काशी का ऑनलाइन म्यूजियम: आएगा इतना काम, देगा मंदिरों की पूरी व सटीक जानकारी

आगामी 05 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण का शुभारम्भ भूमि पूजन से करेंगे।

मनीष श्रीवास्तव

लखनऊ: आगामी 05 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण का शुभारम्भ भूमि पूजन से करेंगे। राम मंदिर का निर्माण शुरू होते ही अब काशी के बाबा विश्वनाथ मंदिर के संबंध में पूरी जानकारी जुटाने की तैयारी की जा रही है। इस पूरी जानकारी को एक आनलाइन म्यूजियम तैयार करके, उसमे डाला जायेगा और एक क्लिक पर ही श्री काशी विश्वनाथ धाम की पूरी जानकारी सामने आ जायेगी।

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भारत में बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक वाराणसी में आते है

दरअसल, भारत में बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक वाराणसी में आते है। वाराणसी में आने वाले श्रद्धालुओं, देशी-विदेशी पर्यटकों और शोध विद्यार्थियों को यहां के संबंध में जानकारी के लिए काफी भटकना पड़ता है और ये पूरी तरह से स्थानीय पंडितों या गाइड़ों पर निर्भर होते है, जो उन्हे पूरी और सटीक जानकारी नहीं दे पाते है। इस कमी को पूरा करने के लिए काशी में जल्द ही श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कला इतिहास विभाग तथा भारत सरकार के नेशनल म्यूजियम विभाग के साथ काशी में मिले प्राचीन मंदिरों का इतिहास, उनकी प्राचीनता उनकी विशेषता के अलावा मंदिरों के निर्माता की जानकारी भी जुटाने का काम भी करेगा।

300 भवनों में से करीब 60 भवनों में मंदिर मिले हैं

काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के मुताबिक श्री काशी विश्वनाथ धाम के लिए खरीदे गए 300 भवनों में से करीब 60 भवनों में मंदिर मिले हैं, इनमे से 30 मंदिरों का जिक्र तो स्कंद पुराण में भी है। इसके अलावा मिले मंदिरों को पूरी तरह से वास्तु कला के आधार पर बनाया गया है और बहुत ही सुंदर तरीके से नक्काशी की गई है। मंदिर प्रशासन इस काम के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कला इतिहास विभाग तथा भारत सरकार के नेशनल म्यूजियम विभाग के साथ एक टीम भी गठित कर रहा है। ये टीम काशी विश्वनाथ मंदिर के हर पहलू की जांच करेगी।

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बता दे कि पिछले दिनों वाराणसी के मंडलायुक्त की अध्यक्षता में इस संबंध में एक बैठक भी हो चुकी है। जिसमें बीएचयू के कला इतिहास विभाग की ओर से इसके क्रियान्वयन की योजना की पूरी रूपरेखा पेश की गई थी। बैठक में मंडलायुक्त ने वह बिंदु भी तय किए थे जिन पर काम होना है। इनमे मंदिरों की कलाकारी किस काल की है, यह मंदिर कितने पुराने हैं, इन मंदिरों को बनाने में किस वास्तुकला का प्रयोग किया गया है। इन मंदिरों का निर्माण किन शासकों के कार्यकाल में किया गया है, जैसी तमाम जानकारी जुटाने के लिए कहा गया था। एकत्र करने की जरूरत है, ताकि देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु, रिसर्च स्कॉलर पर्यटक को मंदिरों की जानकारी प्राप्त हो सके।

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