भाजपा नेता के सभा में लगे मुर्दाबाद के नारे, फिर हुआ ऐसा वाकया

बुधवार को जिले के जिस क्षेत्र में सांसद मेनका गांधी जिंदाबाद के नारे लगे वही कुछ समय बीतते ही उसी मंच से मेनका गांधी मुर्दाबाद के नारे लगे।

Published by Deepak Raj Published: January 29, 2020 | 9:20 pm
Modified: January 29, 2020 | 9:21 pm

सुल्तानपुर। बुधवार को जिले के जिस क्षेत्र में सांसद मेनका गांधी जिंदाबाद के नारे लगे वही कुछ समय बीतते ही उसी मंच से मेनका गांधी मुर्दाबाद के नारे लगे। लोगों ने मेनका की गाड़ी को घेर लिया और फिर कहा कि आप यहां से भाग जाएं। आपको बता दें कि सांसद दो दिवसीय दौरे पर सुल्तानपुर पहुंची हैं।

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दरअसल चांदा के स्थानीय लोग चांदा में सांसद द्वारा मांग न सुने जाने पर आक्रोशित हुए थे। लोग चांदा में हाल्ट रेलवे स्टेशन को स्टेशन का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे थे जिसे सांसद ने अनसुना कर दिया। सांसद के इस रवैये से वहां मौजूद भीड़ आक्रोशित हो गई।

हाल्ट स्टेशन को स्टेशन का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे थे ग्रामीण

लोगो ने सांसद मुर्दाबाद के नारे लगाये, उनकी गाड़ी का घेराव किया। लोगों के द्वारा पांच सूत्रीय मांग पत्र सांसद को दिया था, जिसमे हाइवे को गड्ढा मुक्त कराना, आवारा पशुओ की स्थायी रोकथाम, चांदा कस्बे में सार्वजिनक शुलभ शौचलय का निर्माण, लेकिन सांसद इस पर उन्हें कोई आश्वासन नही दिया।

मेनका गांधी ने माना देश में नौकरियों की है कमी

कादीपुर के राम चरित्र मिश्र पीजी कालेज में लगे रोजगार मेले के शुभारंभ के मौके पर बुधवार को मंच से कहा कि आज कल देश में नौकरियां बहुत कम है, इसलिए जो भी नौकरी मिलती है उसको ईमानदारी से लेने पहुंच जाइए। उन्होंने कहा कि यहां 58 कंपनियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार मिलेगा, इसे गंभीरता से लें।

इसलिए की पीलीभीत में मैं कंपनियों को विनती कर करके लाती थी, और जिन लड़कों को नौकरी मिलती थी उसमें से 50 फीसदी लोग तो नौकरी के लिए पहुंचते ही नही थे। दिल्ली में मैने अपने दफ्तर में देखा अप्लाई करते थे दो हजार।

 

 

हम उनमे से चुनेगे सौ, इंटरव्यू में आएंगे 30 हम उनमे से चुनेगे 5 और नौकरी के लिए आएगा एक। मुझे ये अजीब लगता है। आप अगर चुने जाते हैं तो नौकरी के लिए जाइएगा।

हिंदुस्तान में सबसे कम मुद्रा लोन सुल्तानपुर में दिया गया था

मेनका गांधी ने आगे कहा कि आपमे से बहुत से लोग हैं जो नौकरी के खिलाफ इकट्ठा होकर के कुछ नई चीज शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं आपको मिसाल बताती हूं। गांव की कुछ विधवाओ ने कुछ करना चाहा। मैने दो काम किया, एक तो 3 हजार औरतों को मशरूम का काम सीखाया।

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एक औरत उसमे पांच हजार से दस हजार रुपए महीने कमा सकती है। दूसरे मुद्रा योजना में जब मैं यहां आई थी तो पूरे हिंदुस्तान में सबसे कम यहां पर दी गई थी। एक हजार से कम लड़के-लड़कियों और व्यापारियों को मुद्रा योजना दी गई थी। इस वक्त हम लोग 11 हजार पहुंच गए हैं और इस साल टारगेट है एक लाख परिवारों तक मुद्रा लोन पहुंचाया जाए।