सौ साल के बुजुर्गों को रहता है इस लोकतंत्र के महापर्व का बेसब्री से इंतजार

ये बुजुर्ग उन लोगों के लिए भी प्रेरणास्रोत होंगे जो लोग चुनाव के दिन घर पर होते हैं लेकिन वोट डालने नहीं जाते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन ने भी इनका कुछ अलग ही खयाल रखा है। जिला प्रशासन ऐसे बुजुर्गों को सम्मानित करने के लिए कदम आगे बढाया है। इस पहल से बुजुर्ग भी काफी खुश नजर आ रहे हैं।

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शाहजहांपुर: इस बार लोकसभा चुनाव में यूपी के शाहजहांपुर में 634 बुजुर्ग ऐसे हैं। जिनकी उम्र 100 साल के करीब है। ये ऐसे बुजुर्ग हैं  जिनके चलने पर पैर कांपते है। लेकिन फिर भी उन्हें चुनाव का बेसब्री से इंतजार रहता है। अपनी लंबी उम्र में उन्होंने कई चुनाव देखे है। जिसमें उन्होंने अपना वोट डालकर कई सरकारें बनाई है।

ये बुजुर्ग उन लोगों के लिए भी प्रेरणास्रोत होंगे जो लोग चुनाव के दिन घर पर होते हैं लेकिन वोट डालने नहीं जाते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन ने भी इनका कुछ अलग ही खयाल रखा है। जिला प्रशासन ऐसे बुजुर्गों को सम्मानित करने के लिए कदम आगे बढाया है। इस पहल से बुजुर्ग भी काफी खुश नजर आ रहे हैं।

यूपी के शाहजहांपुर में 29 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन तमाम अनोखी पहल शुरू कर मतदाताओं को जागरूक करने का कार्य कर रहा है। लेकिन एक अच्छी बात और भी है। भले ही नौजवान और महिलाएं वोट डालने में ज्यादा रूचि न दिखाती हों। लेकिन शाहजहांपुर में  अभी भी 634 ऐसे बुजुर्ग हैं। जो इस चुनावी महापर्व का बेसब्री से इंतजार करता है। इन बुजुर्गों की उम्र सौ साल के करीब है। लेकिन उनके अंदर आज भी मतदान का करने का जज्बा देखते बनता है। ये बुजुर्ग अपने कांपते पैरों से बूथ पर वोट डालने जाएंगे।

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ऐसे में हमने सौ साल की उम्र के करीब दो वोटरों से बात की तो उन्होंने पहले के चुनाव के कुछ दिलचस्प किस्से भी सामने आए। उन्होंने ये भी बताया कि कभी भी ऐसा नही हुआ जब उन्होंने मतदान न किया हों। दर्जनों चुनाव में  वोट डालकर उन्होंने सरकार बनाई है। लेकिन पहले के चुनाव और अब होने वाले चुनाव मे बहुत फर्क है। साथ ही जिला प्रशासन ने भी इन बुजुर्ग वोटरों का कुछ खास ख्याल रखा है। इस बार जिला प्रशासन इन बुजुर्ग वोटरों को सम्मानित भी करेगा।

बुजुर्ग रामनारायण मल्होत्रा का कहना है कि उनकी उम्र सौ साल के करीब होने को आई है। इससे पहले दर्जनों चुनाव में अपना वोट डाला है। कई साल पहले तो कई माह पहले से चुनाव का माहौल बनना शुरू हो जाता था। पहले के नेता महंगी महंगी गाड़ियों में वोट मांगने नही आते थे। पहले तो नेता साईकिल पर वोट मांगने आते थे। तब जनता नेता का दिल देखते थे। पूरे गांव मे घूमकर एक एक घर जाकर पसीना बहाकर उम्मीदवार को जिताने की अपील करते थे।

पहले पैसा खर्च नही होता था। मेनहत ज्यादा होती थी। लेकिन अब मेनहत कम पैसा पानी की तरह बहाया जाता है। नेता गांव में एक घर पर आते है वहीं सबको बुलाकर वोट मांग लेते है। हालांकि चुनाव आयोग ने पैसा खर्च करने वालों पर पैनी नजर बनाई है। लेकिन पूरी तरह से चुनाव आयोग पैसा खर्च करने वाले नेताओं पर लगाम नही लगा पाया है। अब तो प्रचार भी सुनने में  नही आता है। उनका कहना है कि वह लोकसभा चुनाव में  वोट डालने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन की भी तारीफ की है कि अब जिला प्रशासन सौ साल से ज्यादा के वोटरों को सम्मानित करने की बात कर रहा है। ये तारिफ करने वाली बात है।

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इस उम्र के इतने वोट है शाहजहांपुर जनपद में।

50 से 59 साल के तीन लाख 419 वोटर

60 से 69 साल के एक लाख 72 हजार वोटर

70 से 79 साल के 76 हजार 209 वोटर

80 से 89 साल के 24 हजार 590 वोटर

90 से 99 साल के चार हजार 335 वोटर

100 साल के 634 वोटर

ऐसी ही एक सौ साल के करीब बुजुर्ग महिला प्रकाश देवी से बात की तो उनका कहना है कि एक समय था जब चुनाव का शोर होता था। कुछ कुछ देर में  प्रचार करती गाङियां निकलकर जाती थी। लेकिन अब पता ही नही चलता है कि कब चुनाव आया और कब चला गया। चुनाव आयोग ने सख्ती तो की है। लेकिन सख्ती का असर मिलाजुला दिखता है। उनका कहना है कि हमारे जमाने में  चुनाव में पैसा नही खर्च होता था। उसके बाद एक वक्त आया जब पैसे के दम पर खुलेआम पैसे के बल पर चुनाव लड़ा  जाने लगा। लेकिन अब चुनाव आयोग की सख्ती के आगे खुलेआम कुछ नही होता। लेकिन अंदरखाने सब कुछ होता है। जो किसी से छिपा नही है । उनका कहना है कि लंबे लंबे घूंघट में  जाकर हमने वोट डाला है।