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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बजटीय प्रस्तावों पर कही ये बड़ी बात

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बजटीय प्रस्तावों की समीक्षा के संबंध में विधायकों की 'क्षमता निर्माण' का उल्लेख करते हुए कहा कि बजट सरकार का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक नीति उपकरण है और बजट पर संसद और विधान सभाओं में सार्थक और उपयोगी चर्चाएं हो सकें।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 16 Jan 2020 2:24 PM GMT

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बजटीय प्रस्तावों पर कही ये बड़ी बात
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किसान के उत्पादन को अंतराष्ट्रीय पहचान मिलनी चाहिए- ओम बिड़ला
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लखनऊ: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बजटीय प्रस्तावों की समीक्षा के संबंध में विधायकों की 'क्षमता निर्माण' का उल्लेख करते हुए कहा कि बजट सरकार का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक नीति उपकरण है और बजट पर संसद और विधान सभाओं में सार्थक और उपयोगी चर्चाएं हो सकें, इसके लिए सदस्यों का क्षमता निर्माण आवश्यक है। इसके अतिरिक्त संसदीय समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

उन्होंने जोर दे कर कहा कहा कि संसदीय और विधान मंडलों की समितियां सरकार के बजट, नीतियों, कार्यक्रमों, योजनाओं, परियोजनाओं एवं उसके कार्यान्वयन का मूल्यांकन करती है और इनके सदस्यगण विभिन्न मुद्दों पर अपनी दलगत प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर कीमती सुझाव समिति को देते हैं।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि संसदीय समितियां सुशासन का मार्ग प्रशस्त करने के अतिरिक्त, पारदर्शिता और जवाबदेही के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। इसलिए बजट पर संसद और विधान सभाओं में सार्थक और उपयोगी चर्चाएं सुनिश्चित करने के लिए सदस्यों का क्षमता निर्माण आवश्यक है।

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दूसरे विषय अर्थात ''विधायी कार्यों' की ओर विधायकों का ध्यान केंद्रित करना'' का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सदस्यों को नियमों और प्रक्रियाओं का गहन ज्ञान और संवैधानिक प्रावधानों की पर्याप्त समझ होनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि प्रत्येक सांसद और विधायक राष्ट्र के आदर्शों, आशाओं और विश्वास का अभिरक्षक है और गरीब तबकों की आवाज उठाने में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि संसदीय वाद-विवाद में जीवंतता और सक्रियता का संचार होता है और इसीलिए ज्ञानपूर्ण वाद-विवाद के लिए बोलने की स्वतंत्रता आवश्यकता है। यह विचार व्यक्त करते हुए कि असहमति एक लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति है और उन्होंने कहा कि इसे निश्चित मानदंडों के भीतर रहते हुए अभिव्यक्त किया जाना चाहिए और संसदीय वाद विवाद निर्धारित नियमों के आधीन होना चाहिए।

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इसी के साथ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी लोकतंत्र में निर्वाचित प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करता है क्योंकि जनप्रतिनिधि निरंतर जनता के साथ अंतर-संवाद करता रहता है। अतरू विधायकों का यह कर्त्तव्य बनता है कि किसी भी नीति के निर्माण के समय उनका पक्ष मजबूती से सदन में रखे और आम नागरिकों के सरोकारों के अनुरूप सरकार की नीतियों को प्रभावित करे।

इन नेताओं ने रखे अपने विचार

दो दिवसीय कामनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (सीपीए) सम्मेलन में निर्धारित विषय बजटीय प्रस्तावों की समीक्षा के संबंध में विधायकों का क्षमता निर्माण’’ पर शुभारम्भ राज्य सभा के उपाध्यक्ष, हरिवंश नारायण सिंह ने प्रारम्भ किया। उसके उपरांत बिहार विधान सभा अध्यक्ष, विजय कुमार चौधरी, कर्नाटक विधान सभा अध्यक्ष, विश्वेश्वर हेगड़े केगेरी, अरूणांचल विधान सभा अध्यक्ष, श पसंग दोरजी सोना, उड़ीसा विधान सभा अध्यक्ष, डाॅ0 सुरज्या नारायणा पात्रो, राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष, सीपी जोशी, गुजरात विधान सभा अध्यक्ष, राजेन्द्र त्रिवेदी, मलेशिया के सांसद, करूपईया मुटुसमी, असम विधान सभा अध्यक्ष, हितेन्द्र नाथ गोस्वामी, झारखण्ड विधान सभा अध्यक्ष, रवीन्द्र नाथ महतो, हरियाणा प्रदेश के विधान सभा अध्यक्ष, ज्ञानचन्द्र गुप्ता एवं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के सांसद, अजय कुमार मिश्र (टेनी) सहित 12 सदस्यों ने भी अपने विचार प्रकट किए।

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इस अवसर पर प्रकाशित स्मारिका राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ का उत्तर प्रदेश में प्रथम ऐतिहासिक अधिवेशन भारतीय परिक्षेत्र का विमोचन भी किया गया। उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ में पधारे लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला एवं विभिन्न प्रदेशों के विधान मण्डलों से आये पीठासीन अधिकारियों एवं विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उद्घाटन बैठक में मध्य प्रदेश के राज्यपाल लाल जी टण्डन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ, नेता प्रतिपक्ष, राम गोविन्द चैधरी ने भी सम्बोधित किया। विधान परिषद के सभापति द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव किया गया।

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