार्यक्रमों में संगठन की उपस्थिति जरूर होती थी। हर तरह की स्थितियों से निपटने के लिए कार्यकर्ताओं को लगाया जाता था, इसलिए उन्हें हथियारों को चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता था। विहिप के शिला पूजन कार्यक्रम में भी बजरंग दल ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया।

ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने के लिए विभिन्न कालेजों में बजरंग दल द्वारा कार्यक्रम कराये गए। ऐसे ही दो कार्यक्रम कानपुर के डीएवी कालेज में भी हुए थे, जिनमे अशोक सिंहल भी पहुंचे थे। मंदिर आंदोलन की धार को तीखा रखने के लिए बजरंग दल के युवाओं को घरों पर भगवा पताका लगाने और बलिदानी जत्थे तैयार करने का काम भी सौंपा गया था। बताया जाता है कि जब बाबरी मस्जिद को तोड़ा गया था तो उस समय अयोध्या में उपस्थित लोगों में 90 प्रतिशत लोग बजरंग दल के सक्रिय कार्यकर्ता थे जिन्होंने इस काम मे अपना अहम किरदार निभाया था।

बजरंग दल हर वर्ष देश के विभिन स्थानों पर अपने कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देते है

बजरंग दल हर वर्ष देश के विभिन स्थानों पर अपने कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देने के लिए शौर्य प्रशिक्षण वर्गो का आयोजन करता है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका हर काम राष्ट्र व धर्म के लिए होता है जिसमे विवाद का कोई विषय नही है। बजरंग दल का कहना है कि वह भारत से लव जिहाद, गौ हत्या, व धर्मांतरण जैसी गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त कर ही चैन लेंगे और उनका एकमात्र उद्देश्य भारत देश को फिर से विश्वगुरु बनाना है।

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बजरंग दल अपने कार्य का विस्तार करने के लिए देशभर के मंदिरों में साप्ताहिक मिलन के कार्यक्रम के आयोजन भी करता है जिसमे बजरंग दल के कार्यकर्ता देव भक्ति के साथ साथ देशभक्ति भी करते है तथा हिन्दू समाज की सभी समस्याओं को दूर करने का प्रयत्न करते है। युवाओ से संपर्क साधने के लिए बजरंग दल खेल प्रतियोगिता व अखाड़े भी संचालित करता है जिसमे व युवाओ को शारीरिक रूप से मजबूत करने का कार्य करता है। देश की हिन्दी पट्टी के राज्यों के साथ ही दक्षिण के राज्यों तक बजरंग बल के कार्यकर्ता मौजूद है। दिलचस्प बात यह है कि बजरंग दल अपने किसी भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी को किसी भी प्रकार का पहचान पत्र उपलब्ध नही कराता है। बजरंग दल अपने 27 लाख सदस्यों और करीब 22 लाख कार्यकर्ता होने का दावा करता है।

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